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Indian Polity
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लोक लेखा समिति में कुल सदस्यों की संख्या कितनी है?

Detailed Explanation

लोक लेखा समिति में कुल 22 सदस्य होते हैं।
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ब्रिटिश भारत में संवैधानिक विकास के प्रारंभिक चरणों के अंतर्गत 'पिट्स इंडिया एक्ट, 1784' (Pitt's India Act, 1784) के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस अधिनियम द्वारा कंपनी के राजनीतिक और वाणिज्यिक कार्यों को पहली बार पृथक किया गया, तथा राजनीतिक मामलों के अधीक्षण और नियंत्रण के लिए ब्रिटिश मंत्रिमंडल के छह सदस्यों वाले एक नए निकाय 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' (Board of Control) की स्थापना की गई, जिससे ब्रिटिश सरकार को भारत में कंपनी के नागरिक, सैन्य और राजस्व संबंधी सभी मामलों पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त हो गया। 2. गवर्नर-जनरल की परिषद के सदस्यों की संख्या जो 'रेगुलेटिंग एक्ट, 1773' के तहत चार निर्धारित की गई थी, उसे पिट्स इंडिया एक्ट के माध्यम से घटाकर तीन कर दिया गया, ताकि गवर्नर-जनरल को निर्णय लेने में विशेष परिस्थितियों में निर्णायक मत (Casting Vote) के माध्यम से अधिक प्रशासनिक सुगमता और स्थायित्व मिल सके। 3. इस अधिनियम के माध्यम से भारत में पहली बार द्वैध शासन प्रणाली (System of Dual Government) की औपचारिक शुरुआत हुई, जिसके तहत कंपनी के व्यावसायिक मामलों का प्रबंधन 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' (Court of Directors) के हाथों में छोड़ दिया गया, जबकि राजनीतिक मामलों का प्रबंधन 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' के अधीन कर दिया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत शहरी स्थानीय शासन (नगरपालिकाओं) के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस अधिनियम द्वारा संविधान में नया भाग IX-A जोड़ा गया है, जिसका शीर्षक 'नगरपालिकाएँ' है और इसके अंतर्गत अनुच्छेद 243-P से 243-ZG तक के प्रावधान शामिल हैं, तथा बारहवीं अनुसूची में नगरपालिकाओं के कार्यक्षेत्र के लिए कुल 18 विषयों को सूचीबद्ध किया गया है। 2. अधिनियम के अनुसार प्रत्येक राज्य में तीन प्रकार की नगरपालिकाओं का गठन किया जाना अनिवार्य है—संक्रमणकालीन क्षेत्र के लिए नगर पंचायत, छोटे नगरीय क्षेत्र के लिए नगरपालिका परिषद, और बड़े नगरीय क्षेत्र के लिए नगर निगम। हालांकि, यदि किसी बड़े शहरी क्षेत्र में औद्योगिक प्रतिष्ठान स्थापित हैं और वहां स्थानीय प्रशासन की सेवाएं कोई कंपनी या औद्योगिक बोर्ड प्रदान कर रहा है, तो राज्यपाल सार्वजनिक अधिसूचना द्वारा ऐसे क्षेत्र को औद्योगिक नगरी घोषित कर सकता है और वहां नगर पालिका का गठन करना अनिवार्य नहीं होता है। 3. नगरपालिकाओं के वित्तीय सुदृढ़ीकरण और करों के निर्धारण के लिए 73वें संविधान संशोधन की भांति 74वें संशोधन में भी प्रत्येक राज्य के लिए एक पृथक् राज्य वित्त आयोग का गठन किए जाने का प्रावधान अनुच्छेद 243-Y के तहत किया गया है, जो पंचायतों के साथ-साथ नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति की भी समीक्षा करता है और करों, शुल्कों तथा टोल के आवंटन की संस्तुति करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के प्रथम भाग के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 2 के तहत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना ऐसे निबंधनों और शर्तों पर कर सके जो वह ठीक समझे, और इस शक्ति के अंतर्गत भारतीय संघ में किसी विदेशी भू-भाग को शामिल करने के लिए संविधान संशोधन करना अनिवार्य होता है। 2. अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद को किसी राज्य के क्षेत्र को बढ़ाने, घटाने, उसके नाम या सीमा में परिवर्तन करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु इस प्रकार का कोई भी अध्यादेश या विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना संसद के किसी भी सदन में पुनः स्थापित नहीं किया जा सकता है, तथा राष्ट्रपति इस विधेयक को संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसका मत जानने के लिए भेजता है, जो राष्ट्रपति या संसद पर बाध्यकारी होता है। 3. 'बेरूबारी संघ मामला (1960)' में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्धारित किया था कि भारतीय संघ के किसी भू-भाग को किसी अन्य देश को सौंपने (Cession of territory) के लिए अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद द्वारा साधारण बहुमत से साधारण विधि पारित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन अधिनियम पारित करना अनिवार्य है। 4. संविधान के अनुच्छेद 4 के अनुसार अनुच्छेद 2 और अनुच्छेद 3 के अधीन नए राज्यों के प्रवेश, स्थापना, सीमा परिवर्तन आदि से संबंधित विधियों को अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए संविधान का संशोधन नहीं माना जाएगा, जिसका अर्थ है कि ऐसी विधियाँ साधारण बहुमत और सामान्य विधायी प्रक्रिया द्वारा ही पारित की जा सकती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अनुच्छेद 360 के तहत घोषित 'वित्तीय आपातकाल' (Financial Emergency) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वित्तीय आपातकाल की घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा इसकी तिथि से दो महीने के भीतर अनुमोदन मिलना अनिवार्य है। 2. एक बार अनुमोदित होने के बाद, वित्तीय आपातकाल अनिश्चित काल के लिए तब तक लागू रहता है जब तक कि इसे राष्ट्रपति द्वारा वापस न लिया जाए। 3. वित्तीय आपातकाल के दौरान, राष्ट्रपति केंद्र और राज्यों की सेवा करने वाले सभी या किसी भी वर्ग के कर्मचारियों के वेतन और भत्तों में कटौती का निर्देश दे सकते हैं, जिसमें उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश भी शामिल हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के भाग-IVक के अंतर्गत समाविष्ट 'मूल कर्तव्यों' (Fundamental Duties) और उनके प्रवर्तन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान में मूल कर्तव्यों को शामिल करने की अनुशंसा स्वर्ण सिंह समिति द्वारा की गई थी, जिसने करों का भुगतान (Payment of Taxes) करने को भी एक मूल कर्तव्य के रूप में जोड़ने की सिफारिश की थी, जिसे तत्कालीन सरकार ने स्वीकार नहीं किया था। 2. अनुच्छेद 51क के तहत प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करे तथा उसे अक्षुण्ण रखे, और यह विशिष्ट कर्तव्य संविधान द्वारा केवल भारतीय नागरिकों पर ही नहीं, बल्कि भारत में निवास करने वाले विदेशी नागरिकों पर भी समान रूप से लागू होता है। 3. न्यायमूर्ति जे.एस. वर्मा समिति (1999) ने कुछ मूल कर्तव्यों के कानूनी प्रावधानों और उनके कार्यान्वयन से संबंधित महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे, और यह स्पष्ट किया था कि मूल कर्तव्यों की प्रकृति न्यायोचित (Justiciable) है, अर्थात् इनके उल्लंघन पर सीधे उच्चतम न्यायालय से प्रवर्तन कराया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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