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History of India
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वर्ष 1857 के विद्रोह के स्वरूप, कारणों और उसके विभिन्न आयामों के विश्लेषण के संदर्भ में, निम्नलिखित में से किस ब्रिटिश अधिकारी/इतिहासकार ने यह प्रसिद्ध मत व्यक्त किया था कि 'यह विद्रोह मुख्य रूप से विदेशी शासन के विरुद्ध रूढ़िवादी तत्वों की प्रतिक्रिया और धर्म की रक्षा के नाम पर भड़काया गया एक धार्मिक युद्ध (Religious War) था, जिसमें क्रूरता और बर्बरता का बोलबाला था'?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
एल. ई. आर. रीस (L. E. R. Rees) ने अपनी पुस्तक 'ए पर्सनल नरेटिव ऑफ़ दि लखनऊ इनसाइक्लिक' (A Personal Narrative of the Lucknow Outbreak) में यह स्पष्ट मत व्यक्त किया था कि 1857 का विद्रोह इस्लाम का ईसाइयत के विरुद्ध एक धार्मिक युद्ध (A war of fanatical religions against Christians) था। इसके अलावा, विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, विभिन्न ब्रिटिश इतिहासकारों ने इस महान विद्रोह को अपनी-अपनी राजनीतिक और वैचारिक दृष्टियों से परिभाषित किया है।
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जहाँगीर ने 1611 ई. में मेहरुन्निसा से विवाह किया, जिसे उसने क्या उपाधि दी थी?
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भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन के इतिहास में 'गदर पार्टी' तथा 'हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1913 में लाला हरदयाल और सोहन सिंह भकना द्वारा स्थापित 'गदर पार्टी' का मुख्यालय सैन फ्रांसिस्को (अमेरिका) के 'युगांतर आश्रम' में बनाया गया था, जहाँ से 'गदर' नामक साप्ताहिक पत्र का प्रकाशन विभिन्न भाषाओं में किया जाता था।
2. वर्ष 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में 'हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HRA) का पुनर्गठन करके 'हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) की स्थापना की गई थी, जिसमें समाजवाद को इसके घोषणापत्र का मुख्य उद्देश्य बनाया गया था।
3. भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने वर्ष 1929 में केंद्रीय विधानसभा में बम फेंका था, जिसका मुख्य उद्देश्य किसी भी अंग्रेज अधिकारी की हत्या करना था ताकि ब्रिटिश सरकार में खौफ पैदा किया जा सके और वे अपने ऊपर चल रहे लाहौर षड्यंत्र केस से बच सकें।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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सिखों के नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर की हत्या किस मुगल सम्राट के आदेश पर की गई थी?
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फिरोज शाह तुगलक ने जगन्नाथ मंदिर (पुरी) और ज्वालामुखी मंदिर (कांगड़ा) को किस वर्ष लूटा था?
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गुप्तकालीन अर्थव्यवस्था, भूमि अनुदान व्यवस्था (Land Grants) और प्रशासनिक शब्दावली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गुप्त काल में राजा द्वारा ब्राह्मणों, मंदिरों और अधिकारियों को दिए जाने वाले भूमि अनुदानों को 'अग्रहार' या 'ब्रह्मदेय' कहा जाता था, जिसके तहत अनुदान प्राप्तकर्ताओं को प्रशासनिक और न्यायिक अधिकार भी सौंप दिए गए, जिससे सामंती प्रवृत्तियों (Feudal tendencies) के बीज पड़े।
2. इस काल में भूमि की माप और उसके वर्गीकरण के लिए 'क्षेत्र' (खेती योग्य भूमि), 'वापस' (निवास योग्य भूमि), 'अप्राहत' (जंगल या बिना जोती गई भूमि) और 'गोपथ' (चारागाह भूमि) जैसी श्रेणियों का उल्लेख मिलता है, तथा भूमि के क्रय-विक्रय की अनुमति केवल स्थानीय पंचायतों या नगरश्रेठियों द्वारा दी जाती थी।
3. गुप्त राजवंश के शासकों द्वारा जारी किए गए सोने के सिक्कों को 'दीनार' कहा जाता था, जो कुषाणों की तुलना में अधिक शुद्ध थे, किंतु स्कंदगुप्त के शासनकाल के बाद से जारी किए गए स्वर्ण सिक्कों में सोने की मात्रा में भारी गिरावट और मिलावट (Debasement of currency) स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
4. गुप्त प्रशासन में प्रांतीय शासकों को 'उपरिक' कहा जाता था, जो सीधे सम्राट के प्रति उत्तरदायी होते थे, तथा जिला प्रशासन के प्रमुख अधिकारी को 'विषयपति' कहा जाता था जो स्थानीय नगर निकायों और कुलीन वर्गों के सहयोग से प्रशासनिक कार्यों का संचालन करते थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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