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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV' (राज्य के नीति निर्देशक तत्व - अनुच्छेद 36 से 51) तथा 'समान नागरिक संहिता' (Uniform Civil Code - अनुच्छेद 44) के प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 44 के अंतर्गत यह उपबंध किया गया है कि राज्य, भारत के पूरे राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता (UCC) को सुरक्षित करने का प्रयास करेगा, और यह नीति निर्देशक तत्व प्रकृति में न्यायोचित (Justiciable) होने के कारण किसी भी नागरिक द्वारा इसके उल्लंघन पर सीधे उच्चतम न्यायालय में प्रवर्तित कराया जा सकता है।
  2. 2. गोवा राज्य भारत का एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ पुर्तगाली सिविल कोड, 1867 (Portuguese Civil Code) के रूप में एक समान पारिवारिक कानून वर्तमान में भी लागू है, जो धार्मिक संप्रदायों के आधार पर भिन्न होने के बजाय अधिकांश नागरिकों पर समान रूप से लागू होता है।
  3. 3. सर्वोच्च न्यायालय ने अपने विभिन्न ऐतिहासिक निर्णयों (जैसे शाहबानो मामला, 1985 और सरला मुद्गल मामला, 1995) में समय-समय पर विधायिका और कार्यपालिका को यह निर्देश दिया है कि वे संविधान के अनुच्छेद 44 के उद्देश्यों को साकार करने के लिए देश में एक समान नागरिक संहिता को लागू करने हेतु शीघ्र आवश्यक कदम उठाएं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है: संविधान के भाग IV में शामिल राज्य के नीति निर्देशक तत्व (DPSP) प्रकृति में 'गैर-न्यायोचित' (Non-justiciable) होते हैं, अर्थात इन्हें किसी भी न्यायालय द्वारा बलपूर्वक लागू नहीं कराया जा सकता है। अनुच्छेद 37 के अनुसार इसमें अंतःविष्ट उपबंध किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं, यद्यपि देश के शासन में ये मूलभूत हैं। अतः कथन 1 गलत है। कथन 2 सही है: गोवा भारत का एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ पुर्तगाली सिविल कोड, 1867 लागू है, जो पारिवारिक मामलों (जैसे विवाह, तलाक और उत्तराधिकार) में विभिन्न धर्मों के बीच एकरूपता प्रदान करता है। कथन 3 सही है: सर्वोच्च न्यायालय ने शाहबानो मामला (1985) और सरला मुद्गल मामला (1995) जैसे ऐतिहासिक निर्णयों में बार-बार रेखांकित किया है कि राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए अनुच्छेद 44 के तहत एक समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू किया जाना चाहिए। अतः केवल कथन 2 और 3 सही हैं।
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