BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Civil services
20 views

भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' के अंतर्गत 'संघ की न्यायपालिका' (The Union Judiciary - सर्वोच्च न्यायालय, अनुच्छेद 124 से 147) तथा 'न्यायिक पुनरावलोकन' (Judicial Review) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 137 के अनुसार उच्चतम न्यायालय को संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि या उसके द्वारा दिए गए किसी आदेश या निर्णय का पुनरावलोकन करने की शक्ति प्राप्त है, बशर्ते इस शक्ति का प्रयोग केवल तभी किया जा सकता है जब संसद इस आशय का कोई विशेष अधिनियम पारित करे।
  2. 2. 'न्यायिक पुनरावलोकन' की संकल्पना का प्रत्यक्ष उल्लेख मूल संविधान के अनुच्छेद 13 और अनुच्छेद 32 में स्पष्ट रूप से किया गया है, जिसके तहत उच्चतम न्यायालय को संघ या राज्यों के ऐसे किसी भी कानून को शून्य घोषित करने की शक्ति प्राप्त है जो संविधान के भाग III (मौलिक अधिकारों) का उल्लंघन करते हैं।
  3. 3. केशवानंद भारती वाद (1973) में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि 'संविधान की सर्वोच्चता' और 'न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति' दोनों ही भारतीय संविधान की 'मूल संरचना' (Basic Structure) का अभिन्न अंग हैं, जिन्हें संसद द्वारा अनुच्छेद 368 के तहत किए जाने वाले संवैधानिक संशोधनों के माध्यम से भी समाप्त या छीना नहीं जा सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 137 के अनुसार उच्चतम न्यायालय को संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि या उसके द्वारा दिए गए निर्णयों का पुनरावलोकन करने की शक्ति स्वतः (Suo motu या नियमों के अधीन) प्राप्त है। इसके लिए संसद द्वारा किसी विशेष अधिनियम को पारित करने की कोई आवश्यकता नहीं होती है। यह न्यायालय की अपनी अंतर्निहित संवैधानिक शक्ति है। कथन 2 सही है: भारतीय संविधान में 'न्यायिक पुनरावलोकन' (Judicial Review) शब्द का प्रत्यक्ष उपयोग भले ही सीधे तौर पर एक स्वतंत्र अनुच्छेद में न किया गया हो, किंतु अनुच्छेद 13 (मौलिक अधिकारों से असंगत या उनका अल्पीकरण करने वाली विधियाँ) और अनुच्छेद 32 (संवैधानिक उपचारों का अधिकार) प्रत्यक्ष रूप से न्यायालय को यह शक्ति प्रदान करते हैं कि वह असंवैधानिक कानूनों को रद्द कर सके। कथन 3 सही है: ऐतिहासिक 'केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973)' वाद में उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट रूप से यह प्रतिपादित किया था कि 'न्यायिक पुनरावलोकन' (Judicial Review), संविधान की सर्वोच्चता, विधि का शासन और शक्ति का पृथक्करण आदि सिद्धांत संविधान की 'मूल संरचना' (Basic Structure) का हिस्सा हैं, और संसद अपनी संविधान संशोधन की शक्ति (अनुच्छेद 368) का प्रयोग करके भी इन्हें नष्ट नहीं कर सकती।
Share:

