बच्चों का पोषण एवं स्वास्थ्य
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मानव शरीर में विटामिन और उनके रासायनिक नामों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. विटामिन B1 का रासायनिक नाम थायमिन (Thiamine) है, जिसकी कमी से 'बेरी-बेरी' नामक रोग होता है, जो मुख्य रूप से तंत्रिका तंत्र और हृदय को प्रभावित करता है।
- 2. विटामिन C, जिसका रासायनिक नाम एस्कॉर्बिक अम्ल (Ascorbic acid) है, एक जल-विलेय विटामिन है जो शरीर में कोलेजन के संश्लेषण के लिए आवश्यक होता है और इसकी कमी से 'स्कर्वी' रोग होता है।
- 3. विटामिन D का रासायनिक नाम कैल्सीफेरोल (Cholecalciferol) है, जो वसा में घुलनशील है और इसकी कमी से बच्चों में 'रिकेट्स' (Rickets) तथा वयस्कों में 'ऑस्टियोमलेशिया' नामक हड्डी का रोग हो जाता है।
- 4. विटामिन B12 का रासायनिक नाम सायनोकोबलामिन (Cyanocobalamin) है, जिसमें कोबाल्ट धातु पाई जाती है, और इसकी कमी से शरीर में 'परनीसियस एनीमिया' (Pernicious anemia) हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। विटामिन B1 (थायमिन) की कमी से बेरी-बेरी होता है। विटामिन C (एस्कॉर्बिक अम्ल) जल में घुलनशील है और स्कर्वी रोग का कारण बनता है। विटामिन D (कैल्सीफेरोल) हड्डियों को मजबूत रखता है और इसकी कमी से रिकेट्स होता है। विटामिन B12 में कोबाल्ट होता है जिसकी कमी से परनीसियस एनीमिया होता है। इस प्रकार के महत्वपूर्ण प्रश्नों और संपूर्ण अध्ययन सामग्री के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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मानव शरीर में विभिन्न विटामिनों, उनके रासायनिक नामों तथा उनकी कमी से होने वाले…
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भारत में प्राकृतिक आपदाओं के प्रबंधन, आपदा जोखिम न्यूनीकरण…
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मानव शरीर में संतुलित आहार और पोषक पदार्थों (Nutrients) की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients) जैसे कि विटामिन और खनिज ऊर्जा के प्रत्यक्ष स्रोत नहीं होते हैं, किंतु ये चयापचय (Metabolism) और शरीर की जैव-रासायनिक क्रियाओं को नियंत्रित करने के लिए अत्यंत आवश्यक होते हैं।
2. वसा-घुलनशील विटामिन (विटामिन A, D, E और K) का संचय मुख्य रूप से यकृत और वसीय ऊतकों में होता है, और अत्यधिक मात्रा में इनके सेवन से 'हाइपरविटामिनोसिस' की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
3. प्रोटीन शरीर की वृद्धि और ऊतकों की मरम्मत के लिए आवश्यक वृहद् पोषक तत्व (Macronutrient) है, जिसकी कमी से बच्चों में 'क्वाशियोकोर' और 'मरास्मस' जैसे गंभीर कुपोषण रोग हो जाते हैं।
4. कार्बोहाइड्रेट शरीर का प्राथमिक ऊर्जा स्रोत है, और 1 ग्राम ग्लूकोज के पूर्ण ऑक्सीकरण से लगभग 9.3 किलो कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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विटामिनों और उनके रासायनिक नामों तथा उनके अभाव से होने वाले रोगों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विटामिन B1 (थायमिन) की कमी से 'बेरी-बेरी' रोग होता है, जिसमें तंत्रिका तंत्र की कमजोरी और मांसपेशियों का पक्षाघात जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं, तथा यह जल में घुलनशील विटामिन है।
2. विटामिन C (एस्कॉर्बिक अम्ल) एक एंटीऑक्सीडेंट विटामिन है, जिसकी कमी से 'स्कर्वी' रोग होता है, जिसमें मसूड़ों से खून आना और घाव भरने में देरी होना मुख्य लक्षण हैं, और यह शरीर में संचित रहता है।
3. विटामिन D (कैल्सीफेरोल) वसा में घुलनशील विटामिन है, जिसका संश्लेषण सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में त्वचा द्वारा किया जाता है, और इसकी कमी से बच्चों में 'रिकेट्स' तथा वयס्कों में 'ऑस्टियोमैलेसिया' रोग हो जाता है।
4. विटामिन B12 (सायनोकोबलामिन) का रासायनिक नाम है, जिसमें कोबाल्ट धातु पाई जाती है, और इसकी कमी से 'परनिशियस एनीमिया' (घातक अरक्तता) नामक रोग होता है, क्योंकि यह लाल रक्त कोशिकाओं के परिपक्वता के लिए आवश्यक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भारत में प्राकृतिक आपदाओं के प्रबंधन, आपदा जोखिम न्यूनीकरण (DRR) तथा संस्थागत संरचना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत गठित 'राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण' (NDMA) के पदेन अध्यक्ष देश के प्रधानमंत्री होते हैं, और यह संस्था आपदा प्रबंधन के प्रति 'प्रतिक्रियात्मक' (Reactive) दृष्टिकोण के स्थान पर 'निवारक, पूर्ववर्ती एवं जोखिम-सूचित' (Proactive and Prevention-oriented) दृष्टिकोण को बढ़ावा देती है।
