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भारतीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास के संदर्भ में, 'मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card - SHC) योजना' और कृषि इनपुट प्रबंधन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना केंद्र सरकार द्वारा समर्थित एक योजना है, जिसके तहत देश के सभी किसानों को उनकी कृषि योग्य भूमि की पोषक तत्वों की स्थिति का आकलन करने के लिए हर दो वर्ष में एक बार कार्ड जारी किया जाता है, जिसमें 12 प्रमुख पैरामीटरों के आधार पर मृदा की स्थिति दर्ज होती है।
- 2. इस योजना के अंतर्गत किसानों को उनकी मिट्टी के परीक्षण के आधार पर रासायनिक उर्वरकों के उपयोग के साथ-साथ सूक्ष्म पोषक तत्वों (जैसे बोरॉन, जस्ता, और आयरन) और जैविक खादों के संतुलित उपयोग की सिफारिशें प्रदान की जाती हैं, जिससे उर्वरकों की लागत को कम करने और दीर्घकालिक मृदा स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिलती है।
- 3. मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के सुचारू कार्यान्वयन और प्रयोगशालाओं के आधुनिकीकरण के लिए, सभी परीक्षण परिणाम और डेटा को एक डिजिटल पोर्टल पर अपलोड किया जाता है, तथा इस योजना के तहत राज्य सरकारों को देश भर में मिट्टी के नमूनों के संग्रह और परीक्षण के लिए शत-प्रतिशत वित्तीय सहायता (100% funding) केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: मृदा स्वास्थ्य कार्ड (SHC) योजना भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा शुरू की गई एक योजना है, जिसका उद्देश्य किसानों को उनकी भूमि की पोषक तत्वों की स्थिति की जानकारी देना है। इसके तहत प्रत्येक 2 वर्ष के चक्र में किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किया जाता है, जिसमें 12 पैरामीटरों (जैसे N, P, K, pH, EC, OC और सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे Zn, Fe, Cu, Mn, B) पर आधारित रिपोर्ट होती है।
कथन 2 सही है: इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से बचाना और अनुशंसित मात्रा में पोषक तत्वों तथा सूक्ष्म खनिजों व जैविक खादों के उपयोग को बढ़ावा देना है, जिससे फसल की उत्पादकता बढ़ती है और मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है।
कथन 3 गलत है: मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच वित्तीय सहायता का एक निश्चित साझा पैटर्न (Funding Pattern) होता है (सामान्य राज्यों के लिए आमतौर पर 60:40 या पूर्वोत्तर/पहाड़ी राज्यों के लिए 90:10), न कि केंद्र सरकार द्वारा शत-प्रतिशत (100%) वित्तीय सहायता। अतः कथन 3 असत्य है।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 124' के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति और 'कॉलेजियम प्रणाली' (Collegium System) के विकास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल संविधान में यह प्रावधान किया गया था कि उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा मुख्य न्यायमूर्ति (CJI) और सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों के ऐसे अन्य न्यायाधीशों के परामर्श से की जाएगी जिन्हें राष्ट्रपति इस प्रयोजन के लिए आवश्यक समझे।
2. 'द्वितीय न्यायाधीश मामला' (Second Judges Case, 1993) में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्धारित किया कि 'परामर्श' (Consultation) का अर्थ 'सहमति' (Concurrence) है, और मुख्य न्यायमूर्ति का परामर्श कॉलेजियम की सिफारिशों के अनुरूप होना चाहिए, जिसमें मुख्य न्यायमूर्ति के साथ सर्वोच्च न्यायालय के दो वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होंगे।
3. राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) अधिनियम, 2014 को उच्चतम न्यायालय द्वारा उसके चौथे न्यायाधीश मामले (2015) में इस आधार पर असंवैधानिक घोषित कर दिया गया था कि यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संविधान के 'मूल ढांचा' (Basic Structure) सिद्धांत का उल्लंघन करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 161' के अंतर्गत राज्यपाल की 'क्षमादान की शक्ति' (Pardoning Power) और उसकी तुलना राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति (अनुच्छेद 72) से करने के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति किसी भी ऐसे मामले में जिसमें दंड या दंडादेश ऐसे विषय से संबंधित है जिस पर संघ की कार्यकारी शक्ति का विस्तार होता है, मृत्युदंड सहित सभी मामलों में क्षमादान दे सकता है, जबकि राज्यपाल की क्षमादान शक्ति राज्य की कार्यकारी शक्ति के विस्तार वाले विषयों तक ही सीमित है, और वह किसी भी परिस्थिति में मृत्युदंड (Death Sentence) को पूरी तरह से माफ या क्षमा नहीं कर सकता है।
