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General Science
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भौतिक राशियों और उनके मापन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. पार्सैक (Parsec) खगोलीय दूरियों को मापने की सबसे बड़ी व्यावहारिक इकाई है, जो कि एक आकाशीय पिंड द्वारा पृथ्वी की कक्षा की औसत त्रिज्या (1 खगोलीय इकाई) पर अंतरित 1 आर्कसेकंड का कोण बनाती है, और यह लगभग 3.26 प्रकाश वर्ष के बराबर होती है।
- 2. 'एम्पीयर' को विद्युत धारा के मात्रक के रूप में परिभाषित करते समय निर्वात में दो सीधे, अनंत लंबाई के और नगण्य अनुप्रस्थ काट वाले चालकों के बीच प्रति मीटर लंबाई पर लगने वाले चुंबकीय बल का मान $2 \times 10^{-7}$ न्यूटन निर्धारित किया गया है।
- 3. 'कैंडेला' दीप्त तीव्रता का एसआई मात्रक है, जिसे किसी निश्चित दिशा में 540 $\times$ $10^{12}$ हर्ट्ज़ आवृत्ति वाले एकवर्णी प्रकाश के स्रोत द्वारा उत्सर्जित दीप्त तीव्रता के आधार पर परिभाषित किया जाता है जिसकी विकिरण तीव्रता उस दिशा में $\frac{1}{683}$ वाट प्रति स्टेरडियन होती है।
- 4. समतलीय कोण का मात्रक 'रेडियन' और ठोस कोण का मात्रक 'स्टेरडियन' दोनों ही एसआई प्रणाली में व्युत्पन्न राशियाँ (Derived quantities) और व्युत्पन्न मात्रक माने जाते हैं, जिनका कोई विमीय सूत्र नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 सही हैं। पार्सैक खगोलीय दूरियों की सबसे बड़ी इकाई है और 1 पार्सैक $\approx 3.26$ प्रकाश वर्ष होता है। एम्पीयर की एसआई परिभाषा दो अनंत लंबे चालकों के बीच प्रति मीटर लंबाई पर $2 \times 10^{-7}$ न्यूटन के चुंबकीय बल पर आधारित है। कैंडेला की परिभाषा 540 $\times$ $10^{12}$ हर्ट्ज़ आवृत्ति और $\frac{1}{683}$ वाट प्रति स्टेरडियन विकिरण तीव्रता वाले स्रोत के अनुरूप है। कथन 4 असत्य है क्योंकि रेडियन और स्टेरडियन एसआई प्रणाली में 'पूरक राशियाँ' (Supplementary quantities) और पूरक मात्रक हैं, न कि व्युत्पन्न मात्रक; हालाँकि, ये दोनों विमाहीन (Dimensionless) राशियाँ अवश्य होती हैं। इस विषय की विस्तृत जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में दी गई है।
Related Questions
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मानव रोगों और उनके रोगजनकों, संचरण तंत्र तथा नैदानिक लक्षणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'मलेरिया' (Malaria) प्लाज्मोडियम प्रजाति के प्रोटोजोआ के कारण होता है, जिसका संचरण मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से होता है, और इसके गंभीर रूप (प्लाज्मोडियम फैल्ciparum) में रोगी को 'ब्लैकवाटर फीवर' हो सकता है जिसमें हीमोग्लोबिनयूरिया (मूत्र के साथ हीमोग्लोबिन का आना) की स्थिति उत्पन्न होती है।
2. 'डिफ्थीरिया' (Diphtheria) कॉर्नेबैक्टीरियम डिफ्थिरियाई (Corynebacterium diphtheriae) नामक ग्राम-पॉजिटिव जीवाणु के कारण होता है, जो श्वसन नली में एक स्रावी धूसर रंग की 'झिल्ली' (Pseudomembrane) का निर्माण करता है और इसके एक्सोटॉक्सिन से हृदय तथा तंत्रिका तंत्र को गंभीर क्षति पहुँचती है।
3. 'ट्रैकोमा' (Trachoma) क्लैमाइडिया ट्रैकोमैटिस (Chlamydia trachomatis) नामक अंतःकोशिकी जीवाणु के कारण होने वाला नेत्र संक्रमण है, जो कार्निया और कंजंक्टिवा को प्रभावित करता है और लंबे समय तक संक्रमण रहने से पलकें अंदर की ओर मुड़ जाती हैं (ट्रिकियासिस)।
4. 'लेप्रॉसी' (कुष्ठ रोग) माइकोबैक्टीरियम लेप्रे के कारण होता है, जो मुख्य रूप से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क के न्यूरॉन्स को गंभीर रूप से क्षति पहुँचाता है, जबकि इसकी परिधीय तंत्रिकाओं और त्वचा पर कोई संवेदनशीलता प्रभावित नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर में होने वाले विभिन्न प्रोटोजोआ और कवक जनित रोगों तथा उनके संचरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'अमीबायोसिस' (अमीबी पेचिश) एक प्रोटोजोआ जनित रोग है जो एंटअमीबा हिस्टोलिटिका (Entamoeba histolytica) के कारण होता है, और इसके संचरण का मुख्य माध्यम दूषित जल और भोजन है, जो आंतों के संक्रमण के साथ-साथ गंभीर रक्तयुक्त दस्त (डिसेंट्री) पैदा करता है।
2. 'रिंगवर्म' (दाद) एक कवक जनित संक्रामक त्वचा रोग है जो मुख्य रूप से माइक्रोस्पोरम, ट्राइकोफाइटन और एपिडर्मोफाइटन जैसे कवकों द्वारा होता है, और यह रोग मिट्टी या संक्रमित व्यक्तियों के तौकिए, कपड़ों या बिस्तर के उपयोग से फैलता है जिसके लिए उष्ण और नम वातावरण सबसे अनुकूल होता है।
3. 'एस्केरिसिज़' (Aroscariasis) एक कवक जनित आंतरिक संक्रमण है जो कवक के बीजाणुओं के अंतःश्वसन के माध्यम से फेफड़ों को सीधे प्रभावित करता है और तीव्र श्वासरोध उत्पन्न करता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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शुद्ध सोना?
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बीज?
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विलयन के अणुसंख्यक गुणों (Colligative properties) और उत्प्रेरण (Catalysis) की क्रियाविधि के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर विलयन के वाष्प दाब में होने वाला आपेक्षिक अवनमन (Relative lowering of vapour pressure) विलेय के मोल अंश के बराबर होता है, और यह एक अणुसंख्यक गुण है जो विलेय कणों की संख्या पर निर्भर करता है, न कि उनकी प्रकृति पर।
2. 'वांट हॉफ गुणांक' ($i$) का मान यदि किसी वैद्युत अपघट्य के जलीय विलयन में संगुणन (Association) होता है, तो 1 से कम होता है, जबकि पूर्ण वियोजन की स्थिति में यह उत्पन्न होने वाले कुल आयनों की संख्या के बराबर होता है।
3. एन्जाइम उत्प्रेरण (Enzyme catalysis) में प्रयुक्त होने वाले जैव-उत्प्रेरक अत्यधिक विशिष्ट होते हैं और वे रासायनिक अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा (Activation energy) को बढ़ा देते हैं, जिससे अभिक्रिया की दर तीव्र हो जाती है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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