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History of India
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सत्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना, भारत में उसकी प्राथमिक बस्तियों के विकास तथा ब्रिटिश-फ्रांसीसी प्रतिद्वंद्विता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी ('कंपagnie des Indes Orientales') की स्थापना वर्ष 1664 में लुई चौदहवें के शासनकाल में मंत्री कोल्बर्ट के प्रयासों से हुई थी, और फ्रांसीसियों ने भारत में अपना पहला कारखाना वर्ष 1668 में फ्रेंको कैरो के निर्देशन में सूरत में स्थापित किया था।
- 2. वर्ष 1673 में बंगाल के सूबेदार शाइस्ता खान ने फ्रांसीसियों को चंदननगर (Chandernagore) में एक कोठी स्थापित करने की अनुमति दी, जो बाद में बंगाल में फ्रांसीसी व्यापार का प्रमुख केंद्र बन गया।
- 3. दक्षिण भारत में फ्रांसीसियों ने वर्ष 1674 में वलिकोण्डापुरम के सूबेदार शेर खान लोदी से एक गाँव प्राप्त कर पांडिचेरी (Pondicherry) की नींव रखी, जिसे फ्रेंको मार्टिन ने एक सुदृढ़ व्यापारिक एवं प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
सत्रहवीं शताब्दी में भारत आने वाली यूरोपीय कंपनियों में फ्रांसीसी सबसे अंतिम थे। फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना वर्ष 1664 में सम्राट लुई चौदहवें के वित्त मंत्री जीन-बैप्टिस्ट कोल्बर्ट के प्रयासों से हुई थी। फ्रेंको कैरो के नेतृत्व में फ्रांसीसियों ने 1668 में सूरत में अपना पहला कारखाना स्थापित किया। इसके बाद 1673 में गोलकुंडा के सुल्तान और बंगाल के सूबेदार शाइस्ता खान से अनुमति प्राप्त कर चंदननगर की स्थापना की गई। इसी वर्ष (1673 में) फ्रेंको मार्टिन और बेलिना ने वलिकोण्डापुरम के मुस्लिम अधिकारी शेर खान लोदी से पांडिचेरी प्राप्त किया, जिसे बाद में दक्षिण भारत में फ्रांसीसी गतिविधियों का मुख्य मुख्यालय बनाया गया। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Related Questions
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में विद्रोह को दबाने वाले ब्रिटिश अधिकारियों और उनके संबंधित क्षेत्रों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. दिल्ली - जॉन निकलसन और हडसन
2. कानपुर और लखनऊ - सर कॉलिन कैंपबेल और हेवलॉक
3. झांसी और ग्वालियर - सर ह्यूरोज
4. बिहार - विलियम टेलर और विसेंट आयर
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
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छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रशासनिक और सैन्य सुधारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी की केंद्रीय परिषद 'अष्टप्रधान' में आठ मंत्रियों को नियुक्त किया गया था, जिनमें से 'पेशवा' (मुख्य प्रधान) के पश्चात दूसरा सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद 'अमात्य' या 'मजुमदार' का होता था जो राज्य की आय-व्यय और वित्त विभाग की देखरेख करता था।
2. शिवाजी ने राजस्व सुधारों के तहत मलिक अंबर की लगन पद्धति को अपनाया था, जिसके अंतर्गत भूमि की पैमाइश के लिए 'काठी' और 'बीघा' के मानक माप को निश्चित किया गया तथा राज्य का हिस्सा कुल उपज का शुरुआत में 33% निर्धारित किया गया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 40% कर दिया गया था।
3. शिवाजी के सैन्य संगठन में घुड़सवार सेना को दो प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया था — 'पागा' (राजकीय घोड़े और शस्त्र प्राप्त सैनिक) और 'सिलहदार' (अपने स्वयं के घोड़े और शस्त्र लेकर आने वाले सैनिक), तथा सेना में अनुशासन बनाए रखने के लिए सैनिकों को नकद वेतन देने की परंपरा को प्राथमिकता दी जाती थी।