2. 'सेंडाई फ्रेमवर्क फॉर डिजास्टर रिस्क रिडक्शन' (2015-2030) के वैश्विक लक्ष्यों के तहत वर्ष 2030 तक वैश्विक मानव मृत्यु दर को कम करने के साथ-साथ आपदाओं के कारण बुनियादी ढांचे को होने वाले नुकसान और आर्थिक क्षति में भारी कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
3. बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA) द्वारा आपदा जोखिम को कम करने के लिए ग्रामीण स्तर पर 'आपदा मित्र' और 'आपदा सखी' जैसी सामुदायिक प्रशिक्षण योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका उद्देश्य बाढ़ और वज्रपात जैसी आपदाओं से निपटने के लिए स्थानीय स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करना है।
4. भारत में किसी भी आपदा के पश्चात राहत कार्यों के लिए उपयोग की जाने वाली 'राज्य आपदा मोचन निधि' (SDRF) का शत-प्रतिशत वित्त पोषण पूरी तरह से राज्य सरकारों द्वारा अपने आंतरिक कर राजस्व से किया जाता है, तथा इसमें केंद्र सरकार की कोई वित्तीय भागीदारी नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भारत में प्राकृतिक आपदाओं के प्रबंधन, शमन (Mitigation) तथा राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर स्थापित संस्थागत तंत्र के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत गठित 'राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण' (NDMA) के पदेन अध्यक्ष देश के प्रधानमंत्री होते हैं, जबकि राज्य स्तर पर 'राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण' (SDMA) की अध्यक्षता संबंधित राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा की जाती है।
2. 'सेंडाई फ्रेमवर्क फॉर डिजास्टर रिस्क रिडक्शन' (2015-2030) आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए एक वैश्विक समझौता है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य वर्ष 2030 तक आपदा से होने वाली वैश्विक मानव मृत्यु दर को कम करना और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को होने वाले नुकसान में भारी कमी लाना है।
3. बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA) द्वारा आपदा जोखिम को कम करने के लिए 'आपदा मित्र' और 'आपदा सखी' जैसी सामुदायिक प्रशिक्षण योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर युवाओं को बाढ़, वज्रपात और भूकंप जैसी आपदाओं से निपटने के लिए प्राथमिक बचाव प्रशिक्षण देना है।
4. भारत में किसी भी प्राकृतिक आपदा के तुरंत पश्चात राहत और बचाव कार्यों के लिए उपयोग की जाने वाली 'राज्य आपदा मोचन निधि' (SDRF) का 100% वित्त पोषण पूरी तरह से राज्य सरकारों द्वारा अपने कर राजस्व से किया जाता है, और इसमें केंद्र सरकार की कोई वित्तीय हिस्सेदारी नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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मानव शरीर में हॉर्मोन्स, विटामिन और विभिन्न जैविक अणुओं (Biomolecules) के कार्य तथा उनकी कमी से होने वाले रोगों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इंसुलिन (Insulin) एक पेप्टाइड हॉर्मोन है जो अग्नाशय (Pancreas) की लैंगरहैंस की द्वीपिकाओं की बीटा कोशिकाओं द्वारा स्रावित होता है, और यह रक्त में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित करते हुए ग्लाइकोजेनेसिस की प्रक्रिया को प्रेरित करता है।
2. विटामिन D, जिसे 'कैल्सीफेरोल' भी कहा जाता है, एक वसा-में-घुलनशील विटामिन है जो शरीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस के अवशोषण को नियंत्रित करता है, तथा इसकी कमी से बच्चों में 'रिकेट्स' (Rickets) और वयס्कों में 'ऑस्टियोमलेशिया' (Osteomalacia) नामक रोग हो जाता है।
3. 'थायरोक्सिन' (Thyroxine) हॉर्मोन के संश्लेषण के लिए आयोडीन अनिवार्य होता है, जिसकी कमी से गॉइटर (घेंघा) रोग होता है, जबकि वयस्क अवस्था में इस हॉर्मोन की अत्यधिक कमी से 'मिक्सोएडिमा' (Myxedema) नामक स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
4. रुधिर में हीमोग्लोबिन एक लोहे युक्त प्रोटीन है जो ऑक्सीजन का परिवहन करता है, तथा इसकी कमी से होने वाला एनीमिया (रक्तल्पता) हमेशा केवल विटामिन B12 की कमी के कारण ही होता है, इसमें आयरन या फोलिक एसिड की कोई भूमिका नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बाल विकास पर दो प्रमुख प्रभाव क्या है?
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