वर्ष 1974 के बिहार छात्र आंदोलन और जयप्रकाश नारायण (जेपी) द्वारा प्रतिपादित 'संपूर्ण क्रांति' के वैचारिक और ऐतिहासिक संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. इस आंदोलन की तात्कालिक शुरुआत मार्च 1974 में पटना विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, खाद्यान्न संकट और शैक्षणिक भ्रष्टाचार के विरुद्ध की गई थी, जिसके आह्वान पर छात्रों ने 'बिहार छात्र संघर्ष समिति' का गठन किया था।
- 2. जयप्रकाश नारायण ने संपूर्ण क्रांति के कुल सात वैचारिक आयामों की रूपरेखा प्रस्तुत की थी, जिनमें सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक, वैचारिक/नैतिक और आध्यात्मिक क्रांति शामिल थी।
- 3. पटना के गांधी मैदान में 5 जून 1974 को आयोजित ऐतिहासिक जनसभा में जेपी ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तियों का स्मरण करते हुए 'सिंहासन खाली करो कि जनता आती है' का नारा देते हुए इंदिरा गांधी सरकार के विरुद्ध देशव्यापी सत्याग्रह और संपूर्ण क्रांति का आह्वान किया था।
- 4. जेपी आंदोलन के प्रभाव को क्षीण करने तथा इसके बढ़ते व्यापी विरोध को दबाने के लिए तत्कालीन केंद्र सरकार ने 25 जून 1975 को देश में आंतरिक अशांति के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल (Emergency) की घोषणा कर दी थी, जिसके तहत जयप्रकाश नारायण सहित सभी प्रमुख विपक्षी नेताओं को तुरंत मीसा (MISA) के तहत गिरफ्तार कर लिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
Detailed Explanation
वर्ष 1974 का बिहार छात्र आंदोलन भारतीय राजनीतिक इतिहास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मोड़ था। मार्च 1974 में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और प्रशासनिक भ्रष्टाचार के खिलाफ छात्रों ने 'बिहार छात्र संघर्ष समिति' बनाई और बाद में इस आंदोलन का नेतृत्व जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने स्वीकार किया। जेपी ने इस आंदोलन को केवल सरकार बदलने तक सीमित न रखकर समाज के हर क्षेत्र में परिवर्तन के लिए 'संपूर्ण क्रांति' का रूप दिया, जिसके सात प्रमुख आयाम (सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक, वैचारिक और नैतिक) थे। 5 जून 1974 को पटना के गांधी मैदान में उन्होंने ऐतिहासिक 'सिंहासन खाली करो कि जनता आती है' का नारा दिया। इस जनआंदोलन की व्यापकता को नियंत्रित करने के लिए 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लागू किया गया। बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा की तैयारी के लिए ऐसे ऐतिहासिक और वैचारिक प्रश्नों का गहन अध्ययन अत्यंत आवश्यक है।