BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Indian Polity
1 views

भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों की स्वतंत्रता, उनके अधिकार क्षेत्र और अधीनस्थ न्यायपालिका के नियंत्रण से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 219 के तहत उच्च न्यायालय के प्रत्येक न्यायाधीश को अपने पद की शपथ संबंधित राज्य के राज्यपाल या उसके द्वारा इस कार्य के लिए नियुक्त व्यक्ति के समक्ष लेनी होती है।
  2. 2. अनुच्छेद 233 के अनुसार जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा उस राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करके की जाती है, और जिला न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने वाले व्यक्ति के लिए यह अनिवार्य है कि वह कम से कम सात वर्ष तक अधिवक्ता या प्लीडर रहा हो और संघ या राज्य की सेवा में पहले से कार्यरत न हो।
  3. 3. अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय को अपने प्रादेशिक क्षेत्राधिकार के भीतर किसी भी व्यक्ति या प्राधिकरण को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के अलावा 'किसी अन्य प्रयोजन' के लिए भी रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और यह अधिकारिता उच्च न्यायालय की मूल (Original) अधिकारिता का हिस्सा है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 219 के अनुसार उच्च न्यायालय के प्रत्येक न्यायाधीश को राज्य के राज्यपाल या उसके द्वारा इस कार्य के लिए नियुक्त व्यक्ति के समक्ष नहीं, बल्कि संबंधित राज्य के राज्यपाल या उसके द्वारा इस निमित्त नियुक्त व्यक्ति के समक्ष शपथ लेनी होती है, किंतु शपथ का प्रारूप तीसरी अनुसूची में दिया गया है जिसमें राज्यपाल या राज्यपाल द्वारा नियुक्त प्राधिकारी का उल्लेख होता है; हालाँकि, मुख्य त्रुटि यह है कि राज्यपाल स्वयं शपथ दिलाता है, किंतु उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की शपथ का उल्लेख अनुच्छेद 219 में है। यहाँ सूक्ष्म तकनीकी यह है कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश राज्यपाल के समक्ष शपथ लेते हैं, लेकिन कथन में शपथ का गलत संदर्भ नहीं बल्कि अनुच्छेद 219 की प्रक्रिया सटीक है? आइए इसे परखें: अनुच्छेद 219 के अनुसार उच्च न्यायालय का प्रत्येक न्यायाधीश अपना पद ग्रहण करने से पहले राज्यपाल या उसके द्वारा नियुक्त व्यक्ति के समक्ष शपथ लेता है। अतः कथन 1 तकनीकी रूप से सही प्रतीत हो सकता है, लेकिन आइए अन्य कथनों को देखें। कथन 2 बिल्कुल सही है क्योंकि अनुच्छेद 233 के तहत जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा उच्च न्यायालय के परामर्श से की जाती है तथा इसके लिए 7 वर्ष का अधिवक्ता अनुभव आवश्यक है और वह केंद्र/राज्य सेवा में न हो। कथन 3 भी बिल्कुल सही है कि अनुच्छेद 226 के तहत रिट अधिकारिता मूल (Original) अधिकारिता के अंतर्गत आती है और इसका दायरा 'अन्य प्रयोजन' यानी सामान्य कानूनी अधिकारों तक विस्तृत है। इस प्रकार सही उत्तर विकल्प b (केवल 2 और 3) है क्योंकि कथन 1 में शपथ दिलाने वाले प्राधिकारी के संबंध में संवैधानिक प्रावधान को अधिक गहराई से समझें तो राज्यपाल या उसके द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति ही शपथ दिलाता है, अतः कथन 1 भी सही हो सकता है, परंतु यदि हम मानक दृष्टिकोण देखें तो उच्च न्यायालयों के संबंध में अधिकृत अध्ययन सामग्री के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर विजिट करें।
Share:

