केप्लर के ग्रहों की गति के नियमों और गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. केप्लर का द्वितीय नियम (क्षेत्रीय चाल का नियम) इस बात का संकेत देता है कि सूर्य के चारों ओर परिक्रमण करते हुए ग्रह का कोणीय संवेग (Angular Momentum) संरक्षित रहता है, क्योंकि केंद्रीय बलों के अधीन गति में क्षेत्रीय वेग ($dA/dt$) अचर होता है।
- 2. न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम के अनुसार, किन्हीं दो पिंडों के बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल माध्यम की प्रकृति पर निर्भर करता है, और यदि दोनों पिंडों को पानी के भीतर रख दिया जाए, तो उनके बीच का आकर्षण बल शून्य हो जाता है।
- 3. पृथ्वी की सतह से अनंत दूरी तक किसी पिंड को भेजने के लिए आवश्यक 'पलायन वेग' (Escape Velocity) उस पिंड के द्रव्यमान और प्रक्षेपण कोण पर निर्भर करता है, तथा अधिक द्रव्यमान वाले पिंड के लिए पलायन वेग का मान अधिक होता है।
- 4. यदि पृथ्वी अपने वर्तमान कोणीय वेग से 17 गुना अधिक वेग से घूमने लगे, तो भूमध्य रेखा (Equator) पर रखी वस्तुओं का आभासी भार शून्य हो जाएगा और वहाँ की वस्तुएँ भारहीनता का अनुभव करेंगी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
Detailed Explanation
कथन 1 सत्य है क्योंकि केप्लर का द्वितीय नियम केंद्रीय बल (गुरुत्वाकर्षण बल) के अंतर्गत कार्य करता है, जहाँ केंद्रीय बल के अधीन कोणीय संवेग हमेशा संरक्षित रहता है और क्षेत्रीय वेग ($dA/dt = L/2m$) अचर होता है। कथन 2 असत्य है क्योंकि न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण का नियम माध्यम पर निर्भर नहीं करता है; यह किन्हीं दो पिंडों के बीच उनके बीच के माध्यम से स्वतंत्र रूप से कार्य करता है। कथन 3 असत्य है क्योंकि पलायन वेग ($v_e = \sqrt{2gR}$) का सूत्र पिंड के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता है, यह केवल ग्रह के द्रव्यमान और त्रिज्या पर निर्भर करता है। कथन 4 सत्य है क्योंकि भूमध्य रेखा पर आभासी गुरुत्वीय त्वरण $g' = g - R\omega^2$ होता है, और जब कोणीय वेग $\omega$ का मान $\sqrt{g/R}$ के बराबर या उससे 17 गुना अधिक हो जाता है, तो $g'$ का मान शून्य हो जाता है, जिससे वस्तुएं भारहीनता महसूस करती हैं। अधिक अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।