BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
17 views

गुप्त साम्राज्य और मौर्योत्तर काल के दौरान प्रशासनिक शब्दावलियों, भूमि व्यवस्था और आर्थिक संरचना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. गुप्त काल में 'निवीधर्माक्षय' (Nividharma akshaya) एक ऐसी स्थायी भूमि-अनुदान व्यवस्था थी जिसमें प्राप्तकर्ता को भूमि को बेचने या दान देने का अधिकार तो होता था, किंतु वह सम्राट की अनुमति के बिना उस भूमि से कर एकत्र नहीं कर सकता था।
  2. 2. मौर्योत्तर काल में सातवाहन शासकों द्वारा शुरू की गई भूमि अनुदान प्रथा का मुख्य उद्देश्य बौद्ध संघों और ब्राह्मणों को धार्मिक पुण्य अर्जित करने के लिए भूमि दान देना था, जिसने आगे चलकर सामंती प्रवृत्तियों (Feudalism) के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  3. 3. गुप्त प्रशासनिक व्यवस्था में 'अग्रहार' भूमि वह कर-मुक्त भूमि होती थी जो सामान्यतः विद्वान ब्राह्मणों को दान दी जाती थी, और इस पर राज्य द्वारा किसी भी प्रकार का भू-राजस्व नहीं वसूला जाता था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि 'निवीधर्माक्षय' (Nividharma) एक ऐसी स्थायी बंदोबस्त या अक्षय निधि अनुदान व्यवस्था थी जिसके तहत प्राप्तकर्ता को उस भूमि पर स्थायी रूप से अधिकार मिल जाता था, किंतु उसे भूमि को बेचने या अन्यत्र हस्तांतरित करने का असीमित अधिकार नहीं होता था। यह राजवंशों के अभिलेखों में वर्णित भूमि-अनुदान के विभिन्न प्रकारों में से एक है। कथन 2 सही है; सातवाहन काल में भूमि अनुदान की प्रथा बड़े पैमाने पर शुरू हुई थी, जिससे धार्मिक संस्थाओं और ब्राह्मणों का प्रभाव बढ़ा और यह भारतीय सामंतवाद के उदय का एक प्रमुख आधार बना। कथन 3 सही है; 'अग्रहार' भूमि कर-मुक्त होती थी जिसका प्रबंधन ब्राह्मणों द्वारा किया जाता था और उन्हें इससे होने वाली आय पर कर छूट प्राप्त थी। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:

