मास्लो, रोजर्स एवं मानवतावाद
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19वीं शताब्दी के सामाजिक एवं सांस्कृतिक जागरण के संदर्भ में, राजा राममोहन राय, स्वामी विवेकानंद और ज्योतिराव फुले के कार्यों और उनके संगठनों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राजा राममोहन राय द्वारा 1828 में स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और जातिगत कठोरताओं का पुरजोर विरोध किया, किंतु उन्होंने पाश्चात्य उदारवादी शिक्षा, विज्ञान और प्रेस की स्वतंत्रता का समर्थन करते हुए आधुनिकीकरण पर विशेष बल दिया।
- 2. स्वामी विवेकानंद ने 1897 में 'रामकृष्ण मिशन' की स्थापना की, जिसका मुख्य उद्देश्य केवल धार्मिक कर्मकांडों का प्रचार करना था, तथा उन्होंने वेदांत दर्शन को पश्चिमी दुनिया में लोकप्रिय बनाने के लिए कभी भी सामाजिक सेवा या मानवतावादी कार्यों को प्राथमिकता नहीं दी।
- 3. ज्योतिराव फुले द्वारा 1873 में स्थापित 'सत्यशोधक समाज' ने ब्राह्मणवादी वर्चस्व और सामाजिक असमानता के विरुद्ध शूद्रों व अतिशूद्रों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया तथा अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'गुलामगिरी' के माध्यम से जाति व्यवस्था की कड़ी आलोचना की।
- 4. ईश्वर चंद्र विद्यासागर के अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप ब्रिटिश सरकार ने 1856 में 'हिन्दू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम' (Act XV of 1856) पारित किया, जिससे समाज में विधवाओं के पुनर्विवाह को कानूनी वैधता प्राप्त हुई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 3 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। राजा राममोहन राय ने ब्रह्म समाज के माध्यम से एकेश्वरवाद का प्रचार किया और पाश्चात्य शिक्षा व आधुनिकीकरण का समर्थन किया। ज्योतिराव फुले ने 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना की और 'गुलामगिरी' में जाति व्यवस्था पर प्रहार किया। ईश्वर चंद्र विद्यासागर के प्रयासों से 1856 का विधवा पुनर्विवाह अधिनियम पारित हुआ। वहीं, कथन 2 असत्य है क्योंकि स्वामी विवेकानंद ने रामकृष्ण मिशन के माध्यम से धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ गरीबों की सेवा, शिक्षा और मानवतावादी कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी थी। इस तरह के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक प्रश्नों और अध्ययन सामग्रियों के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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अब्राहम मैस्लो द्वारा प्रतिपादित आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत (Hierarchy of…
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