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History of India
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के वैचारिक आधार, संस्थागत विकास तथा उनके सुधारवादी दृष्टिकोण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद, पैतृक संपत्ति में महिलाओं के अधिकारों के विरोध और सती प्रथा जैसी कुप्रथाओं का पुरजोर खंडन किया, तथा केशव चंद्र सेन के नेतृत्व में ब्रह्म समाज के प्रथम विभाजन के पश्चात साधारण ब्रह्म समाज की स्थापना हुई जो अंतर-जातीय विवाह और बाल विवाह निषेध का प्रबल समर्थक था।
  2. 2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा वर्ष 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और मूर्तिपूजा, अवतारवाद, बाल विवाह तथा जाति-प्रथा का तीव्र विरोध करते हुए 'शुद्धि आंदोलन' का प्रारंभ किया, जिसका उद्देश्य उन हिंदुओं को पुनः हिंदू धर्म में दीक्षित करना था जिन्होंने किन्हीं कारणों से अन्य धर्मों को अपना लिया था।
  3. 3. ज्योतिराव फुले द्वारा वर्ष 1873 में स्थापित 'सत्यशोधक समाज' ने ब्राह्मणवादी वर्चस्व, धार्मिक पाखंड और सामाजिक असमानता को चुनौती देते हुए शूद्रों और अति-शूद्रों के अधिकारों, शिक्षा तथा आत्म-सम्मान के लिए संघर्ष किया, और उनकी प्रसिद्ध पुस्तक 'गुलामगिरी' ने इस वैचारिक संघर्ष को एक नई दिशा दी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए तीनों कथन पूरी तरह से सत्य हैं। 19वीं शताब्दी के सुधार आंदोलनों ने भारतीय समाज को आधुनिक बनाने और रूढ़ियों को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। राजा राममोहन राय ने ब्रह्म समाज के माध्यम से समाज सुधार की नींव रखी थी। स्वामी दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज के जरिए वैदिक संस्कृति के पुनरुत्थान और सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन का बीड़ा उठाया। वहीं, ज्योतिराव फुले के सत्यशोधक समाज ने वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए ऐतिहासिक संघर्ष किया। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नरम दल (Moderate) और गरम दल (Extremist) के कालखंड तथा उनकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्रारंभिक कांग्रेस के नेताओं (जैसे दादाभाई नौरोजी और गोपाल कृष्ण गोखले) की ब्रिटिश न्यायप्रियता में अटूट आस्था थी और वे अपनी मांगों को मनवाने के लिए 'प्रार्थना, याचिका और विरोध' (Prayer, Petition and Protest) की संवैधानिक पद्धति में विश्वास रखते थे। 2. वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन के पश्चात कांग्रेस के भीतर उग्रवादी (गरम दल) विचारधारा का तीव्र विकास हुआ, जिसके प्रमुख नेताओं—लाल, बाल और पाल—ने ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार, स्वदेशी और राष्ट्रीय शिक्षा को राजनीतिक संघर्ष का मुख्य हथियार बनाया। 3. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस का विभाजन नरमपंथियों और गरमपंथियों के बीच वैचारिक व रणनीतिक मतभेदों के कारण हुआ था, तथा इस अधिवेशन में गरम दल के नेताओं ने अंग्रेजों के साथ पूर्ण असहयोग और सशस्त्र क्रांति का औपचारिक प्रस्ताव पारित करवा लिया था। 4. उग्रवादी नेताओं का यह मानना था कि स्वशासन (Home Rule) या स्वराज्य ही राजनीतिक मुक्ति का एकमात्र मार्ग है, और इसके लिए जनता की सक्रिय राजनीतिक भागीदारी और संघर्ष आवश्यक है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? अकबर ने किस वर्ष दक्षिण भारत में खानदेश (Khandesh) को मुगल साम्राज्य में मिलाया था? मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक संरचना, आर्थिक व्यवस्था और अशोक के धम्म तथा शिलालेखों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' के अनुसार मौर्य कालीन केंद्रीय प्रशासन में 'आकर अध्यक्ष' खानों (mines) का अधीक्षक था, जबकि 'पण्यध्यक्ष' वाणिज्य और बाजार का नियंत्रण करने वाला प्रमुख अधिकारी था। 