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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता संरक्षण के संदर्भ में, भारत में 'अनिवार्य कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व' (CSR) के विधिक प्रावधानों, कंपनियों अधिनियम, 2013 की धारा 135 तथा इससे संबंधित अनुसूचियों के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. कंपनियों अधिनियम, 2013 की धारा 135 के तहत, किसी भी वित्तीय वर्ष में न्यूनतम 500 करोड़ रुपये या उससे अधिक का शुद्ध मूल्य (Net Worth), अथवा 1000 करोड़ रुपये या उससे अधिक का टर्नओवर, अथवा 5 करोड़ रुपये या उससे अधिक का शुद्ध लाभ अर्जित करने वाली कंपनियों के लिए सीएसआर (CSR) समिति का गठन करना और पिछले तीन वर्षों के औसत शुद्ध लाभ का कम से कम 2 प्रतिशत हिस्सा सीएसआर गतिविधियों पर खर्च करना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
- 2. कंपनियों अधिनियम, 2013 की अनुसूची VII (Schedule VII) में उन विशिष्ट सामाजिक और पर्यावरणीय गतिविधियों की एक विस्तृत सूची दी गई है जिन्हें सीएसआर गतिविधियों के रूप में मान्यता दी जा सकती है, जिसके अंतर्गत पर्यावरण स्थिरता, पारिस्थितिक संतुलन की सुरक्षा, वन्यजीव संरक्षण, और स्वच्छ भारत कोष में योगदान जैसे कार्य शामिल हैं।
- 3. यदि कोई पात्र कंपनी अपने निर्धारित सीएसआर व्यय को किसी वित्तीय वर्ष में पूरी तरह खर्च नहीं कर पाती है और वह राशि किसी चल रही परियोजना (Ongoing Project) से संबंधित नहीं है, तो कंपनी को ऐसी unspent CSR राशि को 30 दिनों के भीतर एक विशेष खाते में ट्रांसफर करना होगा, जिसे 'अन्स्पेंड कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉसिबिलिटी अकाउंट' (Unspent CSR Account) कहा जाता है, तथा इस राशि को 3 वर्ष के भीतर खर्च करना अनिवार्य होता है, अन्यथा इसे सरकार द्वारा निर्दिष्ट किसी निर्धारित फंड में जमा करना पड़ता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: कंपनियों अधिनियम, 2013 की धारा 135 के अनुसार, जिन कंपनियों का नेट वर्थ ₹500 करोड़ या अधिक, टर्नओवर ₹1000 करोड़ या अधिक, अथवा शुद्ध लाभ ₹5 करोड़ या अधिक है, उन्हें सीएसआर समिति का गठन करना होता है और अपने पिछले तीन वर्षों के औसत शुद्ध लाभ का कम से कम 2% हिस्सा सीएसआर गतिविधियों पर खर्च करना अनिवार्य है। कथन 2 सही है: अधिनियम की अनुसूची VII (Schedule VII) में उन गतिविधियों की सूची दी गई है जिन्हें सीएसआर के तहत पात्र माना जाता है, जिसमें पर्यावरण स्थिरता, पारिस्थितिकी सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, वनीकरण और स्वच्छ गंगा कोष या प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष आदि शामिल हैं। कथन 3 सही है: अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई कंपनी अपनी सीएसआर राशि को खर्च नहीं कर पाती है और वह राशि किसी चल रही परियोजना (Ongoing Project) से संबंधित नहीं है, तो उसे 30 दिनों के भीतर 'Unspent CSR Account' में स्थानांतरित करना होगा और 3 वर्षों के भीतर खर्च करना होगा, अन्यथा इसे अनुसूची VII में निर्दिष्ट फंड में ट्रांसफर करना होगा। अतः तीनों कथन सही हैं।
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वुड का डिस्पैच (Wood Despatch) किस वर्ष जारी किया गया था?
