BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

General Science
25 views

समांग और विषमांग उत्प्रेरण (Homogeneous and Heterogeneous Catalysis) तथा विलयन के अणुसंख्यक गुणों (Colligative properties) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. समांग उत्प्रेरण में अभिकारक और उत्प्रेरक दोनों समान भौतिक अवस्था (सामान्यतः द्रव या गैस) में होते हैं, जबकि विषमांग उत्प्रेरण में ठोस उत्प्रेरकों की सतह पर अभिकारकों का अधिशोषी सक्रियण (Adsorptive activation) होता है, जो रासायनिक अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा (Activation energy) को कम कर देता है।
  2. 2. वाष्पशील विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर विलयन के वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन (Relative lowering of vapour pressure) विलेय के मोल अंश के बराबर होता है, और यह 'राउल्ट का नियम' केवल आदर्श विलयनों द्वारा ही सभी सांद्रता सीमाओं पर सटीकता से पालन किया जाता है।
  3. 3. कोलॉइडी विलयनों (Colloidal solutions) में प्रक्षिप्त प्रावस्था (Dispersed phase) के कणों द्वारा आपतित प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण उत्पन्न होने वाले 'टिंडल प्रभाव' (Tyndall effect) को देखने के लिए यह आवश्यक है कि प्रक्षिप्त कणों का व्यास आपतित प्रकाश की तरंगदैर्ध्य की तुलना में बहुत अधिक हो।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि समांग उत्प्रेरण में अभिकारक और उत्प्रेरक एक ही प्रावस्था (phase) में होते हैं, जबकि विषमांग उत्प्रेरण में ठोस उत्प्रेरक की सतह पर गैस या द्रव अभिकारकों का अधिशोषी सक्रियण होता है, जिससे अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा कम हो जाती है। कथन 2 गलत है क्योंकि राउल्ट का नियम केवल 'तनु' (dilute) आदर्श विलयनों पर ही सटीकता से लागू होता है, सांद्र विलयनों पर यह विचलन प्रदर्शित करता है। कथन 3 गलत है क्योंकि टिंडल प्रभाव प्रदर्शित होने के लिए प्रक्षिप्त प्रावस्था के कणों का व्यास आपतित प्रकाश की तरंगदैर्ध्य की तुलना में बहुत कम (या उसके लगभग तुलनीय) होना चाहिए, न कि बहुत अधिक। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:

Related Questions

→ मानव शरीर के अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) और विभिन्न हार्मोन की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अग्नाशय की लैंगरहैंस द्वीपिकाओं (Islets of Langerhans) में पाई जाने वाली अल्फा (α) कोशिकाएं 'ग्लूकागोन' हार्मोन का स्रावण करती हैं, जो एक हाइपरग्लिसेमिक हार्मोन है और यकृत में ग्लाइकोजेनोलिसिस (Glycogenolysis) तथा ग्लूकोनियोजेनेसिस को प्रेरित करके रक्त में ग्लूकोज के स्तर को बढ़ाता है। 2. थायराइड ग्रंथि द्वारा स्रावित 'कैल्सीटोनिन' (Calcitonin) हार्मोन रक्त में कैल्शियम के स्तर को कम करने का कार्य करता है, क्योंकि यह अस्थियों से कैल्शियम के अवशोषण को रोकता है और अस्थि-निर्माण (Bone formation) को बढ़ावा देता है। 3. अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal Gland) का मज्जा (Medulla) भाग कैटेकोलामाइन (एड्रेनालाईन और नॉरएड्रेनालाईन) हार्मोन का स्रावण करता है, जिन्हें 'आपातकालीन हार्मोन' या 'लड़ो या भागो' (Fight or Flight) हार्मोन कहा जाता है, जो हृदय की धड़कन, श्वसन दर और पुतली के फैलाव को बढ़ाते हैं। 4. अग्र पिट्यूटरी (Adenohypophysis) ग्रंथि द्वारा स्रावित 'प्रोलैक्टिन' हार्मोन दुग्ध के निष्कासन (Milk ejection) के लिए सीधे उत्तरदायी होता है, जबकि दुग्ध के संश्लेषण (Milk synthesis) का कार्य ऑक्सीटोसिन हार्मोन द्वारा किया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → किसी वस्तु का भार सर्वाधिक कहाँ होता है? → हीरे का चमकना किस घटना का उदाहरण है? → धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक तथा भौतिक गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'थर्माइट प्रक्रम' (Thermite Process) में एल्युमिनियम पाउडर का उपयोग अपचायक (Reducing agent) के रूप में किया जाता है, जो भारी संक्रमण धातुओं (जैसे फेरिक ऑक्साइड) को अपचयित करके पिघली हुई अवस्था में धातु निष्कर्षण में सहायता करता है, क्योंकि एल्युमिनियम की ऑक्सीजन के प्रति बंधुता अत्यधिक उच्च होती है। 2. जब सफेद फॉस्फोरस ($P_4$) को कास्टिक सोडा ($NaOH$) के सांद्र जलीय विलयन के साथ अक्रिय वातावरण में गर्म किया जाता है, तो यह असमानुपातन (Disproportionation) अभिक्रिया के माध्यम से फॉस्फीन गैस ($PH_3$) और सोडियम हाइपोफॉस्फाइट का निर्माण करता है। 3. उत्कृष्ट गैसों में केवल क्ज़ेनॉन (Xenon) ही कुछ निश्चित परिस्थितियों में फ्लोरीन और ऑक्सीजन के साथ स्थायी सहसंयोजक यौगिक जैसे $XeF_2$, $XeF_4$ और $XeO_3$ बनाता है, क्योंकि इसकी आयनन एन्थैल्पी का मान भारी आकार के कारण अपेक्षाकृत कम और ध्रुवण क्षमता उच्च होती है। 4. संक्षारण (Corrosion) के दौरान लोहे पर जंग लगने की विद्युत-रासायनिक प्रक्रिया में, एनोड क्षेत्र पर लोहे का ऑक्सीकरण होकर $Fe^{2+}$ आयन बनते हैं, जबकि कैथोड क्षेत्र पर ऑक्सीजन का अपचयन होता है, और वायुमंडल में उपस्थित नमी तथा कार्बन डाइऑक्साइड की उपस्थिति इस पूरी प्रक्रिया को धीमा कर देती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा निष्कर्षण प्रक्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. एल्युमिनियम के निष्कर्षण के लिए हॉल-हెరॉल्ट प्रक्रम (Hall-Héroult process) में शुद्ध एलुमिना ($Al_2O_3$) का गलनांक बहुत अधिक होने के कारण इसे पिघले हुए क्रायोलाइट ($Na_3AlF_6$) और फ्लूऑर्स्पर ($CaF_2$) के मिश्रण में घोला जाता है, जो विलायक के रूप में कार्य करते हुए मिश्रण की विद्युत चालकता को भी बढ़ाते हैं। 2. 'सफेद फॉस्फोरस' (White Phosphorus) अत्यधिक प्रतिक्रियाशील, विषैला और दीप्तिशील (Phosphorescent) ठोस होता है, जिसकी आणविक संरचना साधारणतः चतुष्फलकीय ($P_4$) होती है, और हवा में स्वतः जलने से रोकने के लिए इसे जल के नीचे रखा जाता है। 3. संक्रमण धातुओं के यौगिकों द्वारा रंग प्रदर्शित करने का प्रमुख कारण उनके आयनों में 'd-d संक्रमण' (d-d transition) या 'चार्ज ट्रांसफर स्पेक्ट्रा' का होना है, जिसमें अपूर्ण रूप से भरे d-कक्षकों के बीच इलेक्ट्रॉनों का उत्तेजन दृश्य प्रकाश क्षेत्र के अवशोषण से होता है। 4. सोडियम कार्बोनेट (वाशिंग सोडा) का बड़े पैमाने पर उत्पादन 'सॉलवे प्रक्रम' (Solvay process) द्वारा किया जाता है, जिसमें अमोनिया और कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग होता है, तथा इस प्रक्रम की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि अमोनिया को पुनर्प्राप्त करने के लिए बुझे हुए चूने ($Ca(OH)_2$) के साथ अमोनियम क्लोराइड की अभिक्रिया कराई जाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.