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भारतीय अर्थव्यवस्था में 'भुगतान संतुलन' (Balance of Payments - BoP) और इसके घटकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भुगतान संतुलन के 'चालू खाता' (Current Account) के अंतर्गत दृश्य वस्तुओं (Merchandise Goods) के व्यापार के साथ-साथ अदृश्य वस्तुओं (Services), प्रेषण (Remittances) और निवेश आय को शामिल किया जाता है, तथा चालू खाता घाटा (CAD) तब उत्पन्न होता है जब देश की कुल विदेशी मुद्रा प्राप्तियां (Receipts) उसके कुल विदेशी भुगतानों (Payments) से अधिक हो जाती हैं।
- 2. 'पूंजी खाता' (Capital Account) देश के उन सभी अंतरराष्ट्रीय लेन-देन को दर्ज करता है जो देश की परिसंपत्तियों या देनदारियों (Assets and Liabilities) को प्रभावित करते हैं, जिसके अंतर्गत विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI), विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) और बाहरी वाणिज्यिक उधार (ECB) को शामिल किया जाता है।
- 3. आधिकारिक आरक्षित खाता (Official Reserve Account) भुगतान संतुलन का एक अनिवार्य हिस्सा है, और यदि चालू खाते और पूंजी खाते का कुल योग शून्य नहीं होता है, तो इस असंतुलन को पूरा करने या समायोजित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी मुद्रा भंडारों (Foreign Exchange Reserves) में परिवर्तन के माध्यम से इसका समायोजन किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि 'चालू खाता घाटा' (CAD) तब उत्पन्न होता है जब देश की कुल विदेशी मुद्रा प्राप्तियां उसके कुल विदेशी भुगतानों से कम होती हैं, न कि अधिक। यदि प्राप्तियां भुगतानों से अधिक होती हैं, तो उसे चालू खाता अधिशेष (Current Account Surplus) कहा जाता है।
कथन 2 सही है। पूंजी खाता देश की विदेशी परिसंपत्तियों और देनदारियों में होने वाले परिवर्तनों को दर्ज करता है, जिसमें FDI, FPI और ऋण (जैसे ECB) शामिल होते हैं।
कथन 3 सही है। भुगतान संतुलन लेखांकन रूप से हमेशा संतुलित (Balanced) होता है। चालू और पूंजी खातों के योग में होने वाले अंतर (असंतुलन) को केंद्रीय बैंक द्वारा 'आधिकारिक आरक्षित खाते' (Official Reserve Account) के माध्यम से समायोजित किया जाता है।
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सामान्य विज्ञान और पर्यावरण के संदर्भ में, 'महासागरीय अम्लीकरण' (Ocean Acidification) और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर इसके प्रभावों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय अम्लीकरण मुख्य रूप से वायुमंडल में मानवजनित कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) के बढ़ते अवशोषण के कारण होता है, जिससे समुद्र के जल का pH स्तर गिर जाता है और यह प्रक्रिया समुद्र के क्षारीय (Alkaline) होने की प्रवृत्ति को और अधिक तीव्र कर देती है।
2. जब कार्बन डाइऑक्साइड समुद्री जल में घुलती है, तो यह जल के साथ अभिक्रिया करके कार्बोनिक अम्ल बनाती है, जो वियोजित होकर हाइड्रोजन आयनों ($H^+$) और बाइकार्बोनेट आयनों को मुक्त करता है, जिससे उपलब्ध कार्बोनेट आयनों की सांद्रता में कमी आ जाती है।
3. कार्बोनेट आयनों की सांद्रता में यह कमी कैल्सीफाइंग जीवों (Calcifying Organisms), जैसे कि प्रवाल भित्तियों (Coral Reefs), मोलस्क और कुछ प्रकार के फाइटोप्लांकटन के लिए कैल्शियम कार्बोनेट ($CaCO_3$) के कंकाल और कवच का निर्माण करना अत्यंत कठिन बना देती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय इतिहास, कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, 'गुप्तोत्तर काल' (Post-Gupta Period) के दौरान प्रचलित भूमि अनुदान प्रणालियों और प्रशासनिक शब्दावली के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गुप्त और गुप्तोत्तर काल में राजाओं द्वारा ब्राह्मणों, मंदिरों और प्रशासनिक अधिकारियों को जो कर-मुक्त भूमि अनुदान (Agrahara Grants) दिए जाते थे, उनके परिणामस्वरूप स्थानीय स्तर पर एक नए सामंती वर्ग (Feudal Order) का उदय हुआ, जिससे किसानों की स्थिति धीरे-धीरे उप-कृषकों या अर्ध-दासों (Serfs) जैसी होने लगी।
2. इस काल के अभिलेखों में प्रयुक्त 'अग्रहार' (Agrahara) शब्द उस भूमि को इंगित करता था जो केवल बौद्ध विहारों को दान में दी जाती थी, जबकि जैन संस्थाओं को दिए जाने वाले भूमि अनुदानों को 'देवदान' कहा जाता था।
3. भूमि अनुदान दस्तावेजों में उल्लिखित 'विष्टि' (Vishti) का तात्पर्य जबरन श्रम या बेगार से था, जिसका उपयोग राजाओं और भूमि अनुदान प्राप्तकर्ताओं द्वारा बिना किसी पारिश्रमिक के सार्वजनिक कार्यों या व्यक्तिगत खेतों में काम करवाने के लिए किया जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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नगर पालिकाओं से संबंधित 12वीं अनुसूची किस संशोधन द्वारा जोड़ी गई थी?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग III' के अंतर्गत प्रदत्त 'समानता के अधिकार' (अनुच्छेद 14 से 18) और विशेष रूप से 'उपाधियों का अंत' (अनुच्छेद 18) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 18(1) राज्य को यह निर्देश देता है कि वह सेना या विद्या संबंधी सम्मान के अलावा किसी अन्य प्रकार की कोई उपाधि (Title) प्रदान नहीं करेगा, तथा यह प्रतिबंध केवल भारतीय नागरिकों पर लागू होता है, विदेशी नागरिकों पर नहीं।
2. अनुच्छेद 18(2) के अनुसार, भारत का कोई भी नागरिक किसी भी विदेशी राज्य से बिना राष्ट्रपति की पूर्व सहमति के कोई भी उपाधि स्वीकार नहीं कर सकता है।
3. उच्चतम न्यायालय ने 'बालाजी राघवन बनाम भारत संघ' (1996) के ऐतिहासिक निर्णय में यह स्पष्ट किया कि 'भारत रत्न', 'पद्म विभूषण', 'पद्म भूषण' और 'पद्म श्री' जैसे राष्ट्रीय पुरस्कार अनुच्छेद 18 के अर्थ के अंतर्गत 'उपाधियाँ' (Titles) नहीं हैं, इसलिए इनका प्रयोग प्राप्तकर्ता द्वारा अपने नाम के आगे या पीछे प्रत्यय (Suffix) या उपसर्ग (Prefix) के रूप में किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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लखनऊ समझौते (1916) में किनके बीच समझौता हुआ?
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