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History of India
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वर्ष 1930-31 के सविनय अवज्ञा आंदोलन और वर्ष 1931 के गांधी-इरविन समझौते के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान महिलाओं, व्यापारियों और विभिन्न सामाजिक वर्गों की सक्रिय भागीदारी रही, और इस दौरान उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत में खान अब्दुल गफ्फार खान के नेतृत्व में 'खुदाई खिदमतगार' (लाल कुर्ती आंदोलन) ने ब्रिटिश सत्ता को अहिंसक चुनौती दी।
- 2. कराची में आयोजित वर्ष 1931 के कांग्रेस अधिवेशन में गांधी-इरविन समझौते का अनुमोदन किया गया और इसी अधिवेशन में पहली बार कांग्रेस द्वारा 'मौलिक अधिकार और आर्थिक नीति' पर ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया गया।
- 3. गांधी-इरविन समझौते के तहत ब्रिटिश सरकार ने उन सभी राजनीतिक बंदियों को तुरंत रिहा करने पर सहमति दी जिन पर हिंसा का प्रत्यक्ष आरोप था, तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को आगामी द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने के लिए आधिकारिक तौर पर आमंत्रित किया गया।
- 4. द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (1931) में कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में महात्मा गांधी ने भाग लिया, जहाँ सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर गतिरोध उत्पन्न होने के कारण सम्मेलन बिना किसी ठोस परिणाम के समाप्त हो गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 4 सही हैं। सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान खान अब्दुल गफ्फार खान के नेतृत्व में 'खुदाई खिदमतगार' की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कराची अधिवेशन (1931) में गांधी-इरविन समझौते की पुष्टि की गई और मौलिक अधिकारों का प्रस्ताव पारित हुआ। द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में गांधी जी ने कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया। किंतु कथन 3 गलत है क्योंकि गांधी-इरविन समझौते के तहत केवल उन राजनीतिक कैदियों को रिहा करने की शर्त थी जिन पर हिंसा का आरोप *नहीं* था, हिंसक गतिविधियों में लिप्त कैदियों को इससे बाहर रखा गया था। इस ऐतिहासिक घटनाक्रम के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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क्रांतिकारी आंदोलन के द्वितीय चरण (1920 के दशक के उत्तरार्ध) के दौरान गठित 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) और उससे संबंधित गतिविधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में चंद्रशेखर आज़ाद के नेतृत्व में इस संगठन का नाम बदलकर 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' रखा गया था और इसमें समाजवादी विचारधारा को प्रमुखता दी गई थी।
2. लाला लाजपत राय की लाठीचार्ज से हुई मृत्यु का बदला लेने के लिए इसी संगठन के सदस्यों (भगत सिंह, सुखदेव और चंद्रशेखर आज़ाद) ने दिसंबर 1928 में लाहौर के तत्कालीन सहायक पुलिस अधीक्षक जॉन सॉंडर्स की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
3. केंद्रीय विधानसभा (दिल्ली) में 8 अप्रैल 1929 को पब्लिक सेफ्टी बिल और ट्रेड डिस्प्यूट्स बिल के विरोध में बम फेंकने की ऐतिहासिक घटना में भगत सिंह के साथ बटुकेश्वर दत्त शामिल थे, और इस घटना का उद्देश्य किसी की हत्या करना नहीं बल्कि 'बहनों को बहरी आवाज सुनाना' था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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इब्राहिम लोदी ने ग्वालियर के किस राजा को हराकर ग्वालियर को दिल्ली सल्तनत में मिलाया था?
