त्वरित लिंक्स
General Science
1 views
आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या (Atomic radius) सामान्यतः घटती है, क्योंकि प्रभावी नाभिकीय आवेश (Effective nuclear charge) में वृद्धि होती है जो बाहरी इलेक्ट्रॉनों को नाभिक की ओर अधिक दृढ़ता से आकर्षित करती है।
- 2. इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron gain enthalpy) का ऋणात्मक मान हैलोजन समूह में नीचे जाने पर (फ्लोरिन से आयोडीन तक) लगातार बढ़ता है, क्योंकि परमाणु आकार में वृद्धि के साथ आने वाले इलेक्ट्रॉन का नाभिक द्वारा आकर्षण अधिक प्रभावी हो जाता है।
- 3. आयनन एन्थैल्पी (Ionisation enthalpy) का मान किसी परमाणु की गैसीय अवस्था में उसके सबसे बाहरी कोश से एक इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा को दर्शाता है, और इसका मान नाइट्रोजन के लिए ऑक्सीजन की तुलना में अधिक होता है क्योंकि नाइट्रोजन में अर्ध-पूरित (Half-filled) $p$-कक्षक का अतिरिक्त स्थायित्व होता है।
- 4. विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity) पॉलिंग पैमाने पर मापी जाने वाली एक ऐसी प्रवृत्ति है जिसमें सहसंयोजक बंध में बंधे हुए इलेक्ट्रॉन युग्म को कोई परमाणु अपनी ओर आकर्षित करता है, और आवर्त सारणी में फ्लोरिन सर्वाधिक विद्युत ऋणात्मक तत्व है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर नाभिकीय आवेश बढ़ता है जिससे परमाणु त्रिज्या घटती है। कथन 2 गलत है क्योंकि फ्लोरिन (F) का आकार बहुत छोटा होने के कारण इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षित बल बढ़ जाता है, जिससे इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान क्लोरीन की तुलना में कम हो जाता है और समूह में नीचे जाने पर यह सामान्यतः घटता है। कथन 3 सही है क्योंकि नाइट्रोजन ($1s^2 2s^2 2p^3$) का अर्ध-पूरित विन्यास इसे अधिक स्थायित्व प्रदान करता है, जिससे इलेक्ट्रॉन निकालना कठिन होता है और इसकी आयनन ऊर्जा ऑक्सीजन से अधिक होती है। कथन 4 सही है क्योंकि पॉलिंग पैमाने पर फ्लोरिन की विद्युत ऋणात्मकता सबसे अधिक (4.0) होती है। अधिक जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
विद्युत परिपथों और किर्चॉफ के नियमों (Kirchhoff's Rules) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किर्चॉफ का प्रथम नियम (धारा नियम या KCL) आवेश संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी संधि (Junction) पर मिलने वाली समस्त धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
2. किर्चॉफ का द्वितीय नियम (वोल्टेज नियम या KVL) ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी बंद लूप (Closed loop) में कुल विभव परिवर्तनों का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
3. जब एक ही मान के आंतरिक प्रतिरोध वाले कई सेलों को समांतर क्रम (Parallel combination) में जोड़ा जाता है, तो कुल धारा का मान एकल सेल की तुलना में काफी कम हो जाता है, और यह संयोजन तब अत्यधिक उपयोगी होता है जब बाह्य प्रतिरोध का मान आंतरिक प्रतिरोध की तुलना में बहुत अधिक होता है।
4. किसी Wheatstone Bridge के संतुलन की स्थिति में, गैल्वेनोमीटर में कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है, और यह विधि अज्ञात प्रतिरोध को अत्यधिक यथार्थता के साथ मापने के लिए उपयोग की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
→
अवतल दर्पण की फोकस दूरी?
→
विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) और चुम्बकत्व के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के द्वितीय नियम के अनुसार, किसी परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) का परिमाण उस परिपथ सेबद्ध चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की दर के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
2. लेंज का नियम (Lenz's law) ऊर्जा संरक्षण के नियम का एक प्रत्यक्ष परिणाम है, जो यह बताता है कि प्रेरित धारा की दिशा हमेशा उस कारण का विरोध करती है जिसके कारण वह स्वयं उत्पन्न होती है।
3. भंवर धाराएँ (Eddy currents) किसी चालक के भीतर तब उत्पन्न होती हैं जब उसे परिवर्तित चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, और इनका उपयोग प्रेरण भट्टी (Induction furnace) में धातुओं को पिघलाने तथा चुंबकीय ब्रेक (Magnetic braking) प्रणालियों में किया जाता है।
4. किसी धारावाही परिनालिका (Solenoid) के भीतर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता उसके सिरों पर अधिकतम होती है और केंद्र की ओर जाने पर घटती जाती है, तथा यह क्षेत्र परिनालिका की त्रिज्या पर निर्भर करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
मानव रोगों और उनके संचरण या उपचार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'प्लेग' (Plague) एक तीव्र जीवाणु जनित संक्रमण है जो 'येर्सिनिया पेस्टिस' (Yersinia pestis) के कारण होता है, और यह मुख्य रूप से संक्रमित पिस्सुओं (Fleas) के काटने से या श्वसन बूंदों के माध्यम से मनुष्यों में फैलता है।
2. 'रैबीज' (Rabies) एक विषाणु जनित संक्रामक रोग है जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है, और इसके उपचार के लिए 'पाश्चर' द्वारा विकसित एंटी-रैबीज टीके के साथ-साथ 'रैबीज इम्युनोग्लोबुलिन' (RIG) का उपयोग किया जाता है।
3. 'एड्स' (AIDS) के लिए उत्तरदायी HIV एक रेट्रोवायरस है जो शरीर की 'CD4+ T-सहायक कोशिकाओं' को नष्ट करता है, और इसके निदान के लिए 'वेस्टर्न ब्लोट' परीक्षण और 'एलिसा' (ELISA) परीक्षण किए जाते हैं।
4. 'मलेरिया' प्लासमोडियम प्रजाति के परजीवी के कारण होता है, जिसके संचरण के लिए मादा 'क्युलेक्स' मच्छर प्राथमिक संवाहक के रूप में कार्य करती है और इसके उपचार में क्लोरिनक्विइन प्रभावी औषधि है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
भौतिक राशियों, उनके विमीय सूत्रों और मात्रकों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक ($G$): विमीय सूत्र $[M^{-1} L^3 T^{-2}]$ और SI मात्रक $N \cdot m^2 \cdot kg^{-2}$
2. श्यानता गुणांक ($\eta$): विमीय सूत्र $[M^1 L^{-1} T^{-1}]$ और SI मात्रक $kg \cdot m^{-1} \cdot s^{-1}$
3. प्लांक नियतांक ($h$): विमीय सूत्र $[M^1 L^2 T^{-1}]$ और SI मात्रक $J \cdot s$
4. पृष्ठ तनाव ($S$): विमीय सूत्र $[M^1 L^0 T^{-2}]$ और SI मात्रक $N \cdot m^{-2}$
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.