2. राष्ट्रपति अपनी क्षमादान शक्ति का प्रयोग सेना न्यायालय (Court Martial) द्वारा दिए गए दंड के मामलों में भी कर सकता है, जबकि राज्यपाल को न्यायालय या कोर्ट मार्शल द्वारा दिए गए किसी भी प्रकार के दंड के संबंध में क्षमादान देने का कोई अधिकार नहीं है।
3. राज्यपाल की क्षमादान शक्ति के प्रयोग को राष्ट्रपति की तरह पूरी तरह से न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) से उन्मुक्ति प्राप्त है, क्योंकि राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है और उसके स्वविवेक के निर्णयों को अदालतों में चुनौती नहीं दी जा सकती।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 20' (Article 20) के अंतर्गत प्रदत्त अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संरक्षण से संबंधित प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 20(1) के तहत किसी भी व्यक्ति को ऐसे किसी भी कार्य के लिए आपराधिक रूप से उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता है जो उस कार्य के किए जाने के समय किसी 'प्रवृत्त कानून' (Enacted Law) के अधीन अपराध नहीं था, और न ही किसी व्यक्ति को उस अपराध के लिए किए जाने के समय निर्धारित दंड से अधिक सजा दी जा सकती है (इसे 'भू-लक्षी आपराधिक कानून' या Ex-post facto law का निषेध कहा जाता है)।
2. अनुच्छेद 20(2) के अनुसार किसी भी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए एक से अधिक बार अभियोजित और दंडित नहीं किया जा सकता है, जिसे 'द्वि-क्षति' (Double Jeopardy) का संरक्षण कहा जाता है, और यह संरक्षण केवल न्यायालयों या न्यायिक न्यायाधिकरणों (Judicial Tribunals) के समक्ष ही उपलब्ध है, विभागीय या प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा दी गई कार्रवाइयों पर यह लागू नहीं होता है।
3. अनुच्छेद 20(3) के तहत किसी भी अपराध के आरोपी व्यक्ति को स्वयं अपने विरुद्ध साक्ष्य देने के लिए बाध्य (Self-incrimination) नहीं किया जा सकता है, किंतु इसके अंतर्गत पुलिस हिरासत में दिए गए मौखिक बयानों के साथ-साथ अभियुक्त के शरीर के नमूने (जैसे- अंगूठे के निशान, रक्त, डी.एनए आदि) लेना भी इस अधिकार का उल्लंघन माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986' (Environment (Protection) Act, 1986) और इसके अंतर्गत विहित शक्तियों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 को वर्ष 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के तुरंत बाद और संयुक्त राष्ट्र की स्टॉकहोम मानव पर्यावरण संगोष्ठी (1972) के निर्णयों को कार्यान्वित करने के लिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 253 के तहत संसद द्वारा अधिनियमित किया गया था।
2. इस अधिनियम के तहत केंद्र सरकार को देश में पर्यावरण की गुणवत्ता की रक्षा और सुधार करने तथा प्रदूषण को रोकने, नियंत्रित करने और कम करने के लिए सभी आवश्यक उपाय करने की व्यापक शक्तियाँ प्राप्त हैं, जिसमें किसी भी उद्योग, संचालन या प्रक्रिया को विनियमित या प्रतिबंधित करना भी शामिल है।
3. इस अधिनियम की धारा 3 के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा स्थापित 'राष्ट्रीय तटीय जोन प्रबंधन प्राधिकरण' (NCZMA) और इसके अधीन राज्य प्राधिकरणों को देश के तटीय क्षेत्रों में तटीय विनियमन जोन (CRZ) अधिसूचना के उल्लंघन से संबंधित मामलों में स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेने या आपराधिक अभियोजन शुरू करने की शक्ति प्राप्त है, और इसके आदेशों के विरुद्ध किसी भी सिविल न्यायालय में वाद दायर किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार किसे दिया गया है?
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