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1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां के नेतृत्व एवं उनकी रणनीतिक भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कानपुर में 5 जून 1857 को विद्रोह का नेतृत्व संभालते हुए नाना साहब ने स्वयं को पेशवा घोषित किया और पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र के रूप में मराठा गौरव को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया, तथा अजीमुल्ला खां उनके मुख्य सलाहकार और कूटनीतिक रणनीतिकार थे।
2. नाना साहब के सेनापति के रूप में तात्या टोपे ने कानपुर की रक्षा के लिए ब्रिटिश सेनापति जनरल सर ह्यू व्हीलर की सेना के खिलाफ कड़ा संघर्ष किया, किंतु ब्रिटिश सेना द्वारा नगर पर पुनः अधिकार किए जाने के बाद तात्या टोपे ने बिठूर से अपनी गतिविधियों का संचालन किया।
3. कानपुर में ब्रिटिश आत्मसमर्पण के उपरांत घटी 'बीबीघर नरसंहार' की घटना के पश्चात ब्रिटिश कमांडर जनरल हैवलॉक और जेम्स आउट्राम की सेना ने कानपुर पर अधिकार कर लिया, जिसके बाद नाना साहब नेपाल की तराई की ओर प्रस्थान कर गए और उनका अंतिम जीवन रहस्यमय बना रहा।
4. अजीमुल्ला खां ने विद्रोह के वैचारिक और अंतरराष्ट्रीय समर्थन को जुटाने के लिए लंदन में ब्रिटिश संसद और तत्कालीन राजनीतिक हलकों में नाना साहब के दूत के रूप में पैरवी की थी और ब्रिटेन यात्रा के दौरान ही क्रीमिया युद्ध का प्रत्यक्ष अध्ययन किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्धन राजवंश एवं दक्षिण भारत के राजवंश (चोल, पल्लव, चालुक्य) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पल्लव शासक महेंद्रवमन् प्रथम ने अपने प्रारंभिक जीवन में जैन धर्म का अनुयायी होने के बाद, तमिल संत अप्पर (थिरुनुवुक्करासर) के प्रभाव से शैव धर्म अपना लिया था, तथा उसने महाबलीपुरम में प्रसिद्ध 'रत्थ मंदिरों' (रथ मंदिरों) के निर्माण कार्य की शुरुआत करवाई थी।
2. बादामी के चालुक्य वंश के महान शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन की सेना को पराजित किया था, और इस ऐतिहासिक विजय का विस्तृत विवरण हमें कांचीपुरम के कैलाशनाथ मंदिर के संस्कृत शिलालेख से प्राप्त होता है।
3. चोल राजवंश की स्थानीय स्वशासन प्रणाली, विशेष रूप से 'उत्तरमेरूर शिलालेख' (Uttiramerur Inscriptions), में ग्राम सभाओं के गठन, सदस्यों की योग्यता और चुनाव प्रक्रिया (कुरावोलै पद्धति) का अत्यंत विस्तृत और सुव्यवस्थित वर्णन मिलता है।
4. वर्धन वंश के शासक हर्षवर्धन के शासनकाल में चीनी यात्री ह्वेनसांग (Hiuen Tsang) भारत आया था, जिसने कन्नौज में आयोजित भव्य धर्मसभा और प्रयागराज के महाकुंभ (मोक्ष परिषद) का अपनी यात्रा वृत्तांत 'सी-यु-की' में सजीव वर्णन किया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारतीय स्वतंत्रता और देश के विभाजन की प्रक्रिया के संदर्भ में, लॉर्ड माउंटबेटन द्वारा प्रस्तुत 3 जून 1947 की योजना और उसके क्रियान्वयन के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. माउंटबेटन योजना के अंतर्गत यह प्रावधान किया गया था कि पंजाब और बंगाल की प्रांतीय विधानसभाओं की बैठकें दो भागों (मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के प्रतिनिधि और गैर-मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के प्रतिनिधि) में होंगी और यदि दोनों में से कोई भी भाग प्रांत के विभाजन के पक्ष में मतदान करता है, तो प्रांतीय विभाजन अनिवार्य कर दिया जाएगा।
2. उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (NWFP) के भविष्य का निर्धारण करने के लिए इस योजना के तहत एक जनमत संग्रह (Referendum) कराया गया था, जिसमें खान अब्दुल गफ्फार खान और उनके 'खुदाई खिदमतगार' संगठन ने सक्रिय रूप से भाग लेते हुए इस जनमत संग्रह का बहिष्कार किया था।
3. इस योजना के तहत यह भी प्रावधान किया गया था कि भारत और पाकिस्तान दोनों डोमिनियन के लिए एक साझा गवर्नर-जनरल नियुक्त किया जाएगा, जो दोनों देशों के बीच संपत्ति, सैन्य और प्रशासनिक परिसंपत्तियों के विभाजन के कार्य की देखरेख करेगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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