Related Questions

→ भारत की पहली खुले तौर पर समलैंगिक संसद सदस्य (MP) कौन बनी हैं, जिन्होंने राज्य सभा में शपथ ली? → भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित सांविधिक प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के अंतर्गत की गई थी, और यह देश का ऐसा पहला न्यायिक निकाय है जिसने अपने कामकाज के लिए भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की समवर्ती सूची के अंतर्गत पर्यावरण से जुड़े मामलों को हल करने के लिए अनिवार्य रूप से 'सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908' के कड़े प्रावधानों और सिद्धांतों का पालन करना वैधानिक रूप से अनिवार्य बनाया है। 2. NGT पर्यावरण से जुड़े किसी भी मामले में सिविल न्यायालयों की अधिकारिता को पूर्णतः बहिष्कृत करता है, तथा इस अधिकरण द्वारा दिए गए आदेश या निर्णय के विरुद्ध सीधे सर्वोच्च न्यायालय में न जाकर केवल संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय में अपील दायर की जा सकती है, जिसके लिए अधिनियम के तहत 90 दिनों की समयावधि निर्धारित की गई है। 3. NGT को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 5 के तहत पर्यावरण प्रदूषण के निवारण और नियंत्रण से जुड़े आदेश पारित करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु यह अधिकरण किसी भी उद्योग या इकाई के विरुद्ध स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए पर्यावरण क्षतिपूर्ति (Environmental Compensation) या हर्जाने का आदेश जारी करने की शक्ति नहीं रखता है, जब तक कि कोई औपचारिक याचिका दायर न की जाए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IX' (पंचायती राज - अनुच्छेद 243 से 243-O) तथा 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 73वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 देश में त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था (ग्राम स्तर, मध्यवर्ती स्तर और जिला स्तर) की स्थापना करता है, किंतु जिन राज्यों की जनसंख्या 20 लाख से कम है, उन्हें मध्यवर्ती स्तर पर पंचायत का गठन न करने की छूट प्रदान की गई है। 2. पंचायतों के सभी स्तरों पर सीटों के आरक्षण के संदर्भ में, अधिनियम के तहत प्रत्येक पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले कुल स्थानों का कम-से-कम एक-तिहाई भाग महिलाओं के लिए आरक्षित होना अनिवार्य किया गया है, जिसमें अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें भी शामिल हैं। 3. प्रत्येक पंचायत का कार्यकाल उसकी पहली बैठक के लिए नियत तारीख से पांच वर्ष का होता है, और यदि किसी राज्य में पंचायत को समय से पूर्व विघटित (Dissolve) कर दिया जाता है, तो विघटन की तिथि से छह महीने की अवधि समाप्त होने से पहले नए चुनाव कराना अनिवार्य है, तथा शेष बची हुई अवधि के लिए गठित नई पंचायत केवल उसी शेष अवधि तक ही कार्य करेगी न कि पूरे पांच साल के लिए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'जैविक ऑक्सीजन मांग' (Biological Oxygen Demand - BOD) और जल निकायों पर इसके प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जैविक ऑक्सीजन मांग (BOD) किसी जल निकाय में मौजूद सूक्ष्मजीवों (जैसे बैक्टीरिया) द्वारा कार्बनिक पदार्थों के अपघटन के लिए उपभोग की जाने वाली घुली हुई ऑक्सीजन (Dissolved Oxygen) की मात्रा का एक माप है, और BOD का उच्च स्तर जल प्रदूषण के निम्न स्तर को दर्शाता है। 2. जब किसी जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में अत्यधिक मात्रा में सीवेज या घरेलू अपशिष्ट छोड़ा जाता है, तो BOD का स्तर तेजी से बढ़ जाता है, जिससे जल में घुली हुई ऑक्सीजन (DO) की सांद्रता में भारी गिरावट आती है, जिसके परिणामस्वरूप जलीय जीवों (जैसे मछलियों) की मृत्यु होने लगती है। 3. 'ऑक्सीजन साग्गु गुणांक' (Oxygen Sag Curve) किसी प्रदूषित जल निकाय में कार्बनिक प्रदूषण के प्रवेश के बाद घुली हुई ऑक्सीजन की कमी और उसके पुनः प्राप्ति (Recovery) के स्थानिक या कालिक प्रतिमान को दर्शाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XII' के अंतर्गत 'वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद' (Finance, Property, Contracts and Suits) के प्रावधानों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 266 के अनुसार भारत और प्रत्येक राज्य की 'संचित निधि' (Consolidated Fund) से कोई भी धन विधि की प्राधिकृत प्रक्रिया के बिना नहीं निकाला जा सकता है, और इस निधि में केंद्र या राज्य द्वारा प्राप्त सभी राजस्व, जुटाए गए सभी ऋण और ऋणों की अदायगी में प्राप्त धन जमा किया जाता है। 2. संविधान के अनुच्छेद 267 के तहत संसद और राज्य विधानमंडल को कानून द्वारा क्रमशः 'भारत की आकस्मिकता निधि' (Contingency Fund of India) और 'राज्य की आकस्मिकता निधि' (Contingency Fund of State) की स्थापना करने की शक्ति दी गई है, जिन्हें राष्ट्रपति या राज्यपाल के व्यय आधिपत्य में रखा जाता है और इनसे संसद या राज्य विधानमंडल की पूर्व स्वीकृति के बिना भी अप्रत्याशित खर्चों के लिए अग्रिम धन दिया जा सकता है। 3. संघ और राज्यों के बीच करों के शुद्ध आगमों (Net Proceeds) के वितरण के संबंध में संविधान के अनुच्छेद 275 के अंतर्गत 'वित्त आयोग' (Finance Commission) का प्रावधान किया गया है, जो एक स्थायी संवैधानिक निकाय है और प्रत्येक चार वर्ष की समाप्ति पर या उससे पहले राष्ट्रपति द्वारा गठित किया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.