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History of India
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में विद्रोह के संचालन और ब्रिटिश सेना द्वारा उनके दमन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. फैजाबाद में मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने विद्रोह का नेतृत्व किया था, जिन्हें उनकी उत्कृष्ट सैन्य रणनीतियों के कारण अंग्रेजों द्वारा 'डंका शाह' भी कहा गया, तथा पुवायाँ के राजा की गद्दारी के कारण वे अंग्रेजों के विरुद्ध मुठभेड़ में वीरगति को प्राप्त हुए।
  2. 2. बरेली में रोहिल्ला सेना का नेतृत्व करने वाले खान बहादुर खान ने ब्रिटिश शासन के पतन के बाद अपनी स्वतंत्र सरकार गठित की थी, जिसे मार्च 1858 में सर कॉलिन कैंपबेल के नेतृत्व वाली ब्रिटिश सेना ने पूरी तरह से कुचल दिया।
  3. 3. इलाहाबाद (प्रयागराज) में मौलवी लियाकत अली ने विद्रोह की कमान संभाली थी, और इस महत्वपूर्ण सामरिक केंद्र पर पुनः नियंत्रण प्राप्त करने के लिए ब्रिटिश अधिकारी कर्नल जेम्स नील ने अत्यधिक क्रूरता और दमनकारी नीतियों का सहारा लिया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद में मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने अंग्रेजों के विरुद्ध कड़ा संघर्ष किया, जिन्हें 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता था। बरेली में खान बहादुर खान ने शासन की बागडोर संभाली थी, जिन्हें मार्च 1858 में सर कॉलिन कैंपबेल ने पराजित किया। वहीं, इलाहाबाद में मौलवी लियाकत अली ने नेतृत्व किया, जिसे कर्नल जेम्स नील ने क्रूरता से दबाया। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में, सत्यशोधक समाज और प्रार्थना समाज के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ज्योतिराव फुले द्वारा स्थापित 'सत्यशोधक समाज' (1873) का मुख्य उद्देश्य शूद्रों और अतिशूद्रों को बौद्धिक रूप से जाग्रत करना तथा ब्राह्मणवादी वर्चस्व एवं धार्मिक कर्मकांडों के पाखंड से उन्हें मुक्त कराना था। 2. आत्माराम पांडुरंग द्वारा वर्ष 1867 में स्थापित 'प्रार्थना समाज' ने महाराष्ट्र में धार्मिक सुधारों के साथ-साथ विधवा पुनर्विवाह, अंतर्जातीय विवाह, स्त्री शिक्षा और दलितोद्धार जैसे सामाजिक सुधारों पर विशेष बल दिया, किंतु इसकी विचारधारा आक्रामक रूप से रूढ़िवादी हिंदू धर्म के पूर्ण त्याग पर आधारित थी। 3. सत्यशोधक समाज ने अपनी वैचारिक स्थिति को स्पष्ट करने के लिए 'गुलामगिरी' जैसी कृतियों की रचना की, जिसमें अमेरिकी दास प्रथा के संदर्भ का उपयोग करते हुए भारतीय समाज में प्रचलित जातिगत उत्पीड़न की कड़ी आलोचना की गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित 'भारत सरकार अधिनियम 1858' और 1 नवंबर 1858 को इलाहाबाद दरबार में पढ़ी गई 'क्वीन विक्टोरिया की घोषणा' के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस अधिनियम के तहत 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' की दोहरी शासन प्रणाली को समाप्त कर दिया गया तथा भारत के प्रशासन का पूर्ण नियंत्रण 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) को सौंप दिया गया, जिसकी सहायता के लिए 15 सदस्यीय भारतीय परिषद का गठन किया गया। 2. क्वीन विक्टोरिया की घोषणा में ब्रिटिश सरकार द्वारा यह स्पष्ट प्रतिज्ञा की गई कि भविष्य में भारत में किसी भी नए भू-भाग का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय (Annexation) नहीं किया जाएगा तथा भारतीय राजाओं के 'दत्तक पुत्र' लेने के अधिकार को आधिकारिक मान्यता दी गई। 