त्वरित लिंक्स
History of India
16 views
मध्यकालीन भारत के धार्मिक इतिहास में भक्ति और सूफी आंदोलनों के वैचारिक विकास, प्रमुख संतों की दार्शनिक मान्यताओं तथा उनके सामाजिक प्रभाव के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. दक्षिण भारत के अलवार (वैष्णव) और नयनार (शैव) संतों ने जाति व्यवस्था और ब्राह्मणवादी वर्चस्व की कठोरता को चुनौती देते हुए अपनी भक्ति रचनाओं का प्रसार संस्कृत के स्थान पर तमिल भाषा में किया, जिससे आम जनमानस तक उनकी पहुँच सुगम हो गई।
- 2. उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन को लोकप्रिय बनाने वाले रामानंद ने जाति और लिंग के भेदभाव को अस्वीकार करते हुए अपने शिष्यों में रैदास (चमार जाति से), कबीर (जुलाहा), सेना (नाई) और पद्मावती जैसी निचली जातियों व महिलाओं को भी सम्मिलित किया था।
- 3. सूफी संतों के 'चिश्ती सिलसिले' ने संगीत और समा (कव्वाली) को ईश्वर-प्राप्ति का एक प्रमुख साधन माना, तथा शेख निजामुद्दीन औलिया ने तत्कालीन सुल्तानों के दरबार से कड़ाई से दूरी बनाए रखने की नीति का पालन किया और कभी भी शाही अनुदान स्वीकार नहीं किया।
- 4. सुहरावर्दी सिलसिले के संतों ने चिश्ती संतों के विपरीत राजकीय संरक्षण और शाही अनुदान को स्वीकार करने से परहेज नहीं किया, तथा उनका यह मानना था कि आध्यात्मिक जीवन के साथ-साथ भौतिक सुख-सुविधाओं का होना भी ईश्वर की कृपा का प्रतीक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
मध्यकालीन भारतीय इतिहास में भक्ति और सूफी आंदोलनों ने भारतीय समाज और संस्कृति पर गहरा प्रभाव डाला। दक्षिण भारत में अलवार और नयनार संतों ने तमिल भाषा में भक्ति का प्रसार किया। रामानंद ने उत्तर भारत में जाति और लिंग भेद को दरकिनार कर सभी वर्गों को अपना शिष्य बनाया। सूफीवाद के अंतर्गत चिश्ती सिलसिले ने संगीत (समा) को अपनाया और शेख निजामुद्दीन औलिया ने सुल्तानों के दरबार से दूरी बनाए रखी, जबकि सुहरावर्दी सिलसिले ने राजकीय संरक्षण और शाही अनुदान स्वीकार किए। विकिपीडिया संदर्भ
Related Questions
→
हिमालय की तराई (कुमाऊँ की पहाड़ियों) में सुल्तान द्वारा भेजा गया कौन सा अभियान भारी तबाही के साथ असफल रहा?
→
यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और बंगाल में ब्रिटिश सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक दौर के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1717 में मुगल सम्राट फारुकसियर द्वारा जारी फरमान के तहत ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल में 3,000 रुपये वार्षिक कर के एवज में बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के मुक्त व्यापार (दस्तक प्रणाली) का अधिकार मिला, जिससे कंपनी के निजी अधिकारियों को भी अपने व्यक्तिगत व्यापार पर इस छूट का उपयोग करने की पूर्ण स्वतंत्रता मिल गई थी।
2. अलीवर्दी खान ने यूरोपीय व्यापारियों की तुलना 'मधुमक्खियों' से करते हुए कहा था कि यदि उन्हें छेड़ा न जाए तो वे शहद देंगी, और यदि उन्हें काटा जाए तो वे डंक मारकर मार डालेंगी; उसने अंग्रेजों को अपनी मर्जी से बंगाल की किलाबंदी करने की कभी अनुमति नहीं दी।
3. सिराजुद्दौला के शासनकाल के दौरान अंग्रेजों द्वारा कलकत्ता की किलेबंदी को अवैध रूप से सुदृढ़ करने और 'दस्तक' प्रणाली के दुरुपयोग के विरोध में उसने जून 1756 में कलकत्ता (फोर्ट विलियम) पर आक्रमण कर उस पर अधिकार कर लिया था।
4. प्लासी के युद्ध (1757) में सिराजुद्दौला की पराजय के पश्चात मीर जाफर को बंगाल का नया नवाब बनाया गया, और इस युद्ध के ठीक बाद कंपनी को कलकत्ता के आसपास की जमींदारी के साथ-साथ उत्तरी सरकार के महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर भी पूर्ण स्वामित्व प्राप्त हो गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में ब्रह्म समाज और आर्य समाज की वैचारिक मान्यताओं के बीच निम्नलिखित में से कौन-सा मूलभूत अंतर सही है?
→
शेरशाह सूरी का मकबरा कहाँ है?
→
मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म 1630 ई. में किस किले में हुआ था?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.