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भारतीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास के संदर्भ में, 'सतत विकास लक्ष्य' (Sustainable Development Goals - SDGs) और उनके कार्यान्वयन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. सतत विकास लक्ष्य (SDGs) वर्ष 2015 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 'एजेंडा 2030' के एक भाग के रूप में अपनाए गए थे, जिसमें वर्ष 2030 तक प्राप्त किए जाने वाले कुल 17 वैश्विक लक्ष्य और 169 मात्रात्मक एवं गुणात्मक लक्ष्य (Targets) शामिल हैं, और ये लक्ष्य कानूनी रूप से बाल्टी (Legally Binding) प्रकृति के हैं।
- 2. भारत में सतत विकास लक्ष्यों के राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय, निगरानी और प्रगति के आकलन के लिए 'नीति आयोग' (NITI Aayog) नोडल संस्था है, जो नियमित रूप से 'SDG इंडिया इंडेक्स' जारी करती है, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय मापदंडों के आधार पर रैंक किया जाता है।
- 3. सतत विकास लक्ष्य 1 (SDG 1) 'गरीबी के सभी रूपों को हर जगह समाप्त करना' से संबंधित है, जबकि लक्ष्य 13 (SDG 13) जलवायु परिवर्तन और उसके प्रभावों से निपटने के लिए तत्काल कार्रवाई करने का आह्वान करता है, तथापि इन लक्ष्यों के वित्तपोषण की पूरी जिम्मेदारी केवल विकसित देशों की है, विकासशील देशों की इसमें कोई घरेलू वित्तीय प्रतिबद्धता नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि सतत विकास लक्ष्य (SDGs) कानूनी रूप से बाइंडिंग (Legally Binding) नहीं हैं, बल्कि ये स्वैच्छिक प्रकृति के हैं और राष्ट्र अपनी राष्ट्रीय नीतियों तथा प्राथमिकताओं के अनुसार इन्हें प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। कथन 2 सत्य है क्योंकि भारत में नीति आयोग (NITI Aayog) SDGs के कार्यान्वयन और निगरानी के लिए नोडल एजेंसी है और यह 'SDG इंडिया इंडेक्स' के माध्यम से राज्यों के प्रदर्शन का आकलन करता है। कथन 3 असत्य है क्योंकि हालांकि SDG 1 गरीबी उन्मूलन और SDG 13 जलवायु कार्रवाई से संबंधित है, परंतु इन लक्ष्यों के वित्तपोषण की जिम्मेदारी केवल विकसित देशों पर नहीं है, बल्कि इसके लिए घरेलू संसाधन जुटाने, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग दोनों की आवश्यकता होती है। अतः केवल कथन 2 सही है।
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय आम परिसंचरण' (Oceanic General Circulation) और 'अटलांटिक मेरिडियनल ओवरटर्निंग सर्कुलेशन' (AMOC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. AMOC अटलांटिक महासागर में संचालित होने वाली एक प्रमुख थर्मोहलाइन (Thermomohaline) धारा प्रणाली है, जो भूमध्यरेखीय क्षेत्रों से उष्ण और नम जल को उत्तर की ओर (उत्तरी अटलांटिक) ले जाती है और ठंडे, सघन जल को गहराई में दक्षिण की ओर वापस भेजती है।
2. उत्तरी अटलांटिक महासागर में ग्रीनलैंड के पिघलते हुए हिमनदों और अत्यधिक वर्षा के कारण बड़े पैमाने पर मीठे (अलवण) जल का प्रवेश AMOC की तीव्रता को बढ़ाने का कार्य करता है, जिससे यूरोप में तापमान में भारी वृद्धि होती है।
3. हाल के वैज्ञानिक अध्ययनों से यह संकेत मिला है कि जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापन के कारण AMOC अपनी सुझाई गई गति से कमजोर हो रहा है, जिसके पूरी तरह से ठप होने पर उत्तर-पश्चिमी यूरोप में गंभीर शीतलन (Severe Cooling) और दक्षिण अमेरिकी तथा अफ्रीकी मानसून प्रणालियों में भारी व्यवधान उत्पन्न हो सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 368' के अंतर्गत 'संविधान संशोधन प्रक्रिया' और उसके न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संसद को संविधान के किसी भी उपबंध में संशोधन करने की शक्ति प्राप्त है, बशर्ते संशोधन विधेयक को संसद के प्रत्येक सदन द्वारा अलग-अलग कुल सदस्यों के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत द्वारा पारित किया जाना अनिवार्य हो, और इस प्रक्रिया में राज्यों की विधानसभाओं के संयुक्त अधिवेशन का कोई प्रावधान नहीं है।