4. मराठा प्रशासन में 'पंडितराव' धार्मिक मामलों, दान-पुण्य और सामाजिक शुद्धता का प्रभारी था, जबकि 'न्यायाधीश' दीवानी और फौजदारी मामलों में न्याय का सर्वोच्च अधिकारी होता था, और इन दोनों धार्मिक व न्यायिक अधिकारियों को छोड़कर शेष सभी छह मंत्रियों को सैन्य अभियानों में भाग लेने की अनिवार्यता से मुक्त रखा गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान दिल्ली में विद्रोहियों के नेतृत्व और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मेरठ के सैनिकों द्वारा दिल्ली पहुँचने के बाद अनिच्छुक बहादुर शाह जफर को विद्रोहियों द्वारा 'शहंशाह-ए-हिंदुस्तान' घोषित किया गया, जिससे इस स्थानीय सैन्य विद्रोह को एक अखिल भारतीय राष्ट्रीय वैधानिकता प्राप्त हुई।
2. यद्यपि सम्राट बहादुर शाह जफर ने औपचारिक रूप से नेतृत्व स्वीकार कर लिया था, किंतु वृद्ध होने के कारण वास्तविक सैन्य नेतृत्व और निर्णय लेने की शक्ति 'कोर्ट ऑफ सोल्जर्स' (सैनिकों की अदालत) के हाथों में थी, जिसके प्रमुख जनरल बख्त खान थे।
3. दिल्ली पर पुन: अधिकार करने के पश्चात ब्रिटिश अधिकारी हडसन ने हुमांयू के मकबरे से बहादुर शाह जफर को गिरफ्तार किया तथा उनके दोनों पुत्रों और पोते की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी, और जफर को देश से निर्वासित कर रंगून भेज दिया गया जहाँ उनकी मृत्यु हो गई।
4. दिल्ली में विद्रोह के दमन के दौरान ब्रिटिश सेना ने केवल सैन्य विद्रोहियों को ही निशाना बनाया, जबकि दिल्ली के मुगल राजवंश के प्रति सहानुभूति रखने वाले शाही घराने के किसी भी अन्य सदस्य या नागरिकों के विरुद्ध कोई सामूहिक दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के दौरान दिल्ली में हुए घटनाक्रम और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मेरठ से आए विद्रोही सिपाहियों द्वारा दिल्ली पहुँचने के बाद मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को अनिच्छा से ही सही, इस विद्रोह का औपचारिक 'शहंशाह-ए-हिंदुस्तान' घोषित किया गया था, हालांकि वास्तविक सैन्य एवं प्रशासनिक नियंत्रण सैनिकों की 'कोर्ट ऑफ मिनिस्टर्स' के पास था।
2. दिल्ली में विद्रोहियों का नेतृत्व करने के लिए सम्राट के पुत्र बख्त खान ने मुख्य भूमिका निभाई, जिन्होंने बरेली से आई सैनिक टुकड़ी का नेतृत्व किया था और वे सम्राट की ओर से प्रशासन और सैन्य संचालन के प्रमुख बने।
3. ब्रिटिश सेना द्वारा दिल्ली पर पुनः अधिकार प्राप्त करने के बाद, जनरल जॉन निकोलसन इस घेराबंदी के दौरान मारे गए, जबकि सम्राट बहादुर शाह जफर को गिरफ्तार कर हुमायूं के मकबरे से रंगून (म्यांमार) निर्वासित कर दिया गया, जहाँ बाद में उनकी मृत्यु हो गई।
4. दिल्ली में विद्रोह के दमन के दौरान ब्रिटिश सेना ने अत्यंत संयम का परिचय दिया और कर्नल हडसन द्वारा सम्राट के पुत्रों और पोते को बिना किसी मुकदमे के गोली मारने की घटना से पूरी तरह परहेज किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना से लेकर सूरत विभाजन (1907) तक के कालखंड के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कांग्रेस के प्रारंभिक वर्षों (1885-1905) में नरम दल के नेताओं का यह दृढ़ विश्वास था कि ब्रिटिश शासन न्यायप्रिय है और वे ब्रिटिश संसद के प्रति 'राजभक्ति' रखते हुए प्रार्थना, याचिका और शिष्टमंडल (प्रार्थना और विरोध की राजनीति) के माध्यम से प्रशासनिक सुधार चाहते थे।
2. वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन के पश्चात उत्पन्न स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन के दौरान गरम दल के नेताओं (लाल-बाल-पाल और अरबिंदो घोष) ने इस आंदोलन के दायरे को केवल बंगाल तक सीमित रखने और विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार को कलकत्ता तक ही प्रतिबंधित करने का समर्थन किया था।
3. वर्ष 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में कांग्रेस ने पहली बार 'स्वराज' (Self-Government) के प्रस्ताव को अपने मुख्य लक्ष्य के रूप में स्वीकार किया, जिससे नरम और गरम दल के बीच वैचारिक तनाव कुछ समय के लिए टल गया।
4. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस के अध्यक्ष पद के निर्वाचन को लेकर नरम दल और गरम दल के बीच हुए तीव्र मतभेद के कारण पार्टी में औपचारिक विभाजन हो गया, और रासबिहारी घोष को कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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