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BPSC TRE 4.0
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बिहार में किसान आंदोलनों के विकास, चंपारण सत्याग्रह और स्वामी सहजानंद सरस्वती के नेतृत्व में हुए किसान संघर्षों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वर्ष 1917 के चंपारण सत्याग्रह के दौरान राजकुमार शुक्ल के अनुरोध पर महात्मा गांधी चंपारण आए थे, जहाँ उन्होंने तीनकथा प्रणाली (जिसके तहत किसानों को अपनी कुल भूमि के 3/20वें भाग पर नील की खेती करना अनिवार्य था) के विरुद्ध सफल सत्याग्रह किया था।
- 2. स्वामी सहजानंद सरस्वती ने वर्ष 1929 में 'बिहार प्रांतीय किसान सभा' की स्थापना की थी, जिसका उद्देश्य जमींदारों द्वारा किसानों पर किए जा रहे अत्याचारों, अवैध वसूली (अवाब्स) और बेदखली के खिलाफ आवाज उठाना था।
- 3. वर्ष 1936 में लखनऊ में आयोजित 'अखिल भारतीय किसान सभा' के प्रथम सम्मेलन के अध्यक्ष स्वामी सहजानंद सरस्वती चुने गए थे, जबकि इसके महासचिव के रूप में एन.जी. रंगा ने कार्य किया था।
- 4. बकाश्त भूमि (Bakasht Land) आंदोलन, जो बिहार में किसानों द्वारा जमींदारों के खिलाफ चलाया गया था, उसका मुख्य उद्देश्य किसानों की उस जमीन पर पुनः अधिकार प्राप्त करना था जिसे जमींदारों ने लगान न चुका पाने के कारण गैर-कानूनी तरीके से छीन लिया था और जोतदारों के रूप में किसान उसी भूमि पर कार्य कर रहे थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। वर्ष 1917 का चंपारण सत्याग्रह भारत में गांधीजी का पहला सविनय अवज्ञा आंदोलन था, जो यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा थोपी गई 'तीनकथा प्रणाली' के विरुद्ध था। स्वामी सहजानंद सरस्वती ने 1929 में 'बिहार प्रांतीय किसान सभा' की स्थापना की और 1936 में लखनऊ में 'अखिल भारतीय किसान सभा' के पहले अध्यक्ष बने, जिसमें एन.जी. रंगा महासचिव थे। इसके अलावा, बिहार का 'बकाश्त भूमि आंदोलन' किसानों के उस अधिकार के लिए था जिसे जमींदारों ने छीन लिया था। अधिक अध्ययन सामग्री के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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बिहार की राजनीति एवं प्रशासनिक परिदृश्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बिहार विधान परिषद (Bihar Legislative Council) भारतीय संविधान के अनुच्छेद 169 के अंतर्गत सृजित एक स्थायी सदन है, जिसके कुल सदस्यों में से एक-तिहाई सदस्यों का निर्वाचन स्थानीय निकायों (Local Authorities) के निर्वाचन क्षेत्रों से होता है।
2. राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General) की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा अनुच्छेद 165 के तहत की जाती है, और उन्हें राज्य के विधानमंडल के दोनों सदनों की बैठकों में बोलने तथा भाग लेने का अधिकार प्राप्त है, किंतु उन्हें किसी भी स्थिति में मतदान करने का अधिकार नहीं होता है।
3. बिहार विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) लाने के लिए कम से कम 50 सदस्यों के समर्थन की अनिवार्य आवश्यकता होती है, और यह प्रस्ताव केवल व्यक्तिगत मंत्रियों के खिलाफ ही लाया जा सकता है, संपूर्ण मंत्रिपरिषद के विरुद्ध नहीं।
4. राज्य निर्वाचन आयोग, जो पंचायतों और नगर निकायों के चुनाव कराता है, का गठन संविधान के अनुच्छेद 243-K के प्रावधानों के अंतर्गत किया जाता है, और राज्य निर्वाचन आयुक्त को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अलावा अन्य तरीके से पद से नहीं हटाया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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उन्नीसवीं और बीसवीं शताब्दी के दौरान बिहार में हुए किसान आंदोलनों एवं सभाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1919-20 में मधुबनी और दरभंगा क्षेत्र में स्वामी विद्यानंद के नेतृत्व में किसानों ने 'रामायण' की चौपाइयों का पाठ कर जमींदारों के अवैध उत्पीड़न, बेगार प्रथा और गो-चर भूमि पर कब्ज़े के खिलाफ एक शक्तिशाली आंदोलन चलाया था।
2. वर्ष 1929 में स्वामी सहजानंद सरस्वती द्वारा 'बिहार प्रांतीय किसान सभा' की स्थापना की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य जमींदारों द्वारा कृषकों पर किए जा रहे अन्यायों के विरुद्ध कानूनी लड़ाई लड़ना और बेदखली के अधिकारों का विरोध करना था।
3. वर्ष 1936 में लखनऊ में आयोजित अखिल भारतीय किसान सभा के पहले सम्मेलन में स्वामी सहजानंद सरस्वती को इसका अध्यक्ष चुना गया था, जबकि एन.जी. रंगा को इसका महासचिव बनाया गया था।
4. बकाश्त भूमि (ऐसी भूमि जिसे जमींदारों ने किसानों द्वारा लगान न चुका पाने के कारण छीन लिया था लेकिन जो जोत-कोड़ के अधिकार के अंतर्गत किसानों के पास ही थी) की वापसी के लिए बिहार में 'बकाश्त संघर्ष' चलाया गया, जिसका नेतृत्व मुख्य रूप से प्रांतीय किसान सभा और कार्यानंद शर्मा ने किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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