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भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन' (National Infrastructure Pipeline - NIP) और 'प्रधानमंत्री गति शक्ति' (PM GatiShakti) योजना से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) को वर्ष 2019 में लॉन्च किया गया था, जिसका उद्देश्य भारत में विश्व स्तरीय अवसंरचना प्रदान करना और सभी के लिए जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है, जिसके तहत ऊर्जा, सड़क, शहरी और रेलवे क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक बुनियादी ढांचे की परियोजनाएं शामिल हैं।
- 2. 'प्रधानमंत्री गति शक्ति' (PM GatiShakti) राष्ट्रीय मास्टर प्लान को मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी के लिए लॉन्च किया गया था, जो अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों (जैसे रेलवे, सड़क, विमानन आदि) के बीच समन्वय और त्वरित निष्पादन सुनिश्चित करने के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रदान करता है।
- 3. NIP और PM GatiShakti दोनों का संचालन और पूर्ण प्रशासनिक नियंत्रण सीधे तौर पर 'नीति आयोग' (NITI Aayog) के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन होता है, और इसके लिए राज्यों की किसी भी प्रकार की भागीदारी या राज्य-स्तरीय मास्टर प्लान का होना अनिवार्य नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) को वित्त वर्ष 2019-25 के दौरान देश भर में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को सुगम बनाने के लिए वित्त मंत्रालय द्वारा लॉन्च किया गया था। इसका उद्देश्य ऊर्जा, सड़क, रेलवे, शहरी और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में अवसंरचना विकास को बढ़ावा देना है।
कथन 2 सही है: 'प्रधानमंत्री गति शक्ति' (PM GatiShakti) राष्ट्रीय मास्टर प्लान अक्टूबर 2021 में लॉन्च किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न मंत्रालयों और राज्य सरकारों की बुनियादी ढांचा विकास योजनाओं को एकीकृत करना और मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी प्रदान करना है ताकि लॉजिस्टिक लागत को कम किया जा सके। यह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है।
कथन 3 गलत है: NIP और PM GatiShakti का संचालन और निगरानी 'नीति आयोग' द्वारा अकेले नहीं किया जाता है; बल्कि PM GatiShakti के समन्वय और क्रियान्वयन में वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (특히 DPIIT) की मुख्य भूमिका होती है। इसके अलावा, इस योजना में राज्यों की सक्रिय भागीदारी और राज्य-स्तरीय मास्टर प्लान का होना अनिवार्य है। अतः कथन 3 असत्य है।
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भारतीय संविधान के 'मूल अधिकार' (Fundamental Rights) और 'संविधान की संशोधन शक्ति' के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य (1967)' मामले में उच्चतम न्यायालय की 11-न्यायाधीशों की पीठ ने यह निर्णय दिया था कि संसद को मौलिक अधिकारों में संशोधन करने की कोई शक्ति प्राप्त नहीं है, क्योंकि संविधान का अनुच्छेद 13(2) 'विधि' शब्द के अंतर्गत संविधान संशोधन अधिनियमों को भी शामिल करता है।
2. चौबीसवां संविधान संशोधन अधिनियम, 1971 द्वारा संसद ने अनुच्छेद 13 और अनुच्छेद 368 में संशोधन करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि अनुच्छेद 368 के तहत किया गया संविधान संशोधन अनुच्छेद 13 के अर्थ के अंतर्गत कोई 'विधि' (Law) नहीं है, जिससे संसद को मूल अधिकारों सहित संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन करने की असीमित शक्ति मिल गई।
3. 'केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973)' मामले में उच्चतम न्यायालय ने 24वें संविधान संशोधन की संवैधानिक वैधता को तो बरकरार रखा, किंतु साथ ही 'न्यायिक समीक्षा' और 'संविधान के बुनियादी ढाँचे (Basic Structure)' के सिद्धांत को प्रतिपादित करते हुए यह स्पष्ट किया कि संसद अनुच्छेद 368 के तहत मौलिक अधिकारों में संशोधन तो कर सकती है, किंतु संविधान के मूल स्वरूप को नष्ट नहीं कर सकती।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और भारतीय संविधान के अंतर्गत 'संसदीय विशेषाधिकारों' (Parliamentary Privileges) एवं अनुच्छेद 105 के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 105 के अनुसार, संसद के दोनों सदनों तथा उनके सदस्यों और समितियों को वे सभी विशेषाधिकार प्राप्त हैं जो ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स के पास वर्ष 1950 में संविधान लागू होने के समय थे, क्योंकि भारतीय संविधान निर्माताओं ने ब्रिटिश परंपरा को बिना किसी परिवर्तन के पूर्ण रूप से अंगीकृत कर लिया था।
2. यदि संसद का कोई सदस्य सदन के भीतर अपने भाषण या मतदान के संबंध में न्यायालय में किसी कानूनी कार्रवाई का सामना करता है, तो उसे अनुच्छेद 105 के तहत पूर्ण उन्मुक्ति (Immunity) प्राप्त होती है, और यह संरक्षण संसद के सत्र के बाहर या सदन की बैठकों के अतिरिक्त अन्य गतिविधियों पर भी समान रूप से लागू होता है।
3. जब तक संसद विधि द्वारा अपने विशेषाधिकारों, immunities और शक्तियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं करती, तब तक इसके सदस्यों और समितियों को वे सभी विशेषाधिकार प्राप्त बने रहेंगे जो ब्रिटिश संसद के 'हाउस ऑफ कॉमन्स' के पास संविधान के प्रारंभ के समय थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के प्रारंभिक चरण में सुरेंद्रनाथ बनर्जी को किस उपनाम से जाना जाता था?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV' (राज्य के नीति निर्देशक तत्व - अनुच्छेद 36 से 51) तथा 42वें एवं 44वें संविधान संशोधनों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1976 के 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा नीति निर्देशक तत्वों में कुछ नए सिद्धांत जोड़े गए, जिनमें बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए अवसरों को सुरक्षित करना, समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता, तथा उद्योगों के प्रबंधन में कामगारों की भागीदारी सुनिश्चित करना शामिल था।
2. संविधान के अनुच्छेद 48-क के अंतर्गत पर्यावरण का संरक्षण तथा संवहन और वन तथा वन्यजीवों की रक्षा करने का प्रावधान मूल संविधान में ही वर्ष 1950 से विद्यमान था, जिसे बाद में 42वें संशोधन द्वारा और अधिक कड़ा किया गया।
3. वर्ष 1978 के 44वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा नीति निर्देशक तत्वों में एक नया खंड (अनुच्छेद 38 का खंड 2) जोड़ा गया, जिसके तहत राज्य को विशेष रूप से आय की असमानताओं को कम करने और विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले या विभिन्न पेशों में लगे लोगों के समूहों के बीच प्रतिष्ठा, सुविधाओं और अवसरों की असमानता को समाप्त करने का निर्देश दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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