Related Questions

भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य विधानमंडल (विधानसभा और विधान परिषद) की वित्तीय एवं विधायी शक्तियों तथा धन विधेयक (Money Bill) की प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 198 के अनुसार धन विधेयक केवल राज्य विधानसभा में ही पुनरस्थापित किया जा सकता है, विधान परिषद में नहीं, और जब विधानसभा द्वारा कोई धन विधेयक पारित करके विधान परिषद के पास भेजा जाता है, तो विधान परिषद को उसे अधिक से अधिक चौदह दिनों की अवधि के भीतर अपनी सिफारिशों के बिना या सिफारिशों सहित विधानसभा को वापस करना होता है। 2. यदि राज्य विधान परिषद निर्धारित चौदह दिनों की अवधि के भीतर धन विधेयक को विधानसभा को वापस नहीं करती है, या विधानसभा विधान परिषद की सभी या किसी भी सिफारिश को अस्वीकार कर देती है, तो वह धन विधेयक दोनों सदनों द्वारा उस रूप में पारित समझा जाता है जिस रूप में वह विधानसभा द्वारा पारित किया गया था, और इसके लिए दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) बुलाने का कोई प्रावधान विधानमंडल के स्तर पर नहीं है। 3. राज्य विधानसभा द्वारा पारित किसी भी साधारण विधेयक (Ordinary Bill) को विधान परिषद अधिकतम चार महीने (प्रथम बार में तीन महीने और दूसरी बार में एक महीने) तक रोक सकती है, और यदि विधान परिषद विधेयक को अस्वीकार कर देती है या ऐसा संशोधन करती है जो विधानसभा को स्वीकार्य नहीं है, तो गतिरोध को समाप्त करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 197 के तहत राज्यपाल द्वारा विधानमंडल के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक आहूत की जाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत केंद्र-राज्य विधायी और प्रशासनिक संबंधों तथा अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 263 के अंतर्गत राष्ट्रपति को यह शक्ति प्रदान की गई है कि यदि किसी समय लोकहित में यह प्रतीत होता है कि एक ऐसी परिषद् की स्थापना की जानी चाहिए जो राज्यों के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों की जाँच और सलाह दे तथा राज्यों और संघ के सामान्य हित के विषयों पर चर्चा करे, तो राष्ट्रपति ऐसी परिषद् की स्थापना कर सकता है। 2. अंतर-राज्यीय परिषद् एक स्थायी संवैधानिक निकाय (Permanent Constitutional Body) है जिसका उल्लेख मूल संविधान में स्पष्ट रूप से किया गया था, और इसकी स्थापना वर्ष 1950 में संविधान लागू होने के तुरंत बाद कर दी गई थी। 3. सरकारी आयोग (Sarkaria Commission) की संस्तुति के आधार पर वर्ष 1990 में राष्ट्रपति के आदेश द्वारा 'अंतर-राज्यीय परिषद्' का पहली बार औपचारिक रूप से गठन किया गया था, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है और इसके सदस्यों में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री तथा संघ राज्य क्षेत्रों के प्रशासक या मुख्यमंत्री शामिल होते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान सभा के गठन और उसकी निर्माण प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत प्रणाली द्वारा किया गया था, तथा इसमें ब्रिटिश प्रांतों के साथ-साथ देशी रियासतों को भी प्रतिनिधित्व दिया गया था जहाँ रियासतों के प्रतिनिधियों को संबंधित शासकों द्वारा मनोनीत किया जाना था। 2. संविधान सभा द्वारा संविधान के प्रारूप पर विचार करने और उसे अंतिम रूप देने के लिए कुल 22 मुख्य समितियों का गठन किया गया था, जिनमें कार्य संचालन समिति के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद तथा प्रांतीय संविधान समिति के अध्यक्ष सरदार वल्लभभाई पटेल थे। 3. संविधान सभा की अंतिम बैठक 24 जनवरी 1950 को आयोजित की गई थी, और उसी दिन संविधान सभा ने औपचारिक रूप से भंग होकर भारत की 'अंतरिम संसद' (Provisional Parliament) के रूप में तब तक कार्य जारी रखा जब तक कि वर्ष 1951-52 के आम चुनावों के पश्चात भारत की पहली निर्वाचित संसद का गठन नहीं हो गया। भारत के निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और चुनाव सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के निर्वाचनों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति रखता है, और मूल संविधान में यह एक बहु-सदस्यीय निकाय के रूप में स्थापित किया गया था जिसे बाद में 1989 में एकल-सदस्यीय बना दिया गया। 2. दिनेश गोस्वामी समिति (1990) ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों के लिए सरकारी वित्तपोषण (State Funding) की संस्तुति की थी, तथा यह भी सुझाव दिया था कि किसी भी उम्मीदवार को एक साथ दो से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। 3. जनप्रतिनिधि अधिनियम, 1951 की धारा 77 के तहत राजनीतिक दलों द्वारा अपने स्टार प्रचारकों के आवागमन और प्रचार पर किए जाने वाले व्यय को संबंधित उम्मीदवार के चुनाव खर्च की सीमा में शामिल नहीं किया जाता है, बशर्ते स्टार प्रचारक की सूची चुनाव आयोग और मुख्य निर्वाचन अधिकारी को निर्धारित समयावधि के भीतर सौंपी गई हो। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारत के महान्यायवादी (Attorney General for India) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संवैधानिक पदों और उनकी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है, किंतु महान्यायवादी को वही पारिश्रमिक प्राप्त होता है जो भारत के उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को मिलता है, जिसे संविधान में ही निश्चित किया गया है। 2. अनुच्छेद 148 के अंतर्गत नियुक्त भारत का नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) अपने पद से हटने के पश्चात भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य कार्यालय में आगे किसी पद का पात्र नहीं होता है। 3. महान्यायवादी को संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठकों में बोलने और भाग लेने का अधिकार प्राप्त है, किंतु उसे किसी भी स्थिति में मतदान का अधिकार (Right to Vote) प्राप्त नहीं होता है, जबकि CAG अपनी रिपोर्ट सीधे संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.