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General Science
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धातुओं, अधातुओं और उनके प्रमुख यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा उनके औद्योगिक अनुप्रयोगों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'सफेद फॉस्फोरस' (White Phosphorus) अत्यधिक प्रतिक्रियाशील और दीप्तिमान (Phosphorescent) ठोस होता है, जो पानी में अघुलनशील होने के कारण जल के अंदर संग्रहित किया जाता है, तथा यह कास्टिक सोडा ($NaOH$) के साथ गर्म करने पर जहरीली फॉस्फीन ($PH_3$) गैस उत्पन्न करता है।
  2. 2. 'कांस्य' (Bronze) तांबे और टिन की एक मिश्रधातु है, जबकि 'पीतल' (Brass) तांबे और जस्ते (Zinc) की मिश्रधातु है, जिसमें जस्ते की उपस्थिति पीतल को संक्षारण-प्रतिरोधी बनाती है, किंतु कांस्य की तुलना में पीतल में तन्यता (Ductility) कम होती है।
  3. 3. 'सिंदूर' (Vermilion या Red Lead) का रासायनिक नाम लेड टेट्राक्साइड ($Pb_3O_4$) है, जिसका उपयोग पारंपरिक रूप से लाल रंग के पेंट पिगमेंट और बैटरी निर्माण में किया जाता है।
  4. 4. जब सिलिकॉन डाइऑक्साइड ($SiO_2$) को सोडियम कार्बोनेट के साथ उच्च तापमान पर पिघलाया जाता है, तो सोडियम सिलिकेट बनता है, जिसे 'जल कांच' (Water Glass) कहा जाता है, और यह जल में आसानी से घुलकर एक क्षारीय विलयन बनाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

उपर्युक्त कथनों में से कथन 1, 2 और 4 सही हैं, जबकि कथन 3 असत्य है। रासायनिक रूप से, 'सिंदूर' या ट्रेडिशनल वर्मिलियन मुख्य रूप से मर्क्युरिक सल्फाइड ($HgS$) होता है, जबकि लेड टेट्राक्साइड ($Pb_3O_4$) को 'रेड लेड' या सिंदूरी कहा जाता है, किंतु औषधीय और पारंपरिक दृष्टिकोण से दोनों में रासायनिक भिन्नता है। सफेद फॉस्फोरस अत्यधिक प्रतिक्रियाशील होने के कारण जल में सुरक्षित रखा जाता है और कास्टिक सोडा के साथ अभिक्रिया कर फॉस्फीन गैस देता है। कांस्य और पीतल की मिश्रधातु संरचनाएं तथा जल कांच का निर्माण सही हैं। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा निष्कर्षण प्रक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'भर्जन' (Roasting) वह प्रक्रिया है जिसमें अयस्क को वायु की अत्यधिक मात्रा में उसके गलनांक बिंदु से नीचे गर्म किया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप सल्फाइड अयस्क ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाते हैं और वाष्पशील अशुद्धियाँ दूर हो जाती हैं। 2. थर्माइट वेल्डिंग (Thermite welding) में एल्युमिनियम पाउडर का उपयोग एक शक्तिशाली अपचायक के रूप में किया जाता है, जो फेरिक ऑक्साइड ($Fe_2O_3$) के साथ तीव्र अभिक्रिया करके पिघला हुआ लोहा उत्पन्न करता है, क्योंकि एल्युमिनियम की ऑक्सीजन के प्रति बंधुता आयरन से बहुत अधिक होती है। 3. 'जिंकोसाइट' (Zincite) और 'कैलेमीन' (Calamine) दोनों ही जिंक के प्रमुख अयस्क हैं, जिनमें से कैलेमीन एक कार्बोनेट अयस्क है जिसके निष्कर्षण के लिए निस्तापन (Calcination) प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? फूल का कार्य? नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) और रेडियोएक्टिव क्षيय के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जब एक धीमे न्यूट्रॉन की बमबारी यूरेनियम-235 ($^{235}U$) पर की जाती है, तो यह एक अस्थाई समस्थानिक $^{236}U$ बनाता है जो तुरंत दो छोटे नाभिकों में विखंडित हो जाता है और इस प्रक्रिया में भारी मात्रा में ऊर्जा के साथ-साथ औसतन 2 से 3 तेज न्यूट्रॉन मुक्त होते हैं। 2. परमाणु रिएक्टर में विखंडन की दर को नियंत्रित करने के लिए 'नियंत्रक छड़ें' (Control rods) के रूप में कैडमियम या बोरॉन का उपयोग किया जाता है, जो न्यूट्रॉनों का तीव्र विसर्जन करके उन्हें मंदित करती हैं। 3. द्रव्यमान क्षति (Mass defect) वह अंतर है जो किसी नाभिक के वास्तविक द्रव्यमान और उसके व्यक्तिगत न्यूक्लियॉनों (प्रोटॉन और न्यूट्रॉन) के कुल द्रव्यमान के बीच होता है, और यही द्रव्यमान क्षति अल्बर्ट आइंस्टीन के द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता समीकरण ($E = mc^2$) के अनुसार नाभिकीय बंधन ऊर्जा में परिवर्तित होती है। 4. अल्फा ($α$) क्षय के दौरान जनक नाभिक का परमाणु क्रमांक 2 इकाई से घट जाता है और द्रव्यमान संख्या 4 इकाई से कम हो जाती है, क्योंकि एक अल्फा कण वस्तुतः हीलियम नाभिक ($_2^4He^{2+}$) के समान होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? समतल तरंग? विद्युत परिपथों, ओम के नियम और किर्चऑफ के नियमों (Kirchhoff's laws) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किर्चऑफ का प्रथम नियम (धारा नियम या KCL) आवेश संरक्षण के नियम पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी संधि पर मिलने वाली सभी विद्युत धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है। 2. किर्चऑफ का द्वितीय नियम (वोल्टेज नियम या KVL) ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का पालन करता है, जो यह बताता है कि किसी बंद पाश (Closed loop) में सभी विद्युत वाहक बलों (emf) और प्रतिरोधों पर कुल विभव पतन का बीजगणितीय योग उस पाश में उपस्थित कुल धाराओं के गुणनफल के बराबर होता है। 3. जब समान प्रतिरोध वाले कई प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम (Series combination) में जोड़ा जाता है, तो परिपथ का कुल समतुल्य प्रतिरोध बढ़ जाता है और प्रत्येक प्रतिरोधक से प्रवाहित होने वाली धारा का मान भिन्न-भिन्न होता है। 4. आंतरिक प्रतिरोध ($r$) वाले किसी विद्युत सेल का टर्मिनल विभवांतर ($V$) तब उसके विद्युत वाहक बल ($E$) से अधिक होता है जब सेल से कोई धारा ली जा रही हो (निरावेशन की स्थिति में)। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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