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भारतीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन' (National Infrastructure Pipeline - NIP) के प्रावधानों और लक्ष्यों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) को वर्ष 2019 में केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा लॉन्च किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य देश में सामाजिक और आर्थिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में पारदर्शिता लाना, वैश्विक स्तर की विश्वस्तरीय अवसंरचना प्रदान करना तथा वर्ष 2020 से 2025 की अवधि के दौरान कुल 111 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का अनुमान लगाना था।
2. इस पाइपलाइन के अंतर्गत वित्त पोषण (Financing) की संरचना में केवल केंद्र सरकार और राज्य सरकारों का ही प्रत्यक्ष योगदान होता है, तथा निजी क्षेत्र (Private Sector) की भागीदारी के लिए इसमें किसी भी प्रकार के सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल का कोई प्रावधान नहीं रखा गया है।
3. NIP के तहत ऊर्जा, सड़क, रेलवे, शहरी विकास और सिंचाई जैसे क्षेत्रों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है, और इस पहल की प्रगति की निगरानी के लिए वित्त मंत्रालय के अंतर्गत 'अतनु चक्रवर्ती समिति' (Atanu Chakraborty Task Force) की सिफारिशों के आधार पर एक उच्च-स्तरीय निगरानी तंत्र स्थापित किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 356' (राष्ट्रपति शासन) और 'राज्यपाल की भूमिका' से संबंधित ऐतिहासिक न्यायिक निर्णयों और प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत यदि राष्ट्रपति को किसी राज्य के राज्यपाल की रिपोर्ट या अन्य माध्यम से यह समाधान हो जाता है कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसमें राज्य का शासन संविधान के उपबंधों के अनुसार नहीं चलाया जा सकता है, तो राष्ट्रपति उस राज्य के शासन के सभी या कोई कृत्य अपने हाथ में ले सकता है।
2. ऐतिहासिक 'एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994)' वाद में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि राष्ट्रपति शासन की घोषणा का न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) किया जा सकता है, और यदि यह घोषणा दुर्भावनापूर्ण पाई जाती है या अपर्याप्त आधारों पर आधारित है, तो न्यायालय भंग की गई विधानसभा को पुनर्जीवित कर सकता है।
3. अनुच्छेद 356 के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा की गई उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा उसकी जारी होने की तारीख से दो महीने के भीतर अनुमोदित किया जाना अनिवार्य है, और यदि एक बार संसद के दोनों सदनों द्वारा इसका अनुमोदन कर दिया जाए, तो यह उद्घोषणा अनिश्चित काल के लिए बिना किसी अधिकतम समय सीमा के लागू रह सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय इतिहास और कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, मध्यकालीन भारत के दौरान विजयनगर साम्राज्य की 'नायङ्कार व्यवस्था' (Nayankara System) और 'आयागर व्यवस्था' (Ayyagar System) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नायङ्कार व्यवस्था के अंतर्गत 'नायक' (Nayakas) सैन्य कमांडर होते थे जिन्हें राजा द्वारा भूमि का एक टुकड़ा (अमरम) अनुदान के रूप में दिया जाता था, और इसके बदले उन्हें एक निश्चित संख्या में सैनिक रखकर राजा को सैन्य सहायता देनी पड़ती थी तथा अपनी आय का एक हिस्सा शाही खजाने में जमा करना होता था।
2. आयागर व्यवस्था ग्रामीण प्रशासन से संबंधित थी, जिसके अंतर्गत बारह विशेष पदाधिकारियों का एक समूह (आयागर) होता था जो गाँव के प्रशासनिक और आर्थिक कार्यों का संचालन करता था, और इन अधिकारियों को उनके वंशानुगत अधिकारों के बदले कर-मुक्त भूमि (मान्यम) प्रदान की जाती थी।
3. विजयनगर साम्राज्य के केंद्रीय प्रशासन में 'महामंडलेश्वर' नामक अधिकारी सीधे तौर पर सम्राट के अधीन रहकर गांवों के प्रत्यक्ष राजस्व संग्रह का कार्य करते थे, और उन्हें विजयनगर के शासकों द्वारा पूर्ण वित्तीय और न्यायिक स्वायत्तता प्राप्त थी, जिस पर केंद्रीय नियंत्रण नगण्य था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'भूकंपीय तरंगों' (Seismic Waves) और पृथ्वी के आंतरिक भाग की संरचना से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भूकंप के उद्गम केंद्र (Focus/Hypocenter) से उत्पन्न होने वाली तरंगों में 'प्राथमिक तरंगें' (P-waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) प्रकृति की होती हैं, जो ठोस, तरल और गैस—तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं, जबकि 'द्वितीयक तरंगें' (S-waves) अनुप्रस्थ (Transverse) प्रकृति की होती हैं और वे केवल ठोस माध्यमों से ही गुजर सकती हैं।
2. पृथ्वी के आंतरिक भाग में क्रोड (Core) की सीमा के पास पहुँचने पर S-तरंगों का गायब हो जाना और P-तरंगों का मार्ग से विचलित होकर मंद गति से आगे बढ़ना इस बात का सबसे पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण प्रदान करता है कि बाहरी क्रोड (Outer Core) तरल अवस्था में है।
3. धरातल पर पहुँचने वाली 'धरातलीय तरंगें' (Surface Waves या L-waves) शरीरिक तरंगों (Body Waves) की तुलना में अधिक गहराई तक यात्रा करती हैं और पृथ्वी के केंद्र से गुजरते हुए सबसे अधिक विनाशकारी प्रभाव उत्पन्न करती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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