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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' के अंतर्गत 'संघ की न्यायपालिका' (The Union Judiciary - अनुच्छेद 124 से 147) तथा उच्चतम न्यायालय की शक्तियों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 137 के अनुसार उच्चतम न्यायालय को संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के अधीन या अनुच्छेद 143 के अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अधीन, अपने द्वारा सुनाई गई किसी भी निर्णय या आदेश का पुनरावलोकन (Review) करने की शक्ति प्राप्त है।
- 2. उच्चतम न्यायालय की 'सलाहकारिता अधिकारक्षेत्र' (Advisory Jurisdiction) के अंतर्गत, यदि राष्ट्रपति किसी सार्वजनिक महत्व के विधि या तथ्य के प्रश्न पर उच्चतम न्यायालय की राय मांगते हैं, तो न्यायालय के लिए राष्ट्रपति को अपनी राय देना अनिवार्य है और न्यायालय द्वारा दी गई वह सलाह राष्ट्रपति पर पूर्णतः बाध्यकारी होती है।
- 3. संविधान के अनुच्छेद 142 के अनुसार उच्चतम न्यायालय अपनी अधिकारिता का प्रयोग करते हुए ऐसा कोई डिक्री या आदेश पारित कर सकता है जो उसके समक्ष लंबित किसी वाद या विषय में 'पूर्ण न्याय' (Complete Justice) करने के लिए आवश्यक हो, और ऐसा प्रत्येक आदेश पूरे भारत में प्रवर्तनीय होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 137 के अनुसार, उच्चतम न्यायालय को संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों या अनुच्छेद 143 के अधीन बनाए गए नियमों के अधीन, अपने द्वारा सुनाए गए निर्णय या आदेश का पुनरावलोकन करने की शक्ति प्राप्त है।
कथन 2 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति को उच्चतम न्यायालय से परामर्श (Advisory Jurisdiction) लेने की शक्ति दी गई है। यदि सार्वजनिक महत्व का कोई विधि या तथ्य का प्रश्न हो, तो उच्चतम न्यायालय अपनी राय देने के लिए 'विवेकशील' है (प्रश्न के प्रथम भाग के अनुसार यदि प्रश्न कानून के किसी पूर्ववर्ती गंभीर मामले से जुड़ा हो तो न्यायालय राय दे सकता है, किंतु यदि मामला संविधान पूर्व संधियों आदि से संबंधित है तो राय देना अनिवार्य होता है)। हालाँकि, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उच्चतम न्यायालय द्वारा दी गई **सलाह राष्ट्रपति पर बाध्यकारी नहीं होती है**, राष्ट्रपति उसे मानने के लिए स्वतंत्र हैं।
कथन 3 सही है: अनुच्छेद 142 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय को 'पूर्ण न्याय' (Complete Justice) करने की असाधारण शक्ति प्राप्त है। इसके तहत न्यायालय अपने समक्ष लंबित किसी भी वाद या मामले में ऐसा डिक्री या आदेश पारित कर सकता है जो न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हो, और संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के अभाव में भी ऐसा आदेश पूरे भारत में प्रवर्तनीय होता है।
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'एल नीनो-दक्षिणी दोलन' (El Niño-Southern Oscillation - ENSO) और 'इंडियन ओशन डिपोल' (Indian Ocean Dipole - IOD) के बीच की अंतःक्रिया (Interaction) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सकारात्मक IOD (Positive IOD) की स्थिति के दौरान पश्चिमी हिंद महासागर (أفريقي तट के पास) में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है, जबकि पूर्वी हिंद महासागर (इंडोनेशिया के पास) में तापमान सामान्य से कम रहता है, जो सामान्यतः भारत में मानसूनी वर्षा को अनुकूल रूप से प्रभावित करता है।
2. जब प्रशांत महासागर में 'अल नीनो' (El Niño) सक्रिय होता है, तो यह आमतौर पर भारत में मानसूनी वर्षा को कमजोर करता है, किंतु यदि उसी वर्ष हिंद महासागर में 'सकारात्मक IOD' भी सक्रिय हो जाए, तो वह अल नीनो के प्रतिकूल प्रभावों को आंशिक रूप से संतुलित या कम कर सकता है।
3. 'ला नीना' (La Niña) की घटना केवल प्रशांत महासागर तक ही सीमित है और इसका हिंद महासागर के द्विध्रुव (IOD) के निर्माण या उसकी अवस्था (चरण) पर प्रत्यक्ष रूप से कोई भी सांख्यिकीय या भौतिक प्रभाव नहीं पड़ता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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सामान्य विज्ञान और पर्यावरण के संदर्भ में, हाल के वर्षों में चर्चा में रहे 'हॉर्मोनल सिंक्रनाइज़ेशन' (Hormonal Synchronization या Oestrus Synchronization) और इसके अनुप्रयोगों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हॉर्मोनल सिंक्रनाइज़ेशन एक ऐसी पशुचिकित्सा और प्रजनन तकनीक है जिसमें झुंड (herd) की कई मादा पशुओं के एस्ट्रस चक्र (estrus cycle) को कृत्रिम रूप से इस प्रकार प्रबंधित किया जाता है कि वे लगभग एक ही समय में मद (heat) की स्थिति में आ जाएं।
2. इस तकनीक में मुख्य रूप से गोनैडोट्रॉपिन-रिलीजिंग हॉर्मोन (GnRH), प्रोजेस्टेरोन और प्रोलैस्टिन जैसे सिंथेटिक हॉर्मोन्स का उपयोग किया जाता है, जो डिंबक्षोटन (ovulation) के समय को सटीक रूप से नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
