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BPSC TRE 4.0
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प्राचीन भारतीय इतिहास के विभिन्न स्रोतों, महाजनपद काल और मौर्य साम्राज्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. अंगनार (अंगुत्तर निकाय) और जैन ग्रंथ 'भगवती सूत्र' में षोडश महाजनपदों की सूची मिलती है, जिनमें 'अंग' महाजनपद की राजधानी चंपा थी, जो आधुनिक भागलपुर और मुंगेर के क्षेत्र में विस्तृत थी।
- 2. मौर्य सम्राट अशोक के अभिलेखों को सर्वप्रथम पढ़ने में सफलता वर्ष 1837 में जेम्स प्रिंसेप को मिली थी, और इन अभिलेखों में ब्राह्मी, खरोष्ठी, ग्रीक तथा अरमाइक लिपियों का प्रयोग किया गया है, जिसमें अधिकांशतः प्राकृत भाषा का उपयोग हुआ है।
- 3. मेगास्थनीज द्वारा रचित 'इंडिका' ग्रंथ अपनी मूल रूप में आज भी पूर्ण सुरक्षित उपलब्ध है, और इसमें पाटलिपुत्र नगर प्रशासन का वर्णन करते हुए यह उल्लेख किया गया है कि नगर का प्रशासन छह समितियों द्वारा चलाया जाता था जिसमें प्रत्येक समिति में पाँच सदस्य होते थे।
- 4. संगम काल के दौरान दक्षिण भारत में चेर, चोल और पाण्ड्य राजवंशों का शासन था, तथा इस काल के साहित्य (संगम साहित्य) से तत्कालीन सामाजिक, आर्थिक और व्यापारिक स्थितियों की विस्तृत जानकारी मिलती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। अंगुत्तर निकाय और भगवती सूत्र दोनों में षोडश महाजनपदों का उल्लेख है, जिसमें अंग की राजधानी चंपा थी जो वर्तमान बिहार के भागलपुर-मुंगेर क्षेत्र में थी। जेम्स प्रिंसेप ने 1837 में अशोक के अभिलेखों को सबसे पहले पढ़ा था, जिसमें ब्राह्मी, खरोष्ठी, ग्रीक और अरमाइक लिपियों का प्रयोग मिलता है। संगम काल का साहित्य दक्षिण भारत के इतिहास का प्रमुख स्रोत है। किंतु कथन 3 असत्य है क्योंकि मेगास्थनीज की 'इंडिका' अपने मूल रूप में आज उपलब्ध नहीं है, यह बाद के लेखकों के उद्धरणों (Fragments) के रूप में ही मिलती है, यद्यपि इसमें छह समितियों और तीस सदस्यों (प्रत्येक में 5) द्वारा पाटलिपुत्र प्रशासन का उल्लेख अन्य स्रोतों के माध्यम से प्रमाणित होता है। अधिक अध्ययन सामग्री के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर जाएँ।
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यह कथन किसने कहा था कि "रॉलेट एक्ट निवारक हत्या है"?
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पृथ्वी की पर्पटी (Crust) में पाए जाने वाले विभिन्न खनिज पदार्थों, चट्टानों के चक्र (Rock Cycle) और बिहार के भूवैज्ञानिक संदर्भ में मृदा तंत्र के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आग्नेय चट्टानें (Igneous Rocks) पिघले हुए मैग्मा या लावा के ठंडे होने और जमने से बनती हैं, और इनमें जीवाश्म (Fossils) का पूर्ण अभाव होता है क्योंकि अत्यधिक तापमान के कारण जीव-अवशेष नष्ट हो जाते हैं।
2. रूपांतरित चट्टानें (Metamorphic Rocks) अत्यधिक ताप (Heat) और दाब (Pressure) के प्रभाव से अपने मूल रूप में परिवर्तन के पश्चात बनती हैं, उदाहरण के लिए चूना पत्थर का संगमरमर (Marble) में और बलुआ पत्थर का क्वार्ट्जाइट में बदलना।
3. बिहार के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र (विशेषकर सोमेश्वर और दून घाटी की पहाड़ियों) में टर्पियरी युग की अवसादी (Sedimentary) चट्टानें पाई जाती हैं, जिनमें बलुआ पत्थर, चूना पत्थर और चिक्का मिट्टी की परतें प्रमुख हैं।
4. बिहार के दक्षिण-पूर्वी सीमावर्ती जिलों (जैसे बांका, जमुई और नवादा) में पाई जाने वाली 'लाल-पीली मृदा' मुख्य रूप से प्राचीन आर्कियन युगीन ग्रेनाइट और नीस चट्टानों के अपक्षय (Weathering) और वियोजन से विकसित हुई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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अर्धचालक (Semiconductors) और डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शुद्ध अर्धचालक (Intrinsic Semiconductor) जैसे कि सिलिकॉन या जर्मेनियम में कमरे के ताप पर विद्युत चालकता बहुत कम होती है, किंतु इसमें उचित अशुद्धि (Doping) मिलाने पर इसकी चालकता बढ़ जाती है, जिससे n-प्रकार के अर्धचालक में बहुसंख्यक आवेश वाहक (Majority Charge Carriers) इलेक्ट्रॉन होते हैं जबकि p-प्रकार में होल (Holes) होते हैं।
