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General Science
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भौतिक राशियों और उनके मापन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. पार्सैक (Parsec) खगोलीय दूरियों को मापने की सबसे बड़ी व्यावहारिक इकाई है, जो कि एक आकाशीय पिंड द्वारा पृथ्वी की कक्षा की औसत त्रिज्या (1 खगोलीय इकाई) पर अंतरित 1 आर्कसेकंड का कोण बनाती है, और यह लगभग 3.26 प्रकाश वर्ष के बराबर होती है।
  2. 2. 'एम्पीयर' को विद्युत धारा के मात्रक के रूप में परिभाषित करते समय निर्वात में दो सीधे, अनंत लंबाई के और नगण्य अनुप्रस्थ काट वाले चालकों के बीच प्रति मीटर लंबाई पर लगने वाले चुंबकीय बल का मान $2 \times 10^{-7}$ न्यूटन निर्धारित किया गया है।
  3. 3. 'कैंडेला' दीप्त तीव्रता का एसआई मात्रक है, जिसे किसी निश्चित दिशा में 540 $\times$ $10^{12}$ हर्ट्ज़ आवृत्ति वाले एकवर्णी प्रकाश के स्रोत द्वारा उत्सर्जित दीप्त तीव्रता के आधार पर परिभाषित किया जाता है जिसकी विकिरण तीव्रता उस दिशा में $\frac{1}{683}$ वाट प्रति स्टेरडियन होती है।
  4. 4. समतलीय कोण का मात्रक 'रेडियन' और ठोस कोण का मात्रक 'स्टेरडियन' दोनों ही एसआई प्रणाली में व्युत्पन्न राशियाँ (Derived quantities) और व्युत्पन्न मात्रक माने जाते हैं, जिनका कोई विमीय सूत्र नहीं होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 3 सही हैं। पार्सैक खगोलीय दूरियों की सबसे बड़ी इकाई है और 1 पार्सैक $\approx 3.26$ प्रकाश वर्ष होता है। एम्पीयर की एसआई परिभाषा दो अनंत लंबे चालकों के बीच प्रति मीटर लंबाई पर $2 \times 10^{-7}$ न्यूटन के चुंबकीय बल पर आधारित है। कैंडेला की परिभाषा 540 $\times$ $10^{12}$ हर्ट्ज़ आवृत्ति और $\frac{1}{683}$ वाट प्रति स्टेरडियन विकिरण तीव्रता वाले स्रोत के अनुरूप है। कथन 4 असत्य है क्योंकि रेडियन और स्टेरडियन एसआई प्रणाली में 'पूरक राशियाँ' (Supplementary quantities) और पूरक मात्रक हैं, न कि व्युत्पन्न मात्रक; हालाँकि, ये दोनों विमाहीन (Dimensionless) राशियाँ अवश्य होती हैं। इस विषय की विस्तृत जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में दी गई है।
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