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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की संरचना, उसकी अधिकारिता और न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) की शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 143 के अंतर्गत राष्ट्रपति को उच्चतम न्यायालय से परामर्श करने की शक्ति प्राप्त है, और यदि कोई ऐसा विवाद जो किसी ऐसी संधि, समझौते, प्रसंविदा या अन्य पूर्ववर्ती लिखत से उत्पन्न होता है, जो संविधान लागू होने से पहले की गई थी, तो उच्चतम न्यायालय के लिए राष्ट्रपति को ऐसा परामर्श देना अनिवार्य (Mandatory) होता है।
- 2. संविधान के अनुच्छेद 137 के तहत उच्चतम न्यायालय को अपनी ही किसी पूर्व निर्णय या आदेश की पुनरावलोकन (Review) करने की शक्ति प्राप्त है, तथा संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि या अनुच्छेद 145 के अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अधीन रहते हुए उच्चतम न्यायालय को अपने द्वारा दिए गए निर्णय या आदेश पर पुनर्विचार करने का पूर्ण अधिकार है।
- 3. जनहित याचिका (PIL) की अवधारणा को भारतीय न्यायपालिका में विकसित करने का श्रेय न्यायमूर्ति पी.एन. भगवती और न्यायमूर्ति वी.आर. कृष्ण अय्यर को जाता है, जिसके तहत सर्वोच्च न्यायालय ने 'लोकस स्टैंडी' (Locus Standi) के पारंपरिक नियम को शिथिल करते हुए यह अनुमति दी कि किसी पीड़ित व्यक्ति के स्थान पर कोई भी लोक-हितैषी व्यक्ति या संस्था अदालत का दरवाजा खटखटा सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 143(1) के तहत राष्ट्रपति लोक महत्व के किसी भी प्रश्न पर उच्चतम न्यायालय से परामर्श मांग सकता है, जिसमें न्यायालय परामर्श देने के लिए बाध्य नहीं है (यह न्यायालय का स्वविवेक है)। हालांकि, अनुच्छेद 143(2) के तहत यदि कोई विवाद किसी पूर्व-संवैधानिक संधि, समझौते या प्रसंविदा से उत्पन्न होता है, तो उच्चतम न्यायालय के लिए राष्ट्रपति को अपनी राय देना **अनिवार्य** है, किंतु राष्ट्रपति उस राय को मानने के लिए बाध्य नहीं हैं। यहाँ कथन में परामर्श देना अनिवार्य बताया गया है, लेकिन अनुच्छेद 143(1) के संदर्भ में यह ऐच्छिक है, जबकि 143(2) के तहत यह अनिवार्य है; तथापि, अनुच्छेद 143(1) के अंतर्गत न्यायालय परामर्श देने से मना भी कर सकता है (केरल शिक्षा बिल मामले में ऐसा हुआ था), इसलिए पूर्णतः अनिवार्य कहना तकनीकी रूप से त्रुटिपूर्ण है। कथन 2 बिल्कुल सही है; अनुच्छेद 137 उच्चतम न्यायालय को अपने ही निर्णयों की समीक्षा (Review) करने की शक्ति प्रदान करता है। कथन 3 भी बिल्कुल सही है; भारत में जनहित याचिका (PIL) की शुरुआत 1980 के दशक में हुई थी, जिससे 'लोकस स्टैंडी' के सिद्धांत में ढील दी गई। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल का अध्ययन करें।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत आपातकालीन उपबंधों (Emergency Provisions) और उनसे संबंधित संवैधानिक संशोधनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल संविधान के अनुच्छेद 352 के अंतर्गत राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा केवल 'युद्ध' या 'बाह्य आक्रमण' के आधार पर की जा सकती थी, किंतु 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) शब्द को जोड़कर 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द को प्रतिस्थापित किया गया था।
2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा यह प्रावधान किया गया था कि राष्ट्रपति द्वारा संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग में राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा की जा सकती है, तथा अनुच्छेद 359 के तहत राष्ट्रपति को यह शक्ति दी गई कि वह आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 20 और अनुच्छेद 21 को छोड़कर अन्य किसी भी मूल अधिकार के प्रवर्तन के लिए न्यायालय में जाने के अधिकार को निलंबित कर सकता है।
3. अनुच्छेद 356 के अंतर्गत किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होने की स्थिति में राज्य विधानमंडल की शक्तियां संसद द्वारा प्रयोग की जाती हैं, और 44वें संविधान संशोधन द्वारा यह अनिवार्य कर दिया गया कि राष्ट्रपति शासन की अवधि को एक वर्ष से आगे बढ़ाने के लिए यह आवश्यक है कि उस समय पूरे देश में राष्ट्रीय आपातकाल लागू हो या निर्वाचन आयोग यह प्रमाणित करे कि उस राज्य में विधानसभा के चुनाव कराना असंभव है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग-IVक के अंतर्गत उल्लिखित 'मूल कर्तव्यों' (Fundamental Duties) के प्रावधानों और उनके ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को सरदार स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था, जिसमें समिति ने नागरिकों द्वारा करों का भुगतान (Payment of Taxes) करने को भी एक मूल कर्तव्य के रूप में शामिल करने की संस्तुति की थी, जिसे इंदिरा गांधी सरकार ने स्वीकार नहीं किया था।
