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History of India
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प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में वर्धन राजवंश एवं दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) की प्रशासनिक और सांस्कृतिक विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. पल्लव शासक नरसिंहवर्मन प्रथम (महामल्ल) के शासनकाल में महाबलीपुरम में प्रसिद्ध 'पंच रथ' मंदिरों का निर्माण किया गया था, जो एकात्म (Monolithic) वास्तुकला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
- 2. बादामी के चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, और इस विजय का विस्तृत उल्लेख एहोल (Aihole) प्रशस्ति में मिलता है, जिसकी रचना रवि कीर्ति ने की थी।
- 3. चोल प्रशासन की सबसे बड़ी विशेषता उनकी स्थानीय स्वशासन प्रणाली थी, जिसके अंतर्गत 'उर' (साधारण ग्राम सभा), 'सभा' या 'महासभा' (अग्रहार गाँवों की सभा) और 'नगरम' (व्यापारियों की बस्ती) जैसी संस्थाएं स्वायत्त रूप से कार्य करती थीं, और इसका सबसे प्रामाणिक विवरण उत्तरमेरूर (Uttiramerur) शिलालेखों से प्राप्त होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं। पल्लव नरेश नरसिंहवर्मन प्रथम ने महाबलीपुरम (मामलपुरम) में एकाश्म (monolithic) 'रथ मंदिरों' का निर्माण करवाया था। पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्द्धन को परास्त किया था और इसकी जानकारी रवि कीर्ति रचित एहोल अभिलेख से मिलती है। चोल राजवंश अपने सुव्यवस्थित स्थानीय स्वशासन और ग्राम पंचायतों के लिए प्रसिद्ध था, जिसकी जानकारी विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार उत्तरमेरूर के शिलालेखों से मिलती है।
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भारतीय स्वतंत्रता और देश के विभाजन के संदर्भ में माउंटबेटन योजना (3 जून 1947 की योजना) के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस योजना के अंतर्गत पंजाब और बंगाल की प्रांतीय विधानसभाओं की बैठक बुलाई गई, जिसमें इन दोनों प्रांतों के हिंदू और मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के सदस्यों ने अलग-अलग बैठक कर प्रांत के विभाजन के पक्ष या विपक्ष में मतदान किया।
2. उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (NWFP) और असम के सिलहट जिले में भारत या पाकिस्तान में से किसी एक के चयन के लिए जनमत संग्रह (Referendum) कराया गया था, जिसमें NWFP के लोगों ने भारी बहुमत से भारत में शामिल होने का निर्णय लिया।
3. रियासतों (Princely States) को यह स्पष्ट स्वतंत्रता दी गई कि वे अपनी भौगोलिक स्थिति और जनसांख्यिकीय इच्छा के अनुसार या तो भारत डोमिनियन या पाकिस्तान डोमिनियन में शामिल हो सकते हैं अथवा अपनी स्वतंत्र संप्रभुता बनाए रख सकते हैं।
4. भारत और पाकिस्तान के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के निर्धारण और सीमा-विवादों को सुलझाने के लिए सर रेडक्लिफ की अध्यक्षता में दो अलग-अलग 'सीमा आयोगों' (Boundary Commissions) का गठन किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों — स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी — के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल, बिहार और उड़ीसा में वर्ष 1793 में लॉर्ड कॉर्नवालिस द्वारा लागू किए गए 'स्थाई बंदोबस्त' (Permanent Settlement) के तहत जमींदारों को भूमि का स्थाई स्वामी बना दिया गया और राज्य का हिस्सा हमेशा के लिए निश्चित कर दिया गया, जिससे किसानों की स्थिति मात्र किराएदार या बटाईदार जैसी बनकर रह गई।
2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा मुख्य रूप से मद्रास तथा बंबई प्रेसीडेंसी के कुछ हिस्सों में लागू की गई 'रयतवारी व्यवस्था' (Ryotwari System) में सरकार और किसान (रयत) के बीच सीधा समझौता होता था, जिसमें बीच के किसी बिचौलिए को मान्यता नहीं दी गई थी और किसानों को भूमि का मालिकाना हक प्रदान किया गया था।
3. उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के कुछ क्षेत्रों में लागू की गई 'महालवारी व्यवस्था' (Mahalwari System) के अंतर्गत भू-राजस्व के निर्धारण की इकाई व्यक्तिगत किसान को न बनाकर पूरे गाँव या 'महाल' (गाँव का समूह) को बनाया गया था, जिसमें संपूर्ण ग्राम समुदाय सामूहिक रूप से राजस्व भुगतान के लिए उत्तरदायी होता था।
4. इन तीनों भू-राजस्व प्रणालियों की एक प्रमुख विशेषता यह थी कि ब्रिटिश सरकार ने कृषि के निरंतर विकास को सुनिश्चित करने के लिए हमेशा कर की दरों को अत्यंत न्यूनतम रखा और कभी भी अत्यधिक उच्च राजस्व दरों का निर्धारण नहीं किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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