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History of India
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वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के विभिन्न पक्षों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. ऋग्वैदिक काल में 'दुहितृ' (Duhitri) शब्द का प्रयोग उस पुत्री के लिए किया जाता था जो गाय का दूध दूहती थी, और इस समाज में राजा को 'गोपा जनाशः' (जनता का रक्षक) कहा जाता था।
  2. 2. उत्तर वैदिक काल में सभा और समिति नामक राजनीतिक संस्थाओं का प्रभाव अत्यधिक बढ़ गया था, और राजा की निरंकुशता पर अंकुश लगाने में इन दोनों सभाओं की भूमिका ऋग्वैदिक काल की तुलना में और अधिक शक्तिशाली हो गई थी।
  3. 3. शतपथ ब्राह्मण में कृषि की चारों क्रियाओं — जुताई, बुवाई, कटाई और मड़ाई — का विस्तृत वर्णन मिलता है, तथा इसमें विदेह माधव की कथा का भी उल्लेख है जिसमें गंडक (सदानिरा) नदी तक आर्यों के पूर्व की ओर विस्तार का वर्णन है।
  4. 4. वैदिक साहित्य के अंतर्गत 'अरण्यक' उन दार्शनिक ग्रंथों को कहा जाता है जिन्हें जंगलों में पढ़ा जाता था और जो मुख्यतः यज्ञों के बाह्य कर्मकांडों के स्थान पर उनके रहस्यवादी व दार्शनिक पक्षों की व्याख्या करते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

वैदिक सभ्यता के राजनीतिक और सामाजिक इतिहास के संदर्भ में कथन 1, 3 और 4 सही हैं, जबकि कथन 2 गलत है। उत्तर वैदिक काल में आते-आते सभा और समिति जैसी लोकप्रिय संस्थाओं का प्रभाव कम होने लगा था और राजा की शक्ति में वृद्धि हुई थी, न कि उनकी शक्ति और अधिक शक्तिशाली हुई थी। शतपथ ब्राह्मण में विदेह माधव और उनके पुरोहित गौतम राहुगण द्वारा सदानिरा (गंडक) नदी पार करने की कथा का उल्लेख मिलता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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