3. घोषणा में यह भी आश्वासन दिया गया कि भारतीय प्रजा की धार्मिक और सामाजिक परंपराओं में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा, तथा नस्ल, जाति या धर्म के भेदभाव के बिना योग्यता के आधार पर सभी नागरिकों को बिना किसी अपवाद के उच्च प्रशासनिक पदों पर नियुक्त किया जाएगा। 4. विद्रोह की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए 'पील आयोग' (Peel Commission) की सिफारिशों पर सेना का पुनर्गठन किया गया, जिसके तहत तोपखाने जैसे संवेदनशील और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण विभागों पर पूरी तरह से यूरोपीय सैनिकों का नियंत्रण स्थापित किया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मध्यकालीन भारत के सूफी आंदोलनों और उनकी विभिन्न विचारधाराओं एवं सिलसिलों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. चिश्ती सिलसिले के संतों ने राज्य के राजनीतिक मामलों और राजकीय संरक्षण (पैट्रोनटेज) से पूरी तरह दूरी बनाए रखी, तथा शेख निजामुद्दीन औलिया ने स्पष्ट रूप से सुल्तानों के दरबार में जाने से इंकार करते हुए 'मेरे घर के दो दरवाजे हैं, यदि सुल्तान एक से प्रवेश करेगा तो मैं दूसरे से बाहर चला जाऊंगा' की नीति अपनाई। 2. सुहरावर्दी सिलसिले के संतों ने चिश्ती संतों के विपरीत राजकीय सहायता, जागीरों और बड़े पदों को स्वीकार करने में कोई परहेज नहीं किया, तथा इस सिलसिले का मुख्य कार्यक्षेत्र सिंध और मुल्तान का क्षेत्र था। 3. कादिरिया सिलसिले के संस्थापक अब्दुल कादिर जिलानी थे, और भारत में इस सिलसिले के प्रसार का श्रेय शाह नियाज और मियाँ मीर को जाता है, जिन्होंने मुगल राजकुमार दारा शिकोह को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान किया था। 4. नक्सबंदी सिलसिले की स्थापना ख्वाजा बाकी بالله ने भारत में की थी, और इस सिलसिले के सबसे प्रसिद्ध संत शेख अहमद सरहिंदी (मुजद्दिद-अलिसानी) ने अकबर की धार्मिक सहिष्णुता और 'दीन-ए-इलाही' नीति की कड़ी आलोचना करते हुए रूढ़िवादी इस्लाम के पुनरुत्थान पर जोर दिया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? सत्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना, भारत में उसकी प्राथमिक बस्तियों के विकास तथा ब्रिटिश-फ्रांसीसी प्रतिद्वंद्विता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी ('कंपagnie des Indes Orientales') की स्थापना वर्ष 1664 में लुई चौदहवें के शासनकाल में मंत्री कोल्बर्ट के प्रयासों से हुई थी, और फ्रांसीसियों ने भारत में अपना पहला कारखाना वर्ष 1668 में फ्रेंको कैरो के निर्देशन में सूरत में स्थापित किया था। 2. वर्ष 1673 में बंगाल के सूबेदार शाइस्ता खान ने फ्रांसीसियों को चंदननगर (Chandernagore) में एक कोठी स्थापित करने की अनुमति दी, जो बाद में बंगाल में फ्रांसीसी व्यापार का प्रमुख केंद्र बन गया। 3. दक्षिण भारत में फ्रांसीसियों ने वर्ष 1674 में वलिकोण्डापुरम के सूबेदार शेर खान लोदी से एक गाँव प्राप्त कर पांडिचेरी (Pondicherry) की नींव रखी, जिसे फ्रेंको मार्टिन ने एक सुदृढ़ व्यापारिक एवं प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित किया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? तालिकोटा के युद्ध में विजयनगर का नेतृत्व किसने किया था?
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