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General Science
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विलयन के अणुसंख्यक गुणों (Colligative properties) और उत्प्रेरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. विलयन का 'परासरण दाब' ($1$V = $nRT$ के अनुरूप) एक अणुसंख्यक गुण है जो विलेय के कणों की कुल संख्या पर निर्भर करता है, न कि उनकी प्रकृति पर, और यह तनु विलयनों के आणविक द्रव्यमान निर्धारण के लिए सबसे उपयुक्त विधि है क्योंकि इसका परिमाण कमरे के तापमान पर भी आसानी से मापने योग्य होता है।
  2. 2. 'वांट हॉफ गुणांक' ($i$) का मान वैद्युत अपघट्यों के लिए हमेशा $1$ से कम होता है, क्योंकि जलीय विलयन में वियोजन (Dissociation) के कारण कणों की संख्या घट जाती है।
  3. 3. 'समांगी उत्प्रेरण' (Homogeneous catalysis) में उत्प्रेरक और अभिकारक समान भौतिक अवस्था (Phase) में होते हैं, और ओस्टवाल्ड विधि द्वारा अमोनिया के ऑक्सीकरण से नाइट्रिक अम्ल के निर्माण में प्रयुक्त प्लैटिनम gauze इस उत्प्रेरण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: विलयन के अणुसंख्यक गुण (जैसे परासरण दाब, वाष्प दाब में अवनमन, क्वथनांक में उन्नयन और हिमांक में अवनमन) वे गुण हैं जो एक निश्चित विलायक में उपस्थित विलेय कणों की संख्या पर निर्भर करते हैं, न कि उनकी रासायनिक प्रकृति पर। परासरण दाब विधि अन्य गुणों की तुलना में macromolecules (बहुलक और प्रोटीन) के आणविक द्रव्यमान निर्धारण के लिए अत्यधिक उपयोगी है क्योंकि इसका मान कम सांद्रता पर भी मापने योग्य होता है। कथन 2 गलत है: वैद्युत अपघट्यों (जैसे $NaCl$) के जलीय विलयन में वियोजन (Dissociation) के कारण कणों की कुल संख्या बढ़ जाती है, इसलिए उनके लिए वांट हॉफ गुणांक ($i$) का मान हमेशा $1$ से अधिक होता है, न कि कम। संघनन (Association) के मामले में $i$ का मान $1$ से कम होता है। कथन 3 गलत है: प्लैटिनम gauze द्वारा अमोनिया का ऑक्सीकरण 'विषमांगी उत्प्रेरण' (Heterogeneous catalysis) का उदाहरण है, क्योंकि यहाँ अभिकारक गैसीय अवस्था में हैं जबकि उत्प्रेरक (प्लैटिनम) ठोस अवस्था में होता है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, जब उत्प्रेरक और अभिकारक अलग-अलग कलाओं (phases) में होते हैं, तो उसे विषमांगी उत्प्रेरण कहते हैं।
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