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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग IV में अंतर्विष्ट राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) और उनके कार्यान्वयन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 39A के अंतर्गत 'समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता' का प्रावधान मूल संविधान में नहीं था, बल्कि इसे 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़ा गया था, और यह निर्देशक तत्व प्रकृति से गैर-न्यायोचित होने के बावजूद संसद को इसके क्रियान्वयन के लिए गरीबों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करने हेतु 'विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987' जैसे कानून बनाने की संवैधानिक शक्ति प्रदान करता है।
- 2. संविधान के अनुच्छेद 40 के तहत राज्य ग्राम पंचायतों के संगठन के लिए कदम उठाएगा और उन्हें ऐसी शक्तियाँ प्रदान करेगा जो उन्हें स्वशासन की इकाइयों के रूप में कार्य करने योग्य बनाने के लिए आवश्यक हों, तथा 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा इस नीति निर्देशक सिद्धांत को एक संवैधानिक और अनिवार्य संस्थागत स्वरूप प्रदान किया गया।
- 3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'मिनर्वा मिल्स वाद (1980)' में यह निर्धारित किया गया कि भाग III (मौलिक अधिकार) और भाग IV (नीति निर्देशक तत्व) एक-दूसरे के विरोधी हैं, और यदि किसी सामाजिक-आर्थिक कल्याणकारी कानून को लागू करने के लिए नीति निर्देशक तत्वों को प्राथमिकता दी जाती है, तो मौलिक अधिकारों का पूर्णतः अतिक्रमण किया जा सकता है, क्योंकि DPSP का स्थान संविधान में मौलिक अधिकारों से सर्वोपरि है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 39A को 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़ा गया था, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक या अन्य असमर्थता के कारण कोई भी नागरिक न्याय से वंचित न रहे। इसे प्रभावी बनाने के लिए संसद ने 'विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987' पारित किया। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 40 गांधीवादी विचारधारा पर आधारित नीति निर्देशक तत्व है, जिसे 73वें संविधान संशोधन द्वारा पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा देकर धरातल पर उतारा गया। कथन 3 गलत है: 'मिनर्वा मिल्स वाद (1980)' में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि मौलिक अधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों के बीच संतुलन संविधान की 'मूल संरचना' (Basic Structure) का एक अनिवार्य हिस्सा है। न्यायालय ने कहा कि DPSP और मौलिक अधिकार एक-दूसरे के पूरक हैं, और कोई भी एक दूसरे को पूरी तरह से प्रतिस्थापित नहीं कर सकता। विस्तृत अध्ययन के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल देखें।
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संविधान का कौन सा अनुच्छेद 'अस्पृश्यता का उन्मूलन' करता है?
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) और उसकी विधिक प्रकृति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की प्रस्तावना इस बात का स्पष्ट उल्लेख करती है कि यह संविधान भारत के लोगों द्वारा अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित किया गया है, जो इसकी संप्रभुता के स्रोत को जनता में निहित बताता है।
2. ऐतिहासिक 'बेरूबारी यूनियन मामले' (1960) में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न हिस्सा (Integral Part) है और संसद इसमें अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन कर सकती है।
3. 'केशवानंद भारती मामले' (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने पूर्ववर्ती निर्णय को पलटते हुए यह स्पष्ट किया कि प्रस्तावना संविधान का भाग है, किंतु इसके मूल ढांचा (Basic Structure) को प्रभावित किए बिना इसमें संशोधन किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संविधान के भाग 17 में क्या है?
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राष्ट्रपति पद के लिए न्यूनतम आयु सीमा क्या है?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राष्ट्रपति की विधायी शक्तियों, अध्यादेश निर्माण तथा प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद के अंतर्संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 123 के अधीन राष्ट्रपति की अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति संसद की विधि बनाने की शक्ति के सह-विस्तृत (Co-extensive) है, जिसका तात्पर्य यह है कि राष्ट्रपति उन सभी विषयों पर अध्यादेश जारी कर सकता है जिन पर संसद कानून बना सकती है, और इसके द्वारा संविधान के किसी भी प्रावधान (मौलिक अधिकारों सहित) में संशोधन किया जा सकता है।
2. मंत्रिपरिषद के सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत (अनुच्छेद 75(3)) के अनुसार, प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद संसद के निचले सदन यानी लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है, जिसका अर्थ है कि यदि लोकसभा में किसी एक कैबिनेट मंत्री के विरुद्ध भी अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो संपूर्ण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है।
3. अनुच्छेद 78 के प्रावधानों के तहत प्रधानमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन और विधान संबंधी प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राष्ट्रपति को संसूचित करे, और यदि राष्ट्रपति ऐसी कोई सूचना माँगता है, तो उसे उपलब्ध कराए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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