Related Questions

→ प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में सोलह महाजनपदों और मगध साम्राज्य के उदय की प्रक्रिया के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अंगुत्तर निकाय और जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में सोलह महाजनपदों की सूची मिलती है, जिनमें से अधिकांश महाजनपद उत्तर भारत के गंगा के मैदान और उसके सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित थे और इनमें वज्जी तथा मल्ल जैसे महाजनपद गणतंत्रात्मक व्यवस्था (गण/संघ) के अंतर्गत आते थे। 2. मगध साम्राज्य के उत्कर्ष का मुख्य भौगोलिक कारण इसकी राजधानी राजगीर (गिरिव्रज) का पाँच पहाड़ियों से घिरा होना और इसकी सामरिक स्थिति थी, तथा बाद में पाटलिपुत्र को राजधानी बनाए जाने से यह गंगा और सोन जैसी प्रमुख नदियों के जलमार्गों के माध्यम से व्यापारिक और सैन्य नियंत्रण में अत्यधिक सुदृढ़ हो गया। 3. हर्यंक वंश के शासक बिम्बिसार ने अपने साम्राज्य विस्तार के लिए वैवाहिक संबंधों की नीति अपनाई, और कौशल, मल्ल तथा लिच्छवि राजवंशों की राजकुमारियों से विवाह कर अपनी स्थिति मजबूत की, तथा अवध के राजा प्रद्योत के बीमार पड़ने पर अपने राजवैद्य जीवक को उनकी सेवा में भेजा था। 4. शिशुनाग वंश के संस्थापक शिशुनाग ने प्रतापी शासक के रूप में अवध साम्राज्य को पूरी तरह मगध में मिला लिया और अपनी विजयों के क्रम में वत्स तथा कौशल को भी मगध साम्राज्य का अभिन्न अंग बना दिया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान दिल्ली में विद्रोही सिपाहियों के प्रवेश और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मेरठ के विद्रोही सिपाहियों के 11 मई 1857 को दिल्ली पहुँचने पर वृद्ध मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर ने स्वेच्छा से तुरंत इस विद्रोह का राजनीतिक नेतृत्व स्वीकार कर लिया था, यद्यपि वे व्यक्तिगत रूप से इस कदम के संभावित परिणामों को लेकर अत्यधिक आश्वस्त और प्रसन्न थे। 2. दिल्ली में विद्रोह की वास्तविक प्रशासनिक और सैन्य कमान जनरल बख्त खान के नेतृत्व में गठित एक 'कोर्ट ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन' (प्रशासनिक न्यायालय) के हाथों में थी, जिसमें सैन्य और नागरिक मामलों के निर्णय बहुमत से लिए जाते थे। 3. दिल्ली की पुनर्प्राप्ति के लिए ब्रिटिश सेना का नेतृत्व करने वाले जॉन निकलसन कश्मीरी गेट पर हुए संघर्ष के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए थे और अंततः उनकी मृत्यु हो गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → औरंगजेब ने इस्लामी कानूनों को संकलित करने के लिए किस प्रसिद्ध ग्रंथ की रचना करवाई थी? → 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में स्थापित 'प्रार्थना समाज' और 'आर्य समाज' के वैचारिक दृष्टिकोण, सामाजिक सुधार एजेंडे तथा धार्मिक सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्रार्थना समाज की स्थापना वर्ष 1867 में केशव चंद्र सेन की प्रेरणा से बंबई में आत्माराम पांडुरंग द्वारा की गई थी, जिसका मुख्य ध्यान अंतर-जाति विवाह, अंतर-जाति भोज, विधवा पुनर्विवाह और दलित जातियों के उत्थान जैसे सामाजिक सुधारों पर था। 2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद, अवतारवाद और जन्म आधारित जाति व्यवस्था का पुरजोर खंडन किया तथा 'वेदों की ओर लौटो' का नारा देते हुए वेदों की अचूकता और सर्वोच्चता को स्थापित किया। 3. प्रार्थना समाज के प्रमुख नेता और न्यायविद् महादेव गोविंद रानाडे ने समाज सुधार कार्यों को गति देने के लिए 'डेक्कन एजुकेशन सोसायटी' की स्थापना की, जबकि आर्य समाज ने पाश्चात्य शिक्षा प्रणाली का पूर्ण बहिष्कार करते हुए केवल गुरुकुल पद्धति पर आधारित शिक्षा को ही एकमात्र विकल्प माना। 4. आर्य समाज ने हिंदू समाज से अलग हुए या इस्लाम व ईसाई धर्म अपना चुके व्यक्तियों की पुनः हिन्दू धर्म में वापसी के लिए 'शुद्धि आंदोलन' की शुरुआत की थी, जिसे प्रार्थना समाज के सदस्यों का भी वैचारिक समर्थन प्राप्त था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → बौद्ध धर्म और जैन धर्म के दार्शनिक संप्रदायों, संघ व्यवस्था तथा उनके ऐतिहासिक विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बौद्ध धर्म के 'प्रतीत्यसमुत्पाद' (प्रतीतसमुत्पाद) का सिद्धांत यह प्रतिपादित करता है कि प्रत्येक घटना या वस्तु किसी कारण और प्रत्यय से उत्पन्न होती है (इदं प्रत्ययता), जबकि जैन धर्म का 'स्याद्वाद' या 'सप्तभंगीनय' यह मानता है कि ज्ञान सापेक्ष होता है और किसी भी वस्तु के बारे में एक साथ अंतिम सत्य नहीं कहा जा सकता। 2. बौद्ध संघ में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु सीमा 15 वर्ष निर्धारित की गई थी, जबकि चोर, हत्यारे, ऋणी, और दास (यदि वे अपने स्वामी से अनुज्ञा प्राप्त न कर सकें) को संघ में प्रवेश की अनुमति नहीं थी। 3. जैन धर्म के श्वेतांबर संप्रदाय के अनुसार वस्त्र का त्याग करना अनिवार्य नहीं है, तथा उनके ग्रंथों में बारह अंगों और बारह उपांगों का संकलन मिलता है, जबकि दिगंबर संप्रदाय के अनुयायी पूर्ण मुक्ति के लिए वस्त्र त्याग को आवश्यक मानते हैं और उनका दावा है कि मूल चौदह पूर्व ग्रंथ लुप्त हो चुके हैं। 4. महात्मा बुद्ध ने अपने जीवनकाल में ही देवदत्त के कहने पर बौद्ध संघ का पूर्ण नियंत्रण उसे सौंप दिया था और संघ में महिलाओं के प्रवेश के लिए उन्होंने बिना किसी संकोच के प्रथम प्रयास में ही अपनी माता महाप्रजापति गौतमी को वैशाली में अनुमति दे दी थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.