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History of India
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बौद्ध धर्म और जैन धर्म के प्रारंभिक दार्शनिक विकास एवं संप्रदायों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. जैन धर्म के श्वेतांबर संप्रदाय के अनुयायी वस्त्र धारण करते हैं और उनका यह विश्वास है कि तीर्थंकर मल्लिनाथ एक पुरुष थे, जबकि दिगंबर संप्रदाय के अनुसार मल्लिनाथ एक स्त्री थीं और इस संप्रदाय के साधु पूर्ण नग्नता का व्रत रखते हैं।
  2. 2. बौद्ध धर्म की महायान शाखा के उदय के साथ ही बोधिसत्त्वों की संकल्पना को प्रमुखता मिली, जिसमें अवलोकितेश्वर (पद्मपाणि) को सबसे लोकप्रिय बोधिसत्त्व माना गया जिनका मुख्य कार्य संसार के दुःखों को दूर करना और करुणा का प्रसार करना है।
  3. 3. जैन धर्म में 'स्यादवाद' (अनेकांतवाद या सप्तभंगी नय) का सिद्धांत वस्तु के स्वरूप को बहुआयामी और सापेक्षिक दृष्टिकोण से समझने पर बल देता है, जो बौद्ध धर्म के 'प्रतीत्यसमुत्पाद' के सिद्धांत के समान ही कर्मात्मक कारणों की व्याख्या करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि श्वेतांबर संप्रदाय के अनुसार उन्नीसवें तीर्थंकर मल्लिनाथ एक स्त्री थीं (दिगंबर इन्हें पुरुष मानते हैं) और श्वेतांबर साधु श्वेत वस्त्र धारण करते हैं जबकि दिगंबर नग्न रहते हैं। कथन 2 सही है क्योंकि महायान बौद्ध धर्म में बोधिसत्त्वों की संकल्पना केंद्रीय है और अवलोकितेश्वर सबसे लोकप्रिय करुणामय बोधिसत्त्व माने गए हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि जैन धर्म का 'स्यादवाद' और 'अनेकांतवाद' ज्ञान की सापेक्षता का सिद्धांत है, जबकि बौद्ध धर्म का विकिपीडिया संदर्भ 'प्रतीत्यसमुत्पाद' कार्य-कारण संबंध (हेतुवाद) पर आधारित है।
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