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General Science
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आवर्त सारणी में तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुणों में आवर्तिता (Periodicity) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी परमाणु की 'प्रथम आयनन एन्थैल्पी' (First Ionization Enthalpy) का मान सामान्यतः आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर बढ़ता है, किंतु समूह 15 के तत्वों (जैसे नाइट्रोजन) की प्रथम आयनन एन्थैल्पी अपने ठीक बाद आने वाले समूह 16 के तत्वों (जैसे ऑक्सीजन) से अधिक होती है, जिसका प्रमुख कारण नाइट्रोजन के $2p$ कक्षकों का अर्ध-पूरित (Half-filled) होना और इसका अतिरिक्त स्थायित्व है।
- 2. 'इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी' (Electron Gain Enthalpy) का मान फ्लोरिन की तुलना में क्लोरीन के लिए अधिक ऋणात्मक (अधिक ऊष्माक्षेपी) होता है, जिसका मुख्य कारण फ्लोरिन के परमाण्विक आकार का अत्यंत छोटा होना है, जिससे आने वाले इलेक्ट्रॉन पर तीव्र अंतःइलेक्ट्रॉनी प्रतिकर्षण (Interelectronic repulsion) उत्पन्न होता है।
- 3. आधुनिक आवर्त सारणी में 'लैंथेनाइड आकुंचन' (Lanthanoid Contraction) के परिणामस्वरूप, छठे आवर्त के संक्रमण तत्वों (जैसे हाफ्नियम, Hf) की परमाणु त्रिज्या और रासायनिक गुण पांचवें आवर्त के उनके ठीक ऊपर स्थित तत्वों (जैसे जिरकोनियम, Zr) के लगभग समान हो जाते हैं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं। आवर्त सारणी में तत्वों के गुण आवर्तिता दर्शाते हैं। समूह 15 के तत्वों (नाइट्रोजन परिवार) में बाह्यतम इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $ns^2 np^3$ होता है, जो अर्ध-पूरित होने के कारण अत्यधिक स्थायी होता है, जिससे इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए अधिक ऊर्जा (आयनन एन्थैल्पी) की आवश्यकता होती है। इसी प्रकार, फ्लोरिन का छोटा आकार आने वाले इलेक्ट्रॉन पर प्रतिकर्षण बढ़ाता है जिससे क्लोरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी अधिक ऋणात्मक होती है। इसके अलावा, 4f कक्षकों के दुर्बल परिरक्षण प्रभाव के कारण लैंथेनाइड आकुंचन होता है, जिससे 5d और 6d श्रेणी के तत्वों के आकार लगभग समान हो जाते हैं। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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ऊर्जा का मात्रक क्या है?
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धातुओं, अधातुओं और उनके प्रमुख यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा निष्कर्षण प्रक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एल्युमिनियम के निष्कर्षण के लिए 'हॉल-हెరoult प्रक्रम' (Hall-Heroult process) का उपयोग किया जाता है, जिसमें शुद्ध एलुमिना ($Al_2O_3$) को पिघले हुए क्रायोलाइट ($Na_3AlF_6$) और फ्लूरोस्पार ($CaF_2$) के मिश्रण में घोलकर विद्युत अपघटन किया जाता है, जहाँ क्रायोलाइट मुख्य रूप से एलुमिना के गलनांक को कम करने और उसकी विद्युत चालकता को बढ़ाने का कार्य करता है।
2. 'सफेद फॉस्फोरस' ($P_4$) अत्यधिक प्रतिक्रियाशील और वाष्पशील ठोस है जो अंधेरे में चमकता है (केमिलुमिनिसेंस) और इसे जल के भीतर संग्रहित किया जाता है, जबकि 'लाल फॉस्फोरस' बहुलकीय संरचना के कारण कम क्रियाशील होता है और सामान्य ताप पर वायु में स्वतः आग नहीं पकड़ता।