2. अनुच्छेद 51क के तहत प्रदत्त मूल कर्तव्य केवल भारतीय नागरिकों पर ही लागू होते हैं, विदेशी नागरिकों पर नहीं, और इनकी प्रकृति न्यायोचित (Justiciable) है, जिसका अर्थ यह है कि यदि कोई नागरिक किसी मूल कर्तव्य का उल्लंघन करता है, तो उसे सीधे उच्चतम न्यायालय द्वारा दंडित किया जा सकता है।
3. न्यायमूर्ति जे.एस. वर्मा समिति (1999) ने मूल कर्तव्यों के शिक्षण और उनके प्रभावी क्रियान्वयन से संबंधित संस्तुतियाँ दी थीं, और इस समिति ने यह स्पष्ट किया था कि संविधान के कई मूल कर्तव्यों का सार भारतीय सांस्कृतिक और पारंपरिक मूल्यों जैसे पर्यावरण संरक्षण और भाईचारे में पहले से ही निहित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) के कार्यों, उनके क्षेत्राधिकार के विस्तार तथा लोक सेवा आयोगों की स्वायत्तता से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 320 के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग या राज्य लोक सेवा आयोग से अखिल भारतीय सेवाओं, केंद्रीय सेवाओं और राज्य सेवाओं की नियुक्तियों के लिए अपनाई जाने वाली पद्धतियों पर परामर्श करना अनिवार्य है, और यदि सरकार आयोग के परामर्श के विरुद्ध कोई निर्णय लेती है, तो उस कारण को संसद या राज्य विधानमंडल के समक्ष रखना वैधानिक रूप से आवश्यक होता है।
2. संविधान के अनुच्छेद 321 के अंतर्गत संसद या राज्य का विधानमंडल, क्रमशः संघ लोक सेवा आयोग या राज्य लोक सेवा आयोग के कार्यों के दायरे का विस्तार करके उन्हें किसी स्थानीय प्राधिकारी, निगम या अन्य लोक निकाय (Public Institution) के अधीन आने वाली सेवाओं की नियुक्तियों से संबंधित मामलों को भी अपने अधिकार क्षेत्र में शामिल करने के लिए विधि बना सकता है।
3. संघ लोक सेवा आयोग या किसी राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्यों या कर्मचारियों को देय सभी वेतन, भत्ते और पेंशन, जिनमें प्रशासनिक व्यय भी शामिल हैं, संबंधित राज्य की संचित निधि पर भारित (Charged) होते हैं, ताकि आयोग कार्यपालिका के वित्तीय दबाव से पूरी तरह मुक्त रहकर स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकें।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत के महान्यायवादी (Attorney General for India) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (Comptroller and Auditor General of India - CAG) के संवैधानिक प्रावधानों, अधिकारों तथा उनकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत (During the pleasure of the President) पद धारण करता है, तथा उसे भारत के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है और वह संसद के दोनों सदनों की बैठकों में बोल सकता है तथा मतदान भी कर सकता है।
2. भारत का नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग का प्रमुख होता है, और संविधान के अनुच्छेद 148 के अनुसार उसे उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के समान प्रक्रिया और आधार पर ही राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है, तथा अपने पद से सेवानिवृत्त होने के बाद वह भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य कार्यालय (Employment) का पात्र नहीं होता है।
3. अनुच्छेद 151 के अनुसार CAG संघ के खातों से संबंधित अपनी लेखा परीक्षा रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपता है, जिसे राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखवाते हैं, और इसके उपरांत इस रिपोर्ट की विस्तृत जाँच संसद की लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee) द्वारा की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग IV-A के अंतर्गत वर्णित मूल कर्तव्यों (Fundamental Duties) के प्रवर्तन, प्रकृति और उनके कानूनी दायरा से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुति पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में शामिल किया गया था, लेकिन इस समिति ने नागरिकों के लिए कर अदायगी (payment of taxes) को भी एक मूल कर्तव्य बनाए जाने की संस्तुति की थी, जिसे संवैधानिक संशोधन में स्वीकार नहीं किया गया था।
2. प्रकृति से ये मूल कर्तव्य न्यायोचित (Justiciable) नहीं हैं, अर्थात इनके उल्लंघन या अनुपालन न करने पर सीधे उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय द्वारा कोई कानूनी दंड या रिट जारी नहीं की जा सकती है, जब तक कि संसद ने इनके कार्यान्वयन के लिए कोई विशिष्ट दंडात्मक कानून या अधिनियम न बनाया हो।
3. अनुच्छेद 51A के तहत उल्लिखित 11 मूल कर्तव्यों में से कुछ कर्तव्य केवल भारतीय नागरिकों पर ही लागू होते हैं, जबकि पर्यावरण संरक्षण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने से संबंधित कुछ कर्तव्य विदेशी नागरिकों पर भी समान रूप से लागू होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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