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General Science
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मानव शरीर के परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र के कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. हृदय चक्र (Cardiac cycle) के दौरान, 'आलि-निलय नोड' (AV Node) पेसमेकर के रूप में कार्य करता है जो स्वतः उत्पन्न होने वाले विद्युत आवेगों को आलिंद से निलय तक पहुँचाता है, जिससे निलय का संकुचन होता है।
- 2. तंत्रिका आवेग (Nerve impulse) के संचलन के समय, जब सिनेप्स (Synapse) पर विद्युत संकेत पहुँचता है, तो पुटिकाएँ (Vesicles) फट जाती हैं और न्यूरोट्रांसमीटर जैसे 'एसिटाइलकोलीन' (Acetylcholine) का विमोचन होता है, जो पश्च-सिनेप्टिक झिल्ली के ग्राही (Receptors) से जुड़कर रासायनिक संचरण को पूरा करता है।
- 3. रुधिर वाहिकाओं में रक्तदाब को नियंत्रित करने में मेडुला ऑब्लॉन्गेटा (Medulla oblongata) की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जो स्वायत्त तंत्रिका तंत्र के माध्यम से हृदय की धड़कन और वाहिकासंकीर्णन (Vasoconstriction) को नियमित करता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि हृदय में स्वाभाविक रूप से तालबद्ध संकुचन उत्पन्न करने वाला मुख्य प्राकृतिक पेसमेकर 'सिनोएट्रियल नोड' (SA Node) होता है, न कि AV Node (हालाँकि AV Node आवेगों को विलंब के साथ निलय तक प्रसारित करता है)। कथन 2 और 3 बिल्कुल सही हैं; सिनेप्स पर न्यूरोट्रांसमीटर (जैसे एसिटाइलकोलीन) द्वारा रासायनिक संचरण होता है और मस्तिष्क का मेडुला ऑब्लॉन्गेटा भाग हृदय गति और रक्तदाब का नियंत्रण करता है।
Related Questions
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ऊष्मागतिकी (Thermodynamics) के नियमों और ऊष्मागतिकीय चरों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऊष्मागतिकी का शून्यवां नियम (Zeroth Law of Thermodynamics) तापमान की अवधारणा को परिभाषित करता है और यह बताता है कि यदि दो निकाय किसी तीसरे निकाय के साथ अलग-अलग तापीय साम्यावस्था में हैं, तो वे आपस में भी तापीय साम्य में होंगे।
2. किसी निकाय की आंतरिक ऊर्जा ($U$) एक अवस्था फलन (State function) है, जिसका अर्थ है कि इसका परिवर्तन पथ पर निर्भर नहीं करता है, जबकि ऊष्मा ($Q$) और कार्य ($W$) पथ फलन (Path functions) हैं जो निकाय द्वारा अपनाए गए प्रक्रम पर निर्भर करते हैं।
3. रुद्धोष्म प्रक्रम (Adiabatic process) के दौरान निकाय और परिवेश के बीच ऊष्मा का आदान-प्रदान शून्य होता है ($Q = 0$), जिसके कारण यदि किसी गैस का रुद्धोष्म रूप से संपीड़न किया जाए, तो उसकी आंतरिक ऊर्जा घट जाती है और परिणामस्वरूप तापमान में गिरावट आती है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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प्रकाशिकी और लेंस के अपवर्तन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब किसी उत्तल लेंस को ऐसे पारदर्शी माध्यम में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की प्रकृति बदल जाती है और वह अभिसारी (Converging) लेंस के बजाय अपसारी (Diverging) लेंस की तरह व्यवहार करने लगता है।
2. लेंस निर्माता का सूत्र (Lens Maker's Formula) केवल तभी मान्य होता है जब लेंस के दोनों ओर के माध्यम का अपवर्तनांक समान हो तथा लेंस पतला हो।
3. पानी में डुबोए जाने पर किसी उत्तल लेंस की फोकस दूरी बढ़ जाती है, जिसके कारण उसकी शक्ति (Power) में वृद्धि हो जाती है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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मानव शरीर में होने वाले संक्रामक रोगों और उनके रोगजनकों (Pathogens) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'लेप्रोसी' (कुष्ठ रोग) एक जीवाणु जनित संक्रमण है जो माइकोबैक्टीरियम लेप्री (Mycobacterium leprae) के कारण होता है और यह मुख्य रूप से परिधीय तंत्रिकाओं (Peripheral nerves) और त्वचा को प्रभावित करता है।
2. 'ट्रैकोमा' (Trachoma), जो कि एक प्रमुख नेत्र रोग है, क्लैडाइडिया ट्रैकोमैटिस (Chlamydia trachomatis) नामक बैक्टीरिया द्वारा फैलता है और इसके संक्रमण से कॉर्निया में घाव तथा अंधापन हो सकता है।
3. 'रैबीज' एक विषाणु जनित घातक रोग है जो लाइसावायरस (Lyssavirus) के संक्रमण से होता है, और यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है तथा इसमें कपाल तंत्रिकाओं की ऐंठन के कारण हाइड्रोफोबिया (जल से डर) के लक्षण प्रकट होते हैं।
4. 'प्रियन' (Prions) संक्रामक प्रोटीन कण होते हैं जो न्यूक्लिक अम्ल (DNA या RNA) से रहित होते हैं, और इनके कारण मनुष्य में क्रूत्जफिल्ड-जैकोब रोग (CJD) जैसी घातक तंत्रिका संबंधी बीमारियाँ हो सकती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भूकंप?
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त्वरण का मात्रक?
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