2. 'जेनर डायोड' (Zener Diode) का उपयोग मुख्य रूप से दिष्टकरण (Rectification) के लिए किया जाता है, और यह हमेशा अग्र अभिनति (Forward Bias) की स्थिति में कार्य करता है ताकि वोल्टेज को स्थिर रखा जा सके।
3. लॉजिक गेट्स (Logic Gates) में 'नैंड गेट' (NAND Gate) और 'नॉर गेट' (NOR Gate) को 'सार्वभौमिक गेट' (Universal Gates) कहा जाता है क्योंकि इनका उपयोग करके किसी भी अन्य मूल लॉजिक गेट जैसे AND, OR और NOT का निर्माण किया जा सकता है।
4. ट्रांजिस्टर (Transistor) एक अर्धचालक युक्ति है जिसमें तीन क्षेत्र होते हैं—उत्सर्जक (Emitter), आधार (Base) और संग्राहक (Collector), और सामान्यतः उभयनिष्ठ उत्सर्जक (Common Emitter) विन्यास का उपयोग वोल्टेज और पावर प्रवर्धन (Amplification) के लिए सबसे अधिक किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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कोशिका जीव विज्ञान (Cell Biology) के अंतर्गत कोशिका की संरचना, कोशिकांगों तथा कोशिका विभाजन की प्रक्रियाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सूत्रकणिका (Mitochondria) और हरित लवक (Chloroplast) दोनों ही अर्ध-स्वायत्त (Semi-autonomous) कोशिकांग हैं क्योंकि इनमें अपना स्वयं का वृत्ताकार डीएनए, राइबोसोम (70S प्रकार के) तथा प्रोटीन संश्लेषण करने की क्षमता पाई जाती है।
2. यूकैरियोटिक कोशिकाओं में पाए जाने वाले अंतःप्रद्रव्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum - ER) का खुरदरा भाग (RER) राइबोसोम की उपस्थिति के कारण प्रोटीन संश्लेषण में सक्रिय भूमिका निभाता है, जबकि चिकना भाग (SER) मुख्य रूप से लिपिड और स्टीरॉयड हार्मोन के संश्लेषण के लिए उत्तरदायी होता है।
3. समसूत्री विभाजन (Mitosis) की 'मेटाफेज' (Metaphase) अवस्था में गुणसूत्र (Chromosomes) अत्यधिक संघनित हो जाते हैं और कोशिका के मध्य भाग (Equatorial plate) पर व्यवस्थित हो जाते हैं, जो गुणसूत्रों की आकृति और आकार का अध्ययन करने के लिए सर्वोत्तम अवस्था मानी जाती है।
4. अर्धसूत्री विभाजन-I (Meiosis-I) के दौरान 'पैक्टिनटीन' (Pachytene) उप-अवस्था में सजातीय गुणसूत्रों (Homologous chromosomes) के बीच आनुवंशिक सामग्री का विनिमय होता है जिसे 'क्रॉसिंग ओवर' (Crossing Over) कहा जाता है, और यह एंजाइम 'रिकॉम्बीनेस' (Recombinase) द्वारा उत्प्रेरित होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भारतीय अर्थव्यवस्था में आर्थिक नियोजन (Economic Planning) के विकास, पंचवर्षीय योजनाओं के प्रतिमानों और राष्ट्रीय आय के आकलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में नियोजित विकास की अवधारणा को औपचारिक रूप से वर्ष 1938 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में गठित 'राष्ट्रीय योजना समिति' (National Planning Committee) से बल मिला था, तथा वर्ष 1944 में उद्योगपतियों द्वारा प्रस्तुत 'बॉम्बे प्लान' में राज्य के न्यूनतम हस्तक्षेप के साथ पूर्णतः मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था की वकालत की गई थी।
2. महालनोबिस मॉडल (दूसरी पंचवर्षीय योजना का आधार) भारी उद्योगों के तीव्र विकास और पूंजीगत वस्तुओं के उत्पादन पर केंद्रित था, जबकि पहली पंचवर्षीय योजना 'हेरोड-डोमर मॉडल' पर आधारित थी जिसका मुख्य जोर कृषि, सिंचाई और बिजली क्षेत्र के त्वरित विकास पर था।
3. भारत में सबसे पहले राष्ट्रीय आय का वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित अनुमान वर्ष 1931-32 में प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ. वी.के.आर.वी. राव (V.K.R.V. Rao) द्वारा लगाया गया था, जबकि स्वतंत्रता के पश्चात भारत सरकार ने वर्ष 1949 में पी.सी. महालनोबिस की अध्यक्षता में 'राष्ट्रीय आय समिति' का गठन किया था।
4. नीति आयोग (NITI Aayog), जो योजना आयोग के स्थान पर 1 जनवरी 2015 से अस्तित्व में आया, एक संवैधानिक निकाय (Constitutional Body) है जिसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं और यह 'सहकारी संघवाद' (Cooperative Federalism) के सिद्धांत पर कार्य करता है।
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