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History of India
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मौर्य साम्राज्य के आर्थिक जीवन, राजस्व प्रशासन और मुद्रा प्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. मौर्य काल में राज्य की आय का प्रमुख स्रोत कृषि कर (भाग) था, जो कुल उपज का छठा भाग (1/6) से लेकर एक-चौथाई (1/4) तक वसूला जाता था, तथा इसके अतिरिक्त सिंचाई कर (उदक-भाग) भी लिया जाता था।
  2. 2. मौर्य अर्थव्यवस्था में आहत या पंचमार्क (Punch-marked) सिक्के सबसे प्रमुख विनिमय के साधन थे, जिन पर विभिन्न प्रकार के प्रतीक चिह्न (जैसे सूर्य, चंद्रमा, पेड़ और पशु) बने होते थे, और सोने के सिक्कों को 'निष्क' या 'सुवर्ण' कहा जाता था।
  3. 3. राज्य द्वारा व्यापार और शिल्प पर कड़ा नियंत्रण रखा जाता था, जिसके लिए 'अध्यक्ष' नामक अधिकारियों की नियुक्ति की जाती थी; उदाहरण के लिए, 'पण्यध्यक्ष' वाणिज्य का अध्यक्ष होता था, जबकि 'लक्षणाध्यक्ष' टकसाल (Mint) का प्रमुख अधिकारी होता था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

मौर्य साम्राज्य में केंद्रीय और स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ अर्थव्यवस्था अत्यधिक सुदृढ़ और विनियमित थी। कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ थी और 'भाग' मुख्य भू-राजस्व था, जबकि सिंचाई के साधनों पर राज्य का नियंत्रण होने के कारण 'उदक-भाग' (जल कर) भी वसूला जाता था। इस काल में मुद्रा प्रणाली काफी विकसित थी और कौटिल्य के अर्थशास्त्र में विभिन्न राजकीय अधिकारियों का विस्तृत विवरण मिलता है। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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