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वैयक्तिक भिन्नता एवं समावेशी शिक्षा सभी देखें (712) वैयक्तिक भिन्नताएँ30 समावेशी शिक्षा250 विशेष आवश्यकता वाले बालक (CWSN)63 अधिगम अक्षमता (डिस्लेक्सिया आदि)315 ADHD, ऑटिज़्म एवं न्यूरो-विकासात्मक स्थितियाँ22 प्रतिभाशाली एवं सृजनशील बालक9 वंचित, पिछड़े एवं लैंगिक समानता23
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प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा सभी देखें (48) ECCE: अवधारणा एवं महत्व1 खेल आधारित एवं गतिविधि आधारित शिक्षा1 मॉन्टेसरी, फ्रोबेल एवं बाल-शिक्षा के प्रणेता10 आधारभूत साक्षरता एवं संख्या ज्ञान (FLN)3 बच्चों का पोषण एवं स्वास्थ्य33
शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया सभी देखें (546) शिक्षण: अर्थ, प्रकृति एवं सिद्धांत3 शिक्षण विधियाँ153 शिक्षण युक्तियाँ, सूत्र एवं तकनीकें5 पाठ योजना एवं इकाई योजना13 शिक्षण अधिगम सामग्री एवं ICT34 कक्षा प्रबंधन एवं अनुशासन5 शिक्षक की भूमिका एवं व्यावसायिक दक्षता92 बाल-केंद्रित एवं सक्रिय शिक्षण231 शैक्षिक मनोविज्ञान: अर्थ एवं विधियाँ10
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भाषा शिक्षण शास्त्र सभी देखें (45) भाषा अर्जन एवं भाषा अधिगम21 भाषा कौशल (LSRW)13 बहुभाषिकता एवं मातृभाषा3 हिंदी शिक्षण5 अंग्रेजी शिक्षण (English Pedagogy)3
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ब्रिटिश भारत में आधुनिक शिक्षा प्रणाली के विकास के क्रम में, वर्ष 1917 में गठित 'सैडलर विश्वविद्यालय आयोग' (Sadler University Commission) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. इस आयोग का मुख्य उद्देश्य कलकत्ता विश्वविद्यालय की समस्याओं की जाँच करना था, लेकिन इसकी संस्तुतियाँ देश के अन्य विश्वविद्यालयों पर भी लागू की गईं।
  2. 2. आयोग ने यह सिफारिश की थी कि विश्वविद्यालय के स्तर को सुधारने के लिए माध्यमिक शिक्षा (Secondary Education) और स्कूली शिक्षा में सुधार करना आवश्यक है, जिसके परिणामस्वरूप अंततः प्रांतीय सरकारों को शिक्षा का नियंत्रण हस्तांतरित कर दिया गया।
  3. 3. इसी आयोग की अनुशंसा के आधार पर देश में पहली बार 'अंतर्विश्वविद्यालय बोर्ड' (Inter-University Board) की स्थापना की गई थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

वर्ष 1917 में कलकत्ता विश्वविद्यालय की समस्याओं की जाँच और रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 'सैडलर विश्वविद्यालय आयोग' (जिसे कलकत्ता विश्वविद्यालय आयोग भी कहा जाता है) का गठन किया गया था। इसके सदस्यों में आशुतोष मुखर्जी और जियाउद्दीन अहमद जैसे भारतीय भी शामिल थे। इस आयोग ने पहली बार यह स्पष्ट रूप से रेखांकित किया कि विश्वविद्यालय शिक्षा के सुधार के लिए माध्यमिक शिक्षा (इंटरमीडिएट स्तर) का सुधार अनिवार्य है। इसके सुझावों के आधार पर ही 1919 के मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों के तहत शिक्षा को 'हस्तांतरित विषय' (Transferred Subject) बनाकर प्रांतीय सरकारों को सौंप दिया गया था। साथ ही, इसने विश्वविद्यालयों के बीच आपसी सहयोग और समन्वय के लिए एक 'अंतर्विश्वविद्यालय बोर्ड' के गठन की भी सिफारिश की थी, जिसे बाद में स्थापित किया गया। इस प्रकार तीनों कथन सत्य हैं। बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा की संपूर्ण तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पर विजिट करें।

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→ भारत में आधुनिक शिक्षा के विकास और औपनिवेशिक शिक्षा नीतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1813 के चार्टर अधिनियम (Charter Act of 1813) के तहत ब्रिटिश संसद ने पहली बार भारत में शिक्षा के प्रसार और विज्ञान के पुनरुत्थान के लिए प्रतिवर्ष 1 लाख रुपये की राशि खर्च करने का वैधानिक प्रावधान किया था। 2. लॉर्ड मैकॉले का 'मिनट ऑन एजुकेशन' (1835) अंग्रेजी शिक्षा का प्रबल समर्थक था, जिसका मुख्य उद्देश्य एक ऐसा 'वर्ग' तैयार करना था जो 'रंग और नस्ल में भारतीय हो, किंतु रुचियों, विचारों, नैतिकता और बुद्धि में अंग्रेज हो'। 3. वुड का डिस्पेच (Wood's Despatch, 1854), जिसे 'भारतीय शिक्षा का मैग्नाकार्टा' कहा जाता है, ने लंदन विश्वविद्यालय की तर्ज पर कलकत्ता, बॉम्बे और मद्रास में विश्वविद्यालयों की स्थापना की संस्तुति की थी तथा महिला शिक्षा और व्यवसायिक शिक्षा पर भी बल दिया था। 4. हंटर शिक्षा आयोग (1882) की नियुक्ति प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा की प्रगति की समीक्षा के लिए की गई थी, जिसमें उच्च शिक्षा के वित्तपोषण को प्राथमिकता देने और प्राथमिक शिक्षा से सरकारी नियंत्रण पूरी तरह हटाने की सिफारिश की गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? 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