त्वरित लिंक्स
BPSC TRE 4.0
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मेण्डल के वंशागति के नियमों और आनुवंशिकी की संकल्पनाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. मेण्डल द्वारा मटर के पौधे (पाइसम सटाइवम) पर किए गए संकरण प्रयोगों के दौरान 'स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम' (Law of Independent Assortment) इस बात पर आधारित है कि जब दो या दो से अधिक लक्षणों के जोड़ों को एक साथ क्रॉस कराया जाता है, तो एक लक्षण की वंशागति दूसरे लक्षण की वंशागति से पूर्णतः स्वतंत्र होती है, बशर्ते वे जीन अलग-अलग गुणसूत्रों पर स्थित हों या उनके बीच पर्याप्त दूरी हो।
- 2. 'अपूर्ण प्रभाविता' (Incomplete Dominance) की खोज कार्ल कोरेंस द्वारा 'मिराबिलिस जलापा' (संध्या मलय) पौधे में की गई थी, जिसमें F1 पीढ़ी के पौधे दोनों जनकों में से किसी एक के भी पूर्ण रूप से प्रभावी नहीं होते, बल्कि दोनों का एक मध्यवर्ती (Intermediate) लक्षण प्रदर्शित होता है, जैसे लाल और सफेद फूलों के क्रॉस से गुलाबी फूल का उत्पन्न होना।
- 3. 'सह-प्रभाविता' (Co-dominance) का एक उत्कृष्ट उदाहरण मानव में ABO रक्त समूह प्रणाली है, जिसमें इयारोथ्रोसाइट्स की सतह पर पाए जाने वाले एंटीजन A और B दोनों एलील एक साथ अपनी उपस्थिति स्वतंत्र रूप से और समान रूप से व्यक्त करते हैं, जिससे AB रक्त समूह का निर्माण होता है।
- 4. मॉर्गन (T.H. Morgan) द्वारा ड्रोसोफिला मेलानोस्टर (फल मक्खी) पर किए गए प्रयोगों के दौरान यह देखा गया कि एक ही गुणसूत्र पर स्थित जीन जब वंशागत होते हैं, तो वे हमेशा स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम का पालन करते हैं और उनके बीच कभी भी 'सहसंलग्नता' (Linkage) या 'जीन विनिमय' (Crossing Over) जैसी परिघटनाएँ नहीं होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
उपर्युक्त कथनों में कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं, जबकि कथन 4 असत्य है। टी.एच. मॉर्गन ने ड्रोसोफिला पर प्रयोग करते हुए यह सिद्ध किया था कि एक ही गुणसूत्र पर स्थित जीन 'सहसंलग्नता' (Linkage) प्रदर्शित करते हैं और वे स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम का पालन नहीं करते हैं, बल्कि उनके बीच जीन विनिमय (Crossing Over) की संभावना होती है। आनुवंशिकी के ऐसे कठिन और विश्लेषणात्मक प्रश्नों के विस्तृत अध्ययन के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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खगोलतिकी और गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांतों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. केप्लर के ग्रहीय गति के तृतीय नियम (परिक्रमण काल का नियम) के अनुसार, किसी ग्रह के परिक्रमण काल का वर्ग ($T^2$) उसकी सूर्य से औसत दूरी के घन ($R^3$) के सीधे समानुपातिक होता है, जिसका उपयोग खगोलविदों द्वारा सौरमंडल में दूरस्थ पिंडों की कक्षाओं के निर्धारण के लिए किया जाता है।
2. सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक ($G$) का मान द्रव्यमान और दूरी की इकाइयों पर निर्भर करता है, और इसे सर्वप्रथम हेनरी केवेंडिश द्वारा मरोड़ी संतुलन (Torsion Balance) प्रयोग की सहायता से सटीक रूप से प्रायोगिक तौर पर निर्धारित किया गया था।
3. पृथ्वी की सतह से ऊपर जाने पर गुरुत्वीय त्वरण ($g$) का मान घटता है, किंतु पृथ्वी के भीतर गहराई में जाने पर भी $g$ का मान लगातार घटता जाता है और पृथ्वी के केंद्र पर यह शून्य हो जाता है।