2. ऐतिहासिक 'केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय के तेरह-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने यह प्रतिपादित किया था कि संसद की अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन की शक्ति असीमित है, और वह संविधान के किसी भी हिस्से—यहां तक कि 'मूल ढांचा' (Basic Structure) को भी—संशोधित या निरस्त कर सकती है।
3. संविधान (अड़तालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़े गए अनुच्छेद 368 के खंड (4) और खंड (5) को 'मिनवा मिल्स बनाम भारत संघ (1980)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस आधार पर असंवैधानिक घोषित कर दिया गया था कि वे न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति को समाप्त करते हैं, जो कि संविधान के मूल ढांचे का एक अनिवार्य हिस्सा है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV' (राज्य के नीति निर्देशक तत्व - DPSP) तथा इसके न्यायिक प्रवर्तन एवं संवैधानिक विकास के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 37 में यह स्पष्ट रूप से उपबंधित किया गया है कि नीति निर्देशक तत्व देश के शासन में मौलिक हैं, और भले ही इन्हें किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तित नहीं कराया जा सकता, किंतु देश के शासन में इन सिद्धांतों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा।
2. सर्वोच्च न्यायालय ने मिनर्वा मिल्स वाद (1980) में यह स्पष्ट किया था कि संविधान की मूल संरचना (Basic Structure) को बनाए रखने के लिए नीति निर्देशक तत्वों (भाग IV) को मौलिक अधिकारों (भाग III) पर पूर्ण प्राथमिकता दी जा सकती है, और इस उद्देश्य के लिए अनुच्छेद 14 और 19 के अधिकारों को पूरी तरह से निलंबित किया जा सकता है।
3. यद्यपि मूल संविधान में केवल अनुच्छेद 39(b) और 39(c) को ही मौलिक अधिकारों पर प्राथमिकता दी गई थी, किंतु 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा अनुच्छेद 31C का विस्तार करके यह प्रावधान कर दिया गया कि राज्य द्वारा नीति निर्देशक तत्वों को लागू करने के लिए बनाए गए किसी भी कानून को इस आधार पर अमान्य नहीं ठहराया जाएगा कि वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 के अधिकारों का उल्लंघन करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV-क' (मूल कर्तव्य - अनुच्छेद 51-क) तथा इससे संबंधित विधिक और संवैधानिक प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों के आधार पर वर्ष 1976 के 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान में जोड़ा गया था, और ये कर्तव्य केवल भारतीय नागरिकों पर लागू होते हैं, विदेशी नागरिकों पर नहीं।
2. मूल रूप से जब इन्हें संविधान में शामिल किया गया था, तब इनकी कुल संख्या 10 थी, जिन्हें सोवियत संघ (USSR) के संविधान से प्रेरित होकर अपनाया गया था, तथा वर्तमान में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 के पश्चात इनकी कुल संख्या 11 हो गई है।
3. ये सभी मूल कर्तव्य प्रकृति में न्यायोचित (Justiciable) हैं, जिसका अर्थ है कि यदि कोई नागरिक इनका उल्लंघन करता है, तो संसद या राज्य विधानमंडल द्वारा बनाए गए कानूनों के तहत न्यायालय द्वारा उसे सीधे तौर पर दंडित किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 263' के अंतर्गत 'अंतर-राज्य परिषद' (Inter-State Council) के गठन, शक्तियों और उसके कामकाज के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि यदि किसी समय उसे यह प्रतीत होता है कि एक अंतर-राज्य परिषद की स्थापना से लोक हितों की प्राप्ति होगी, तो वह इस परिषद की स्थापना कर सकता है और इसके गठन, कर्तव्यों तथा प्रक्रिया को परिभाषित कर सकता है।
2. सरकारी आयोग (Sarkaria Commission) की संस्तुतियों के आधार पर वर्ष 1990 में पहली बार राष्ट्रपति के आदेश द्वारा अंतर-राज्य परिषद का गठन किया गया था, और प्रधानमंत्री इस परिषद के पदेन अध्यक्ष (Ex-officio Chairman) होते हैं।
3. अंतर-राज्य परिषद एक स्थायी संवैधानिक निकाय (Permanent Constitutional Body) है जिसकी बैठकें संविधान के प्रावधानों के तहत वर्ष में अनिवार्य रूप से तीन बार आयोजित की जानी चाहिए, और इसके द्वारा लिए गए सभी निर्णय राज्यों के लिए बाध्यकारी (Binding) होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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