19वीं शताब्दी के दौरान भारत में हुए सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलनों और उनके संस्थापकों/नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राजा राममोहन राय द्वारा वर्ष 1815 में 'आत्मीय सभा' की स्थापना की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य एकेश्वरवाद के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ हिंदू समाज में व्याप्त कुप्रथाओं, जैसे सती प्रथा और बहुविवाह, का विरोध करना था।
- 2. स्वामी दयानंद सरस्वती ने वर्ष 1875 में बॉम्बे में 'आर्य समाज' की स्थापना की थी, तथा उनके प्रसिद्ध ग्रंथ 'सत्यार्थ प्रकाश' में उन्होंने वेदों की अचूकता और श्रेष्ठता का प्रतिपादन करते हुए 'भारत भारतीयों के लिए है' का राजनीतिक नारा दिया था।
- 3. ज्योतिराव फुले ने वर्ष 1873 में महाराष्ट्र में 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना की, जिसका मुख्य उद्देश्य शूद्रों और अति-शूद्रों को ब्राह्मणवादी वर्चस्व और धार्मिक पाखंडों से मुक्त कराना तथा उनके सामाजिक अधिकारों की रक्षा करना था।
- 4. एनी विसंेट ने वर्ष 1898 में बनारस में 'सेंट्रल हिंदू स्कूल' की स्थापना की थी, जो आगे चलकर वर्ष 1915 में पंडित मदन मोहन मालवीय के प्रयासों से 'बनारस हिंदू विश्वविद्यालय' (BHU) का केंद्र बना।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
Detailed Explanation
दिए गए कथनों में से कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। राजा राममोहन राय ने 1815 में आत्मीय सभा की स्थापना की थी। स्वामी दयानंद सरस्वती ने 1875 में आर्य समाज की स्थापना की और 'सत्यार्थ प्रकाश' की रचना की। ज्योतिराव फुले ने 1873 में सत्यशोधक समाज की स्थापना की। वहीं कथन 4 में सेंट्रल हिंदू स्कूल की स्थापना एनी बेसेंट द्वारा 1898 में की गई थी, लेकिन यह कथन आंशिक रूप से भ्रमित कर सकता है क्योंकि इसे आगे बढ़ाने में मदन मोहन मालवीय की भूमिका प्रमुख थी, तथापि BPSC के मानक पैटर्न के अनुसार शुरुआती तीन कथन अकादमिक रूप से अधिक सटीक और सीधे तौर पर प्रामाणिक हैं, जिसके तहत विकल्प (a) सही उत्तर है। बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा की तैयारी के लिए ऐसे विश्लेषणात्मक प्रश्न अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।