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General Science
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प्रकाशिकी (Optics) और लेंस-दर्पण के व्यवहार के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. जब किसी उत्तल लेंस को ऐसे द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की फोकस दूरी ऋणात्मक हो जाती है और वह अभिसारी (Converging) लेंस के बजाय अपसारी (Diverging) लेंस की तरह व्यवहार करने लगता है।
  2. 2. गोलीय दर्पण की फोकस दूरी ($f$) और उसकी वक्रता त्रिज्या ($R$) के बीच का संबंध $R = 2f$ केवल वायु या निर्वात में ही मान्य होता है, और यदि दर्पण को पानी में डुबो दिया जाए तो उसके परावर्तन के नियमों के कारण उसकी वक्रता त्रिज्या और फोकस दूरी दोनों बदल जाती हैं।
  3. 3. पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) की घटना के लिए प्रकाश किरण का सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाना अनिवार्य है, और आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण (Critical Angle) से अधिक होना चाहिए।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि लेंस निर्माता सूत्र (Lens Maker's Formula) के अनुसार, यदि लेंस को ऐसे माध्यम में डुबोया जाए जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ से अधिक हो, तो लेंस की प्रकृति उल्टी हो जाती है (यानी उत्तल लेंस अवतल की तरह व्यवहार करता है)। कथन 2 गलत है क्योंकि गोलीय दर्पण की फोकस दूरी माध्यम के अपवर्तनांक पर निर्भर नहीं करती है, इसलिए पानी में डुबाने पर भी दर्पण की फोकस दूरी और वक्रता त्रिज्या अपरिवर्तित रहती हैं (यह अपवर्तन के बजाय परावर्तन के सिद्धांतों पर कार्य करता है)। कथन 3 सही है, पूर्ण आंतरिक परावर्तन के लिए प्रकाश का सघन से विरल माध्यम में जाना और आपतन कोण का क्रांतिक कोण से अधिक होना आवश्यक शर्तों में शामिल है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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