4. कृत्रिम उपग्रह के भीतर बैठे अंतरिक्ष यात्री को भारहीनता (Weightlessness) का अनुभव इसलिए होता है क्योंकि उपग्रह और अंतरिक्ष यात्री दोनों ही पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में समान त्वरण से मुक्त पतन (Free Fall) की स्थिति में होते हैं, जिससे अभिलंब प्रतिक्रिया बल शून्य हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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मानव शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्वों (Nutrients) और उनके रासायनिक स्वरूप या कार्यों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सूक्ष्म पोषक तत्वों (Micronutrients) के अंतर्गत विटामिन और खनिज लवण आते हैं, जो शरीर को सीधे ऊर्जा प्रदान नहीं करते, बल्कि चयापचय (Metabolism) और विभिन्न जैविक क्रियाओं के नियमन के लिए अत्यंत आवश्यक होते हैं।
2. वसा-घुलनशील विटामिनों (Fat-soluble vitamins) में विटामिन ए, डी, ई और के शामिल हैं, जिनका संचय मुख्य रूप से यकृत (Liver) और वसीय ऊतकों में होता है, तथा इनकी अत्यधिक मात्रा शरीर के लिए विषैली (Toxic) हो सकती है।
3. प्रोटीन अमीनो एसिड की लंबी श्रृंखलाओं से बने बहुलक (Polymers) हैं, जिनमें से 'आवश्यक अमीनो एसिड' (Essential amino acids) वे होते हैं जिनका संश्लेषण मानव शरीर के भीतर स्वतः हो जाता है और इन्हें बाहर से आहार के माध्यम से लेने की आवश्यकता नहीं होती।
4. कार्बोहाइड्रेट शरीर का मुख्य ऊर्जा स्रोत हैं, जिनमें जटिल कार्बोहाइड्रेट (जैसे सेलूलोज़) पाचक एंजाइमों द्वारा मनुष्यों में आसानी से पच जाते हैं और तुरंत ऊर्जा प्रदान करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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प्राचीन भारतीय इतिहास के विभिन्न कालों, राजवंशों और उनकी प्रशासनिक व्यवस्थाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मौर्य प्रशासन में 'अध्यक्ष' विभिन्न विभागों के अधीक्षक (Superintendents) होते थे, जैसे 'सुल्गाध्यक्ष' शुल्क या कर संग्रह से संबंधित था और 'पणध्यक्ष' राज्य द्वारा संचालित व्यापार का नियंत्रण करता था, जबकि कौटिल्य के अर्थशास्त्र में राजा को सर्वोच्च न्यायाधीश माना गया है।
2. गुप्त काल में भूमि अनुदान (Land Grants) की प्रथा का व्यापक विस्तार हुआ, जिसमें ब्राह्मणों और मंदिरों को दी जाने वाली कर-मुक्त भूमि को 'अग्रहार' कहा जाता था, तथा इस काल में मुद्रास्फीति के कारण स्वर्ण सिक्कों (दीनार) की शुद्धता में भारी गिरावट आई थी।
3. सातवाहन वंश के शासकों ने शीशे, प्रोटीन, ताँबे और पोटीन के सिक्के जारी किए, तथा उनकी राजभाषा प्राकृत थी, जबकि उनकी प्रशासनिक व्यवस्था में 'माता के नाम पर नामकरण' (Matronymics) की प्रथा मातृसत्तात्मक समाज की उपस्थिति को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
4. संगम काल में चोल, चेर और पाण्ड्य राजवंशों का शासन था, जिसमें 'उरैयूर' कपास के व्यापार और सूती वस्त्रों के उत्पादन के लिए एक प्रमुख केंद्र था, तथा इस काल की सभाओं या संमेलनों को 'संगम' कहा जाता था जिनका आयोजन मदुरै और कपाटपुरम में किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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सूची-I (अधिकारी) को सूची-II (रैंक) से सुमेलित कीजिए?
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इस्पात या आयरन वस्तु में जिंक (जस्ता) की पतली परत के लेपन का नाम क्या है?
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