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General Science
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वान्ट हॉफ गुणांक (Van't Hoff factor 'i'), असामान्य मोलर द्रव्यमान और उत्प्रेरण के विशिष्ट संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. किसी वैद्युत अपघट्य के वियोजन (Dissociation) की स्थिति में वान्ट हॉफ गुणांक का मान हमेशा एक से अधिक होता है, जबकि संगुणन (Association) की स्थिति में इसका मान एक से कम होता है, और आदर्श विलयनों के लिए यह ठीक एक के बराबर होता है।
  2. 2. विषमांग उत्प्रेरण में प्रयुक्त 'अधिशोषण सिद्धांत' (Adsorption theory) के अनुसार, उत्प्रेरक की सक्रिय सतह पर अभिकारकों का अधिशोषी सक्रियण होता है, जिससे मुक्त संयोजकताएं संतुष्ट होने के कारण रासायनिक अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा (Activation energy) बढ़ जाती है और अभिक्रिया मंद हो जाती है।
  3. 3. 'एंजाइम उत्प्रेरण' (Enzyme catalysis) अपनी विशिष्ट प्रकृति, अत्यधिक उच्च दक्षता और लॉक-एंड-की (Lock-and-key) मॉडल के अनुरूप कार्य करने के लिए जाने जाते हैं, और ये तापमान तथा pH के एक निश्चित इष्टतम (Optimum) परिसर पर ही अधिकतम सक्रियता प्रदर्शित करते हैं।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि वियोजन (Dissociation) होने पर कणों की संख्या बढ़ती है जिससे वान्ट हॉफ गुणांक 'i' का मान 1 से अधिक होता है, संगुणन में कण घटते हैं जिससे मान 1 से कम होता है, और आदर्श विलयन के लिए यह 1 होता है। कथन 2 गलत है क्योंकि विषमांग उत्प्रेरण में अभिकारकों के अधिशोषण से सक्रियण ऊर्जा 'घटती' है, न कि बढ़ती है, जिससे अभिक्रिया की दर तीव्र होती है। कथन 3 सही है क्योंकि एंजाइम उत्प्रेरक अत्यंत विशिष्ट और उच्च दक्षता वाले होते हैं जो ताला-कुंजी मॉडल के अनुरूप कार्य करते हैं और इष्टतम तापमान तथा pH पर सक्रिय होते हैं। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखा जा सकता है।
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