3. इस तकनीक का एक प्रमुख लाभ यह है कि इसके माध्यम से 'नियत समय पर कृत्रिम गर्भाधान' (Timed Artificial Insemination - TAI) को सफलतापूर्वक क्रियान्वित किया जा सकता है, जिससे पशुओं में गर्भधारण दर में सुधार होता है और झुंड में बछड़े पैदा होने के मौसम को प्रबंधित करना आसान हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 352' के अंतर्गत 'राष्ट्रीय आपातकाल' (National Emergency) की उद्घोषणा, इसके संवैधानिक संशोधनों और न्यायिक समीक्षा के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के मूल पाठ में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा के लिए 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) आधार शामिल था, किंतु 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 के माध्यम से इस शब्द को हटाकर इसके स्थान पर 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) शब्द को अंतःस्थापित किया गया, और यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रपति ऐसी उद्घोषणा केवल तभी कर सकते हैं जब मंत्रिमंडल (Cabinet) द्वारा इसका लिखित निर्णय प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रपति को संसूचित किया जाए।
2. 'मिनवा मिल्स बनाम भारत संघ (1980)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने यह स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा की न्यायिक समीक्षा पूरी तरह से वर्जित है, और यदि राष्ट्रपति ने युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के आधार पर आपातकाल घोषित कर दिया है, तो न्यायालय यह जाँच नहीं कर सकता कि इस निर्णय के पीछे कोई दुर्भावना (Malafide) थी या नहीं।
3. 'ए.डी.एम. जबलपुर बनाम शिवकांत शुक्ल (1976)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को प्रभावी रूप से निष्प्रभावी करते हुए, 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा यह वैधानिक सुरक्षा प्रदान की गई कि राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान भी संविधान के 'अनुच्छेद 20' (अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण) और 'अनुच्छेद 21' (प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण) द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को निलंबित नहीं किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, 'संसद के विशेषाधिकार' (Parliamentary Privileges - अनुच्छेद 105 और 194) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 105 के तहत संसद के दोनों सदनों, उसके सदस्यों और समितियों को कुछ विशेष अधिकार और उन्मुक्तियाँ प्रदान की गई हैं, और ये विशेषाधिकार केवल तभी उपलब्ध होते हैं जब संसद सत्र में हो या विधाई कार्य चल रहा हो; सत्र के सत्रावसान या विघटन के दौरान ये स्वतः समाप्त हो जाते हैं।
2. 'संसदीय विशेषाधिकारों' के अंतर्गत प्रत्येक सदन को यह अनन्य अधिकार प्राप्त है कि वह अपनी कार्यवाही के प्रकाशन को रोक सकता है और सदन के सदस्यों या बाहरी व्यक्तियों द्वारा विशेषाधिकार हनन (Breach of Privilege) या सदन की अवमानना (Contempt of the House) के लिए उन्हें दंडित या भर्त्सना कर सकता है।
3. यद्यपि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 105(3) में यह प्रावधान किया गया है कि जब तक संसद विशेषाधिकारों को संहिताबद्ध (Codify) नहीं करती है, तब तक इसके विशेषाधिकार वही माने जाएंगे जो ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स के पास संविधान लागू होने के समय (26 जनवरी 1950 को) थे, तथापि आज तक भारतीय संसद द्वारा इन विशेषाधिकारों को पूरी तरह से संहिताबद्ध करने के लिए कोई व्यापक कानून नहीं बनाया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' (संघ - अनुच्छेद 52 से 151) के अंतर्गत भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 148 के अनुसार भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा की जाती है, और उसे उसके पद से केवल उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति से और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है।
2. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक अपने पद पर छह वर्ष की अवधि के लिए या 65 वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक (इनमें से जो भी पहले हो) बने रहने का अधिकार रखता है, और पद पर न रह जाने के बाद वह भारत सरकार या किसी राज्य की सरकार के अधीन किसी अन्य कार्यालय का पात्र होता है।
3. अनुच्छेद 149 के तहत सीएजी संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए संघ और राज्यों के खातों के संबंध में अपने कर्तव्यों का पालन करता है और अपनी रिपोर्टें राष्ट्रपति को (जो उन्हें संसद के प्रत्येक सदन के पटल पर रखवाते हैं) तथा राज्यपाल को (जो उन्हें राज्य के विधानमंडल के पटल पर रखवाते हैं) प्रस्तुत करता है।
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