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भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम' (NCAP) और उससे संबंधित रणनीतिक पहलों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा वर्ष 2019 में देश भर के सभी शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में वायु प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए एक दीर्घकालिक, समयबद्ध राष्ट्रीय रणनीति के रूप में शुरू किया गया था।
- 2. इस कार्यक्रम का प्रारंभिक लक्ष्य वर्ष 2024 तक देश के चयनित गैर-प्राप्ति शहरों (Non-attainment Cities) में पार्टिकुलेट मैटर (PM10 और PM2.5 दोनों) सांद्रता में वर्ष 2017 के आधार स्तर (Base Year) की तुलना में 20% से 30% तक की कमी लाना था, जिसे बाद में संशोधित करके वर्ष 2026 तक 40% तक की कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
- 3. 'गैर-प्राप्ति शहर' (Non-attainment Cities) वे शहर होते हैं जो पिछले पांच वर्षों के दौरान राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (NAAQS) का लगातार उल्लंघन करते हैं और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा निर्धारित स्वीकार्य सीमा से अधिक वायु प्रदूषण स्तर दर्ज करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा वर्ष 2019 में शुरू किया गया था, किंतु यह कार्यक्रम देश के सभी शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए नहीं, बल्कि विशेष रूप से चिन्हित 'गैर-प्राप्ति शहरों' (Non-attainment Cities) पर केंद्रित है।
कथन 2 सत्य है क्योंकि NCAP का प्रारंभिक लक्ष्य वर्ष 2024 तक आधार वर्ष 2017 के मुकाबले PM10 और PM2.5 सांद्रता में 20 से 30 प्रतिशत की कमी लाना था, जिसे बाद में 'प्राण वायु सर्वेक्षण' और प्रदूषण नियंत्रण लक्ष्यों के तहत अद्यतन करके वर्ष 2026 तक 40 प्रतिशत तक की कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है।
कथन 3 सत्य है क्योंकि 'गैर-प्राप्ति शहर' (Non-attainment Cities) वे शहरी क्षेत्र हैं जो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा निर्धारित राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (NAAQS) को एक निश्चित समयावधि (सामान्यतः पांच वर्षों) के दौरान पूरा करने में असफल रहते हैं।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 124(7)' के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों पर लगने वाले निर्बंधनों (Restrictions) और 'अनुच्छेद 128' के अंतर्गत उनकी पुनर्नियुक्ति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के संविधान का अनुच्छेद 124(7) स्पष्ट रूप से यह उपबंध करता है कि उच्चतम न्यायालय के रूप में पद धारण करने वाला कोई भी व्यक्ति भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर किसी भी न्यायालय या प्राधिकारी के समक्ष pleading या अधिनियमन (act) नहीं करेगा, जिसका अर्थ है कि वे सेवानिवृत्ति के बाद देश के किसी भी उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय में वकालत (Practice) नहीं कर सकते हैं।
2. संविधान का अनुच्छेद 128 भारत के मुख्य न्यायमूर्ति को राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से उच्चतम न्यायालय के किसी भी सेवानिवृत्त न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के ऐसे न्यायाधीश को, जो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने के लिए अर्हित है, उच्चतम न्यायालय की बैठकों में उपस्थित होने और सेवा करने के लिए अनुरोध करने का पूर्ण अधिकार प्रदान करता है।
3. अनुच्छेद 128 के अधीन उच्चतम न्यायालय की बैठकों में उपस्थित होने और सेवा करने के लिए अनुरोध किए गए किसी भी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को न्यायालय के न्यायाधीश की सभी अधिकारिता, शक्तियाँ और विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं, तथा उन्हें राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित वेतन और भत्ते दोनों मिलते हैं, भले ही वे पेंशन भी प्राप्त कर रहे हों।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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