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सामान्य विज्ञान और पर्यावरण के संदर्भ में, 'कोरल ब्लीचिंग' (Coral Bleaching) और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर इसके प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. कोरल ब्लीचिंग मुख्य रूप से तब होती है जब समुद्री जल के तापमान में असामान्य वृद्धि होती है, जिसके कारण प्रवाल (Corals) अपने ऊतकों में निवास करने वाले सहजीवी शैवाल (Zooxanthellae) को बाहर निकाल देते हैं, जिससे प्रवाल अपना प्राकृतिक रंग खो देते हैं और सफेद हो जाते हैं।
- 2. प्रवाल विरंजन (Bleaching) का अर्थ यह है कि प्रवाल की मृत्यु हो गई है, और विरंजन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद किसी भी स्थिति में प्रवाल पुनर्जीवित (Recover) नहीं हो सकते हैं।
- 3. जलवायु परिवर्तन और महासागर अम्लीकरण (Ocean Acidification) के अलावा, अत्यधिक पराबैंगनी (UV) विकिरण, तटीय प्रदूषण और एल नीनो (El Niño) जैसी मौसमी घटनाएं भी कोरल ब्लीचिंग के प्रमुख कारकों में शामिल हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: कोरल ब्लीचिंग तब होती है जब समुद्री जल का तापमान बढ़ता है या अन्य पर्यावरणीय तनाव उत्पन्न होते हैं, जिससे प्रवाल अपने भीतर रहने वाले सूक्ष्म शैवाल 'जूजैन्थेली' (Zooxanthellae) को बाहर निकाल देते हैं। जूजैन्थेली ही प्रवालों को उनका जीवंत रंग और अधिकांश पोषण प्रदान करते हैं। कथन 2 गलत है: ब्लीचिंग का अर्थ तुरंत प्रवाल की मृत्यु नहीं है। यदि तनाव का कारक (जैसे अत्यधिक तापमान) जल्दी समाप्त हो जाए, तो प्रवाल जूजैन्थेली को पुनः ग्रहण करके पुनर्जीवित हो सकते हैं। हालांकि, यदि तनाव गंभीर या लंबा चले, तो प्रवाल की मृत्यु हो जाती है। कथन 3 सही है: महासागरों का बढ़ता तापमान, महासागर अम्लीकरण, अत्यधिक पराबैंगनी विकिरण, तटीय क्षेत्रों में अत्यधिक तलछट और प्रदूषण, तथा अल नीनो जैसी जलवायु संबंधी परिघटनाएं कोरल ब्लीचिंग के मुख्य कारणों में शामिल हैं।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 72' के अंतर्गत राष्ट्रपति की 'क्षमादान की शक्ति' (Pardoning Power) और इसकी न्यायिक समीक्षा के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति की क्षमादान की शक्ति (अनुच्छेद 72) और राज्यपाल की क्षमादान की शक्ति (अनुच्छेद 161) में एक प्रमुख अंतर यह है कि राष्ट्रपति मृत्युदंड (Death Sentence) को पूरी तरह माफ या क्षमा कर सकता है, जबकि राज्यपाल को मृत्युदंड के मामलों में क्षमादान देने की संवैधानिक शक्ति प्राप्त नहीं है।
2. राष्ट्रपति द्वारा संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत दी गई दया याचिका (Mercy Petition) के निर्णय पर न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) लागू नहीं होती है, क्योंकि यह राष्ट्रपति का एक अनन्य और पूर्ण विवेकाधीन (Absolute Discretionary) कार्यकारी विशेषाधिकार है।
3. 'इहरूव बनाम तमिलनाडु राज्य' (1982) और बाद के अन्य मामलों में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति को अपनी क्षमादान की शक्तियों का प्रयोग करते समय केंद्रीय मंत्रिमंडल (Council of Ministers) की सलाह के अनुसार कार्य करना बाध्यकारी होता है, और यह स्वविवेक से लिया गया निर्णय नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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