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General Science
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कार्बनिक रसायन में हाइड्रोकार्बन के रासायनिक व्यवहार, समावयवता (Isomerism) और उनकी अभिक्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. एल्काइन्स (Alkynes) में त्रिक बंध (Triple bond) उपस्थित होने के बावजूद ये इलेक्ट्रॉनेस्नेही योगात्मक (Electrophilic addition) अभिक्रियाओं की तुलना में अधिक आसानी से नाभिकस्नेही योगात्मक अभिक्रियाएँ प्रदर्शित करते हैं क्योंकि इनका कार्बन-कार्बन त्रिक बंध इलेक्ट्रॉन घनत्व से भरपूर होता है।
  2. 2. बेन्जीन और उसके व्युत्पन्न (ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन) हकल के नियम ($4n+2$ पाई इलेक्ट्रॉन) का पालन करते हैं और वे अपनी उच्च असंतृप्ति के बावजूद योगात्मक अभिक्रियाओं के बजाय आसानी से इलेक्ट्रॉनेस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ (Electrophilic substitution reactions) देते हैं।
  3. 3. मुक्त मूलक प्रतिस्थापन (Free-radical substitution) अभिक्रियाओं में एल्केन्स का हैलोजनीकरण एक श्रृंखला अभिक्रिया (Chain reaction) के रूप में होता है, जिसमें ब्रोमीन की तुलना में क्लोरीन की क्रियाशीलता अत्यधिक तीव्र और कम वरनात्मक (Less selective) होती है।
  4. 4. ज्यामितीय समावयवता (Geometric Isomerism) प्रदर्शित करने के लिए किसी यौगिक में प्रतिबंधित घूर्णन (Restricted rotation) का होना अनिवार्य है, और एल्कीन्स के सिस्ट-ट्रान्स (Cis-Trans) समावयवियों के भौतिक गुण जैसे द्विध्रुव आघूर्ण और क्वथनांक भिन्न-भिन्न होते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि एल्काइन्स और एल्कीन्स दोनों ही अपने उच्च इलेक्ट्रॉन घनत्व (पाई बंधों) के कारण मुख्य रूप से **इलेक्ट्रॉनेस्नेही योगात्मक (Electrophilic addition)** अभिक्रियाओं में भाग लेते हैं, न कि नाभिकस्नेही योगात्मक अभिक्रियाओं में। कथन 2 सही है; एromatic यौगिक (जैसे विकिपीडिया संदर्भ) हकल के नियम का पालन करते हैं और अपनी विशेष ऐरोमैटिक स्थिरता को बनाए रखने के लिए योगात्मक अभिक्रियाओं के बजाय प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ दर्शाते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि ब्रोमीनीकरण अत्यधिक वरनात्मक (Selective) और मंद होता है, जबकि क्लोरीनीकरण अत्यधिक तीव्र और कम वरनात्मक होता है। कथन 4 सही है, प्रतिबंधित घूर्णन (जैसे द्विबंध या वलय) के कारण एल्कीन्स ज्यामितीय समावयवता प्रदर्शित करते हैं।
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