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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 124(4)' और 'न्यायाधीश जांच अधिनियम, 1968' (Judges Inquiry Act, 1968) के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया (Impeachment Process) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. किसी न्यायाधीश को हटाने के लिए प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है; यदि इसे लोकसभा में प्रस्तुत किया जाता है, तो कम से कम 100 सदस्यों के हस्ताक्षर होने चाहिए, तथा यदि इसे राज्यसभा में प्रस्तुत किया जाता है, तो कम से कम 50 सदस्यों के हस्ताक्षर होने आवश्यक हैं।
  2. 2. सदन के पीठासीन अधिकारी (Speaker/Chairman) के लिए यह अनिवार्य है कि वे प्रस्तुत प्रस्ताव को बिना किसी शर्त के स्वीकार करें और आरोपों की जांच के लिए तुरंत तीन सदस्यीय समिति का गठन करें।
  3. 3. न्यायाधीश को हटाने के प्रस्ताव को संसद के दोनों सदनों द्वारा अलग-अलग, सदन के कुल सदस्यों के बहुमत (Absolute Majority) तथा उस सदन के उपस्थित और मतदान करने वाले कम से कम दो-तिहाई (2/3rd) सदस्यों के बहुमत द्वारा पारित किया जाना अनिवार्य है, और इसके लिए दोनों सदनों की संयुक्त बैठक का प्रावधान है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश को हटाने के प्रस्ताव को संसद के किसी भी सदन में लाया जा सकता है। यदि इसे लोकसभा में लाया जाता है, तो कम से कम 100 सदस्यों के हस्ताक्षर होने चाहिए और यदि राज्यसभा में लाया जाता है, तो कम से कम 50 सदस्यों के हस्ताक्षर होने आवश्यक हैं। पीठासीन अधिकारी इस प्रस्ताव को स्वीकार या अस्वीकार कर सकते हैं। कथन 2 गलत है: पीठासीन अधिकारी (लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति) के लिए यह अनिवार्य नहीं है कि वे प्रस्ताव को स्वीकार ही कर लें। वे आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति (जिसमें एक सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश, एक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और एक प्रतिष्ठित न्यायविद् होते हैं) का गठन तभी करते हैं जब वे प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं। कथन 3 आंशिक रूप से गलत है: प्रस्ताव को संसद के दोनों सदनों द्वारा अलग-अलग, प्रत्येक सदन के कुल सदस्य संख्या के बहुमत (Absolute Majority) तथा उपस्थित एवं मतदान करने वाले कम से कम दो-तिहाई सदस्यों के बहुमत (Special Majority) से पारित करना आवश्यक है, लेकिन इस प्रक्रिया के लिए 'संयुक्त बैठक' (Joint Sitting) का कोई प्रावधान नहीं है। दोनों सदनों को अलग-अलग प्रस्ताव पारित करना होता है।
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