2. अशोक के 'पृथक कलिंग शिलालेख' (धौली और जौगढ़) में यह घोषणा की गई है कि 'सभी प्रजा मेरी संतान के समान है', और जिस प्रकार मैं अपनी संतान के इस लोक और परलोक के कल्याण की कामना करता हूँ, उसी प्रकार सभी मनुष्यों के कल्याण की कामना करता हूँ। 3. मौर्य प्रशासन में प्रांतीय शासन के तहत 'कुमार' या 'आर्यपुत्र' उन प्रांतपतियों (Governors) को कहा जाता था जो शाही परिवार से संबंधित होते थे, जबकि निम्न प्रांतों का प्रशासन सामान्य महामात्रों द्वारा चलाया जाता था। 4. जूनागढ़ (गिरनार) अभिलेख के अनुसार चंद्रगुप्त मौर्य के गवर्नर पुष्यगुप्त वैश्य ने सौराष्ट्र क्षेत्र में सुदर्शन झील का निर्माण करवाया था, जिसका बाद में अशोक के महामात्र तुषास्प द्वारा जीर्णोद्धार कराया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-34), गोलमेज सम्मेलनों और गांधी-इरविन समझौते के ऐतिहासिक घटनाक्रम के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन (1929) में पूर्ण स्वराज्य का प्रस्ताव पारित होने के पश्चात महात्मा गांधी ने 31 जनवरी 1930 को वायसराय लॉर्ड इरविन के समक्ष अपनी प्रसिद्ध '11 सूत्री मांगें' रखीं, जिनमें नमक कर की समाप्ति, लग्जूरियस विदेशी कपड़ों पर भारी शुल्क और राजनीतिक बंदियों की रिहाई प्रमुख थीं। 2. दांडी मार्च (12 मार्च 1930 से 6 अप्रैल 1930) के उपरांत सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत हुई, जिसके दौरान उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत में खान अब्दुल गफ्फार खान के नेतृत्व में 'खुदाई खिदमतगार' (लाल कुर्ती दल) संगठन ने इस आंदोलन को अहिंसक तरीके से आगे बढ़ाया। 3. प्रथम गोलमेज सम्मेलन (नवंबर 1930 - जनवरी 1931) में कांग्रेस ने आधिकारिक रूप से भाग लिया था, जिसके परिणामस्वरुप महात्मा गांधी और लॉर्ड इरविन के बीच 5 मार्च 1931 को एक समझौता हुआ, जिसे 'दिल्ली समझौता' या गांधी-इरविन पैक्ट कहा गया। 4. कराची कांग्रेस अधिवेशन (मार्च 1931) में गांधी-इरविन समझौते का अनुमोदन किया गया और इसी अधिवेशन में पहली बार कांग्रेस ने 'मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम' से संबंधित प्रस्ताव को स्वीकार किया, जिसकी अध्यक्षता सरदार वल्लभभाई पटेल ने की थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? चंपारण सत्याग्रह (1917) और खेड़ा सत्याग्रह (1918) के ऐतिहासिक संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान यूरोपीय बागान मालिकों द्वारा किसानों पर 'तीनकथा पद्धति' के तहत अपनी भूमि के 3/20वें हिस्से पर नील की अनिवार्य खेती करने का दबाव डाला जा रहा था, और इस समस्या के अध्ययन के लिए गठित आधिकारिक जाँच समिति में महात्मा गांधी को भी एक सदस्य के रूप में शामिल किया गया था। 2. राजकुमार शुक्ल के विशेष अनुरोध पर गांधीजी चंपारण गए थे, जहाँ उनके साथ जे.बी. कृपलानी, राजेंद्र प्रसाद, ब्रजकिशोर प्रसाद और महादेव देसाई जैसे दिग्गज नेताओं ने भी इस आंदोलन में सक्रिय सहयोग प्रदान किया था। 3. वर्ष 1918 के खेड़ा सत्याग्रह के दौरान गुजरात में फसल बर्बाद होने के बावजूद ब्रिटिश प्रशासन द्वारा राजस्व वसूली माफ न किए जाने पर गांधीजी ने किसानों से लगान अदायगी रोकने का आह्वान किया, और इस आंदोलन में सरदार वल्लभभाई पटेल ने गांधीजी के मुख्य अनुयायी के रूप में एक युवा और समर्पित नेता के रूप में अपनी राजनीतिक शुरुआत की थी। 4. चंपारण सत्याग्रह भारत में महात्मा गांधी का पहला सफल सविनय अवज्ञा प्रयोग था, जबकि खेड़ा सत्याग्रह उनका पहला वास्तविक भूख हड़ताल (Hunger strike) आंदोलन था, जिसे उन्होंने मिल मजदूरों के समर्थन में आयोजित किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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