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BPSC TRE 4.0
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भारतीय इतिहास के विविध एवं रोचक पक्षों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
- 1. 'द डिस्कवरी ऑफ इंडिया' — जवाहरलाल नेहरू द्वारा अहमदनगर किले की जेल में अपने कारावास के दौरान लिखी गई पुस्तक, जिसमें सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर ब्रिटिश शासन तक के भारतीय इतिहास का वृहद विश्लेषण किया गया है।
- 2. 'अमुक्तालयद' (Amuktamalyada) — विजयनगर साम्राज्य के महान शासक कृष्णदेवराय द्वारा रचित एक तेलुगु ग्रंथ, जो प्रशासनिक नीति और राज्यकला पर आधारित है।
- 3. 'किताब-उल-रेहला' — मोरक्को के प्रसिद्ध यात्री इब्न बूट्ता द्वारा अरबी भाषा में लिखा गया यात्रा वृत्तांत, जिसमें मुहम्मद बिन तुगलक के काल की सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक व्यवस्था का सजीव चित्रण मिलता है।
- 4. 'तुझुक-ए-बाबरी' — मुगल सम्राट बाबर द्वारा फारसी भाषा में रचित उसकी आत्मकथा, जो तुर्क भाषा में लिखित होने के कारण 'बाबरनामा' के नाम से भी जानी जाती है।
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से युग्म सही सुमेलित है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
युग्म 1 सही है क्योंकि जवाहरलाल नेहरू ने अहमदनगर किले की जेल में अपने कारावास के दौरान 'द डिस्कवरी ऑफ इंडिया' (भारत की खोज) पुस्तक लिखी थी। युग्म 2 सही है क्योंकि विजयनगर साम्राज्य के तुलुव वंश के प्रतापी शासक कृष्णदेवराय ने तेलुगु भाषा में 'अमुक्तालयद' की रचना की थी। युग्म 3 सही है क्योंकि मोरक्को का यात्री इब्न बूट्ता मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में भारत आया था और उसने अपने यात्रा वृत्तांत 'रेहला' में तत्कालीन भारतीय जीवन का सुंदर वर्णन किया है। युग्म 4 गलत है क्योंकि 'तुझुक-ए-बाबरी' (बाबरनामा) मूल रूप से फारसी में नहीं, बल्कि तुर्की (चगताई तुर्क) भाषा में लिखी गई थी, जिसे बाद में अब्दुल रहीम खानखाना ने फारसी में अनुवादित किया था। अधिक अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
Related Questions
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पृथ्वी के आंतरिक भागों में उत्पन्न होने वाली विवर्तनिक और अंतर्जात बलों के परिणामस्वरूप 'ज्वालामुखी एवं भूकम्प' की घटनाओं का अध्ययन किया जाता है। इस संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ज्वालामुखी उद्गार के समय निकलने वाले गैसीय पदार्थों में सर्वाधिक मात्रा जलवाष्प (Water Vapour) की होती है, जिसके पश्चात कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन और सल्फर डाइऑक्साइड गैसें प्रमुखता से उत्सर्जित होती हैं।
2. रिक्टर स्केल (Richter Scale) एक लघुगणकीय (Logarithmic) पैमाना है, जिसका अर्थ है कि स्केल पर प्रत्येक अगली पूर्ण संख्या पिछली संख्या की तुलना में 32 गुना अधिक ऊर्जा मुक्त होने को प्रदर्शित करती है।
3. प्रशांत महासागर की परिधि पर स्थित 'अग्नि वलय' (Ring of Fire) विश्व का सबसे बड़ा भूकंपीय और ज्वालामुखी क्षेत्र है, जहाँ पृथ्वी के कुल सक्रिय ज्वालामुखियों का लगभग 75% हिस्सा पाया जाता है और यह क्षेत्र मुख्य रूप से अभिसारी (Convergent) प्लेट सीमाओं से संबंधित है।
4. भूकंपीय तरंगों में 'प्राथमिक तरंगें' (P-waves) अनुप्रस्थ (Transverse) प्रकृति की होती हैं, जो केवल ठोस माध्यम से ही गुजर सकती हैं, जबकि 'द्वितीयक तरंगें' (S-waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) प्रकृति की होने के कारण ठोस, द्रव और गैस तीनों माध्यमों में संचरण कर सकती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए सबसे अच्छी सिंचाई विधि कौन सी है?
