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Indian Polity
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भारतीय संसद की विधाई प्रक्रिया और लोकसभा व राज्यसभा के अंतःसंबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 109 के अनुसार धन विधेयक (Money Bill) केवल लोकसभा में ही पुनर्स्थापित किया जा सकता है और राज्यसभा इसे न तो अस्वीکار कर सकती है और न ही इसमें संशोधन कर सकती है, किंतु राज्यसभा को इस विधेयक पर अपनी सिफारिशें देने के लिए अधिकतम 30 दिन की समय-सीमा दी गई है।
  2. 2. अनुच्छेद 108 के अंतर्गत राष्ट्रपति को दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) आहूत करने की शक्ति प्राप्त है, और यह प्रावधान साधारण विधेयकों तथा वित्तीय विधेयकों (श्रेणी-I) दोनों पर लागू होता है, किंतु संविधान संशोधन विधेयकों या धन विधेयकों के मामले में संयुक्त बैठक बुलाने का कोई प्रावधान नहीं है।
  3. 3. जब लोकसभा द्वारा पारित कोई साधारण विधेयक राज्यसभा में भेजा जाता है और राज्यसभा द्वारा उसमें संशोधन किए बिना उसे वापस कर दिया जाता है या राज्यसभा उस पर कोई कार्रवाई नहीं करती, तो उस विधेयक के संबंध में राष्ट्रपति द्वारा संयुक्त बैठक आहूत करने की शक्ति का प्रयोग तभी किया जा सकता है जब राज्यसभा में विधेयक प्राप्ति की तारीख से छह मास की अवधि व्यतीत हो चुकी हो।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 109 के अनुसार राज्यसभा को धन विधेयक पर अपनी सिफारिशें भेजने के लिए अधिकतम 14 दिन की समय-सीमा दी गई है, न कि 30 दिन। यदि राज्यसभा 14 दिनों के भीतर विधेयक वापस नहीं करती है, तो उसे दोनों सदनों द्वारा उस रूप में पारित मान लिया जाता है जिस रूप में वह लोकसभा द्वारा पारित किया गया था। कथन 2 सत्य है क्योंकि अनुच्छेद 108 के तहत संयुक्त बैठक का प्रावधान केवल साधारण विधेयकों और वित्तीय विधेयकों (अनुच्छेद 117 के खंड 1 के अधीन) के लिए है। संविधान संशोधन विधेयक (अनुच्छेद 368) और धन विधेयक (अनुच्छेद 110) के संबंध में संयुक्त बैठक नहीं बुलाई जा सकती। कथन 3 असत्य है क्योंकि छह मास की गणना उस स्थिति में की जाती है जब राज्यसभा द्वारा विधेयक को अस्वीकार कर दिया जाए, या राज्यसभा द्वारा सुझाए गए संशोधनों से लोकसभा असहमत हो, या राज्यसभा द्वारा विधेयक प्राप्ति की तारीख से छह मास तक कोई कार्रवाई न की गई हो; किंतु यदि राज्यसभा ने बिना संशोधन के विधेयक पारित कर दिया है, तो गतिरोध का प्रश्न ही उत्पन्न नहीं होता और संयुक्त बैठक की आवश्यकता नहीं होती। भारतीय संसद की कार्यप्रणाली के विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जा सकते हैं।
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