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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 143' के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय के 'सलाहकार क्षेत्राधिकार' (Advisory Jurisdiction) तथा इससे संबंधित प्रावधानों और न्यायिक परंपराओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि यदि किसी समय उन्हें यह प्रतीत होता है कि विधि या तथ्य का कोई ऐसा प्रश्न उत्पन्न हुआ है जो सार्वजनिक महत्व का है, तो वह उस पर सर्वोच्च न्यायालय की राय प्राप्त करने के लिए उसे विचार हेतु संदर्भित कर सकते हैं।
- 2. अनुच्छेद 143 के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा संदर्भित किसी भी विषय पर सर्वोच्च न्यायालय के लिए अपनी राय या सलाह देना संवैधानिक रूप से पूरी तरह से अनिवार्य (Mandatory) है, तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दी गई वह सलाह कार्यपालिका और राष्ट्रपति पर हमेशा बाध्यकारी होती है।
- 3. 'अयोध्या प्रकरण (एम. इस्माइल फारूकी मामला)' और 'केरल शिक्षा विधेयक (1958)' जैसे मामलों में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि अनुच्छेद 143 के तहत न्यायालय राष्ट्रपति द्वारा भेजे गए प्रश्नों के उत्तर देने से इनकार भी कर सकता है, विशेषकर तब जब संदर्भित प्रश्न अस्पष्ट, राजनीतिक प्रकृति के हों या जिन पर निष्पक्ष न्यायसंगत राय देना संभव न हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 143 के अनुसार, यदि राष्ट्रपति को यह प्रतीत होता है कि विधि या तथ्य का कोई ऐसा प्रश्न उत्पन्न हुआ है या उत्पन्न होने की संभावना है, जो सार्वजनिक महत्व का है, तो वह उस प्रश्न पर सर्वोच्च न्यायालय की राय प्राप्त करने के लिए उसे उस न्यायालय के पास विचार के लिए संदर्भित कर सकते हैं।
कथन 2 गलत है: अनुच्छेद 143 के तहत दो प्रकार की श्रेणियाँ हैं। पहली श्रेणी (सार्वजनिक महत्व के प्रश्न पर) में सर्वोच्च न्यायालय के लिए राष्ट्रपति को अपनी राय देना 'विवेकपूर्ण' है, और न्यायालय अपनी राय दे भी सकता है या मना भी कर सकता है (यह अनिवार्य नहीं है)। दूसरी श्रेणी (संविधान पूर्व की संधियों, करारों आदि से उत्पन्न विवाद) में न्यायालय के लिए राष्ट्रपति को राय देना अनिवार्य है। इसके अलावा, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दी गई सलाह राष्ट्रपति या सरकार पर कभी भी 'बाध्यकारी' (Binding) नहीं होती है, यह केवल एक सलाहकार राय होती है।
कथन 3 गलत है: सर्वोच्च न्यायालय ने 'केरल शिक्षा विधेयक (1958)' मामले में यह माना था कि सार्वजनिक महत्व के मामलों में (अनुच्छेद 143(1)) न्यायालय सलाह देने से इनकार कर सकता है यदि उसे प्रश्न अनुचित या अप्रासंगिक लगे, किंतु 'अयोध्या प्रकरण (एम. इस्माइल फारूकी मामला - 1994)' में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने स्पष्ट किया था कि राष्ट्रपति द्वारा संदर्भित मामलों में न्यायालय को अपनी राय देने से पूरी तरह मना करने का अधिकार नहीं होना चाहिए, सिवाय इसके कि यदि प्रश्न असंवैधानिक या राजनीति से प्रेरित हों। हालांकि, मुख्य कानूनी बिंदु यह है कि अनुच्छेद 143(1) के तहत राय देना न्यायालय के लिए बाध्यकारी नहीं है, और कथन 2 में 'अनिवार्य' कहने के कारण कथन 2 और 3 का संदर्भ गलत हो जाता है। अतः केवल कथन 1 सही है।
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम' (NCAP) और इसके लक्ष्यों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा शुरू किया गया 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम' (NCAP) देश का पहला राष्ट्रीय स्तर का ढांचा है जिसका उद्देश्य एक निश्चित समय-सीमा के भीतर देश के सभी गैर-प्राप्ति शहरों (Non-attainment cities) में वायु गुणवत्ता में सुधार करना है।
2. मूल रूप से NCAP के तहत यह लक्ष्य रखा गया था कि वर्ष 2017 को आधार वर्ष (Base year) मानते हुए देश के चयनित शहरों में वर्ष 2024 तक पार्टिकुलेट मैटर ($PM_{2.5}$ और $PM_{10}$) की सांद्रता में 20% से 30% तक की कमी लाई जाए, जिसे बाद में संशोधित करके वर्ष 2026 तक 40% तक की कमी करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
3. राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के अंतर्गत निर्धारित लक्ष्य कानूनी रूप से बाध्यकारी (Legally binding) हैं, और यदि कोई शहर निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपने वायु प्रदूषण के स्तर को कम करने में विफल रहता है, तो संबंधित राज्य सरकार और स्थानीय निकायों पर भारी आर्थिक दंड लगाने का सांविधिक प्रावधान किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 324' के अंतर्गत 'भारत के निर्वाचन आयोग' (Election Commission of India) की संरचना, नियुक्ति और सेवा शर्तों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324(2) के अनुसार, निर्वाचन आयोग मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों (यदि कोई हों) से मिलकर बनेगा, जिनकी नियुक्ति संसद द्वारा बनाए गए किसी विधि के अधीन राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और मूल संविधान में ही यह प्रावधान था कि आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय (Multi-member body) होगा।
2. मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति से और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, जबकि अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की संस्तुति के बिना राष्ट्रपति द्वारा उनके कार्यकाल से कभी भी नहीं हटाया जा सकता है।
3. निर्वाचन आयोग के सदस्यों की सेवा शर्तें और पदावधि राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित की जाती हैं, और मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा अन्य निर्वाचन आयुक्तों दोनों को ही भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) पर भारित (Charged) वेतन एवं भत्ते प्राप्त होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति किन न्यायालयों को प्राप्त है?
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय अम्लीकरण' (Ocean Acidification) तथा समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर इसके प्रभावों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय अम्लीकरण मुख्य रूप से वायुमंडल से मानवजनित कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) के बड़े पैमाने पर महासागरीय अवशोषण के कारण होता है, जिससे समुद्री जल के pH मान में वृद्धि होती है और जल अधिक क्षारीय (Alkaline) हो जाता है।
2. जब कार्बन डाइऑक्साइड समुद्री जल में घुल जाती है, तो यह जल के साथ अभिक्रिया करके कार्बोनिक अम्ल ($H_2CO_3$) बनाती है, जो वियोजित होकर हाइड्रोजन आयनों ($H^+$) और कार्बोनेट आयनों ($CO_3^{2-}$) की सांद्रता को बढ़ा देता है।
3. महासागरीय अम्लीकरण के परिणामस्वरूप कार्बोनेट आयनों की उपलब्धता में कमी आती है, जिससे कैल्साइट और एरागैनाइट जैसे कैल्शियम कार्बोनेट खनिजों का उपयोग करके अपने कंकाल और कवच (Shells) बनाने वाले जीवों, जैसे प्रवाल भित्तियों (Coral Reefs) और पटेरोपोड (Pteropods) के लिए निर्माण और रखरखाव करना अत्यंत कठिन हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति में राष्ट्रपति किससे परामर्श लेते हैं?
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