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बिहार की पहली जल क्रीड़ा अकादमी कहां स्थापित करने का प्रस्ताव है?
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19वीं शताब्दी के दौरान भारत में हुए सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलनों और उनके संस्थापकों/नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा वर्ष 1815 में 'आत्मीय सभा' की स्थापना की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य एकेश्वरवाद के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ हिंदू समाज में व्याप्त कुप्रथाओं, जैसे सती प्रथा और बहुविवाह, का विरोध करना था।
2. स्वामी दयानंद सरस्वती ने वर्ष 1875 में बॉम्बे में 'आर्य समाज' की स्थापना की थी, तथा उनके प्रसिद्ध ग्रंथ 'सत्यार्थ प्रकाश' में उन्होंने वेदों की अचूकता और श्रेष्ठता का प्रतिपादन करते हुए 'भारत भारतीयों के लिए है' का राजनीतिक नारा दिया था।
3. ज्योतिराव फुले ने वर्ष 1873 में महाराष्ट्र में 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना की, जिसका मुख्य उद्देश्य शूद्रों और अति-शूद्रों को ब्राह्मणवादी वर्चस्व और धार्मिक पाखंडों से मुक्त कराना तथा उनके सामाजिक अधिकारों की रक्षा करना था।
4. एनी विसंेट ने वर्ष 1898 में बनारस में 'सेंट्रल हिंदू स्कूल' की स्थापना की थी, जो आगे चलकर वर्ष 1915 में पंडित मदन मोहन मालवीय के प्रयासों से 'बनारस हिंदू विश्वविद्यालय' (BHU) का केंद्र बना।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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कोशिका चक्र (Cell Cycle) और समसूत्री (Mitosis) तथा अर्धसूत्री (Meiosis) विभाजन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कोशिका चक्र की अंतरावस्था (Interphase) के दौरान 'एस-चरण' (S-phase) में डीएनए का प्रतिकृति (DNA Replication) होता है, जिससे डीएनए की मात्रा दोगुनी हो जाती है, किंतु गुणसूत्रों की संख्या (Ploidy) अपरिवर्तित रहती है।
2. अर्धसूत्री विभाजन-I (Meiosis-I) के पैचिटीन (Pachytene) उप-चरण में समजात गुणसूत्रों के बीच अनुवांशिक पदार्थों का आदान-प्रदान होता है, जिसे क्रॉसिंग ओवर (Crossing Over) कहा जाता है, और यह एंजाइम 'रीकॉम्बिनेज' (Recombinase) द्वारा उत्प्रेरित होता है।
3. समसूत्री विभाजन (Mitosis) की पश्चावस्था (Anaphase) के दौरान सेंट्रोमियर (Centromere) का विभाजन होता है, जिससे सिस्टर क्रोमैटिड्स अलग होकर विपरीत ध्रुवों की ओर गति करते हैं, जिससे गुणसूत्रों की संख्या मूल कोशिका की आधी हो जाती है।
4. पादप कोशिकाओं में कोशिका विभाजन के दौरान साइटोकाइनेसिस (Cytokinesis) की प्रक्रिया 'कोशिका पट्टिका' (Cell Plate) के निर्माण द्वारा होती है, जिसका निर्माण गॉल्जी काया द्वारा स्रावित पुटिकाओं (Vesicles) के संलयन से होता है, न कि खांच (Furrow) विधि द्वारा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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