3. 'जिंक ब्लेंड' ($ZnS$) अयस्क के सांद्रण के लिए 'फेन प्लवन विधि' (Froth Floatation Method) का उपयोग किया जाता है, जिसके पश्चात धातु ऑक्साइड प्राप्त करने के लिए 'विगलन' (Smelting) या भर्जन (Roasting) की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
4. संक्रमण धातुओं के यौगिकों द्वारा रंगीन आयनों का निर्माण मुख्य रूप से d-d संक्रमण ($d-d$ transition) के कारण होता है, किंतु जिंक ($Zn^{2+}$) और स्कैंडियम ($Sc^{3+}$) आयन अपने पूर्णतः भरे हुए या रिक्त d-कक्षक के कारण रंगहीन (Colorless) होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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केप्लर के ग्रहों की गति के नियमों और उपग्रहों की कक्षीय ऊर्जा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. केप्लर का द्वितीय नियम (क्षेत्रफलों का नियम) इस तथ्य पर आधारित है कि केंद्रीय बलों के अंतर्गत गति करते हुए किसी पिंड का कोणीय संवेग (Angular momentum) संरक्षित रहता है, जिसका अर्थ है कि उपग्रह जब पृथ्वी के सबसे निकट (उपसौर/पेरीजी) होता है, तो उसकी चाल अधिकतम और दूर होने पर न्यूनतम होती है।
2. किसी दीर्घवृत्तीय कक्षा में परिक्रमा कर रहे उपग्रह की कुल यांत्रिक ऊर्जा ऋणात्मक होती है, जो यह दर्शाती है कि उपग्रह गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बंधा हुआ है, और दीर्घवृत्तीय कक्षा के किसी भी बिंदु पर उपग्रह की गतिज ऊर्जा (Kinetic energy), उसकी स्थितिज ऊर्जा (Potential energy) के परिमाण की आधी होती है।
3. भू-स्थिर उपग्रह (Geostationary satellite) की परिक्रमा की अवधि ठीक 24 घंटे होती है और यह हमेशा विषुवत वृत्त (Equator) के तल में पश्चिम से पूर्व की ओर पृथ्वी की परिक्रमा करता है, जिसकी भू-सतह से ऊंचाई लगभग 36,000 किमी होती है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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आयाम?
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यूकेरियोटिक कोशिकाओं में पाए जाने वाले 'कोशिकांगों' (Cell Organelles) की संरचना, उनके विशिष्ट कार्यों और झिल्लीगत संगठन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गॉल्जी उपकरण (Golgi Apparatus) में 'cis' (निर्माणकारी) चेहरा आमतौर पर अंतःद्रव्यी जालिका (ER) की ओर और 'trans' (परिपक्व होने वाला) चेहरा प्लाज्मा झिल्ली की ओर स्थित होता है, जहाँ यह ग्लाइकोसिलेशन (Glycosylation) और ग्लाइकोलिपिड के निर्माण में मुख्य भूमिका निभाता है।
2. लाइसोसोम (Lysosomes) एकल झिल्ली से घिरे ऐसे पुटिकाएँ होती हैं जिनमें अम्लीय पीएच (लगभग 4.5 से 5.0) पर सक्रिय हाइड्रोलाइटिक एंजाइम (जैसे कार्बोहाइड्रेटेज, लाइपेस और प्रोटीएज) प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो केवल बाह्य कोशिकीय पदार्थों का ही पाचन कर सकते हैं।
3. परॉक्सीसोम (Peroxisomes) अर्ध-स्वायत्त सूक्ष्मकाय हैं जिनमें 'कैटालेज' एंजाइम पाया जाता है जो हाइड्रोजन पेरोक्साइड को जल और ऑक्सीजन में विघटित करता है, और ये पादप कोशिकाओं में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की प्रक्रिया से भी जुड़े होते हैं।
4. राइबोसोम झिल्लीहीन कोशिकांग हैं, जो केवल प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं के साइटोप्लाज्म में 70S प्रकार के पाए जाते हैं, जबकि यूकेरियोटिक कोशिकाओं में ये केवल माइटोकॉन्ड्रिया और हरित लवक के भीतर ही मौजूद होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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