BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

General Science
1 views

जीन विनिमय (Crossing Over) और आनुवंशिक विविधता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. जीन विनिमय की प्रक्रिया अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) की प्रोफेज़-I की 'पैचाइटीन' (Pachytene) अवस्था के दौरान समजात गुणसूत्रों (Homologous chromosomes) के गैर-सह-भ्रातृ क्रोमैटिड्स (Non-sister chromatids) के बीच आनुवंशिक पदार्थों के आदान-प्रदान के रूप में होती है।
  2. 2. यह प्रक्रिया 'रिकॉम्बिनेज' (Recombinase) एंजाइम द्वारा उत्प्रेरित होती है और यह गुणसूत्रों पर स्थित जीनों की लिंकेज को तोड़कर नए आनुवंशिक संयोजनों (Recombinants) का निर्माण करती है, जो जैविक विकास (Organic Evolution) में विभिन्नता का एक प्रमुख स्रोत है।
  3. 3. क्रॉसिंग ओवर के ठीक बाद की अवस्था यानी 'डाइप्लोटीन' (Diplotene) में समजात गुणसूत्र एक-दूसरे से पूरी तरह अलग हो जाते हैं और कहीं भी जुड़े नहीं रहते, जिससे 'काइअस्माटा' (Chiasmata) का निर्माण समाप्त हो जाता है।
  4. 4. जीन विनिमय की आवृत्ति (Frequency of crossing over) दो जीनों के बीच की दूरी के सीधे समानुपातिक होती है, अर्थात जितने अधिक दूर जीन होंगे, क्रॉसिंग ओवर की संभावना उतनी ही अधिक होगी, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में दी गई है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 4 सही हैं। जीन विनिमय (Crossing Over) अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) की प्रोफेज़-I की पैचाइटीन अवस्था में समजात गुणसूत्रों के नॉन-सिस्टर क्रोमैटिड्स के बीच होता है, जो रिकॉम्बिनेज एंजाइम द्वारा उत्प्रेरित होता है। यह जैविक विकास के लिए आनुवंशिक विविधता उत्पन्न करता है और इसकी आवृत्ति जीनों के बीच की दूरी के समानुपातिक होती है। कथन 3 गलत है क्योंकि डाइप्लोटीन (Diplotene) अवस्था में समजात गुणसूत्र पूरी तरह अलग नहीं होते, बल्कि उनके एक्स-आकार के संयोजन स्थल 'काइअस्माटा' (Chiasmata) स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगते हैं और वे डायकाइनेसिस तक जुड़े रहते हैं। इस विषय की विस्तृत जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में दी गई है।
Share:

Related Questions

मानव रोगों, उनके रोगजनकों (Pathogens) और उनके संचरण तंत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. कालाजार (Kala-azar): यह 'लीशमैनिया डोनोवानी' (Leishmania donovani) प्रोटोजोआ के कारण होता है, जिसका संचरण 'सैंडफ्लाई' (बालू मक्खी - Phlebotomus) द्वारा होता है और यह मुख्य रूप से यकृत तथा प्लीहा को प्रभावित करता है। 2. स्लीपिंग सिकनेस (African Sleeping Sickness): यह 'ट्रिपैनोसोमा' (Trypanosoma) प्रजाति के कारण होता है, जिसका वाहक 'त्से त्सें मक्खी' (Tsetse fly) है और यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। 3. ट्राइकोनोमायसिस (Trichinosis): यह एक जीवाणु जनित संक्रमण है जो संदूषित जल और भोजन के सेवन से फैलता है, और इसमें मुख्य रूप से आंतों की उपकला और श्वसन तंत्र नष्ट हो जाते हैं। उपर्युक्त में से कौन सा/से युग्म सही सुमेलित है/हैं? आनुवंशिकी और जैव विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हार्डी-वेनबर्ग साम्यावस्था (Hardy-Weinberg equilibrium) के अनुसार, एक बड़े यादृच्छिक रूप से संप्रजनन करने वाली आबादी में एलील आवृत्तियाँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थिर और नियत रहती हैं, बशर्ते कि उस पर उत्परिवर्तन, प्राकृतिक चयन, जीन प्रवाह और आनुवंशिक विचलन जैसी विकासवादी शक्तियाँ कार्य न कर रही हों। 2. 'अनुवंशिक अपवाह' (Genetic drift) बड़े पैमाने की आबादी की तुलना में छोटी आबादी में अधिक प्रभावशाली ढंग से काम करता है, जिसके कारण बिना किसी अनुकूलन के लाभ के भी यादृच्छिक रूप से एलील आवृत्तियों में तेजी से परिवर्तन हो सकता है। 3. लामार्कवाद के 'उपार्जित लक्षणों की वंशागति' (Inheritance of acquired characters) के सिद्धांत को वीिज़मैन के 'जननप्लाज्म की निरंतरता' (Continuity of germplasm) के प्रयोगों द्वारा पूरी तरह से सही सिद्ध कर दिया गया था, जिसमें उन्होंने चूहों की कई पीढ़ियों तक पूँछ काटने के बाद भी पाया कि अगली पीढ़ी में पूँछ गायब हो गई थी। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? वायुमंडल की परतें? समांग और विषमांग उत्प्रेरण (Homogeneous and Heterogeneous Catalysis) तथा विलयन के अणुसंख्यक गुणों (Colligative properties) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. समांग उत्प्रेरण में अभिकारक और उत्प्रेरक दोनों समान भौतिक अवस्था (सामान्यतः द्रव या गैस) में होते हैं, जबकि विषमांग उत्प्रेरण में ठोस उत्प्रेरकों की सतह पर अभिकारकों का अधिशोषी सक्रियण (Adsorptive activation) होता है, जो रासायनिक अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा (Activation energy) को कम कर देता है। 2. वाष्पशील विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर विलयन के वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन (Relative lowering of vapour pressure) विलेय के मोल अंश के बराबर होता है, और यह 'राउल्ट का नियम' केवल आदर्श विलयनों द्वारा ही सभी सांद्रता सीमाओं पर सटीकता से पालन किया जाता है। 3. कोलॉइडी विलयनों (Colloidal solutions) में प्रक्षिप्त प्रावस्था (Dispersed phase) के कणों द्वारा आपतित प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण उत्पन्न होने वाले 'टिंडल प्रभाव' (Tyndall effect) को देखने के लिए यह आवश्यक है कि प्रक्षिप्त कणों का व्यास आपतित प्रकाश की तरंगदैर्ध्य की तुलना में बहुत अधिक हो। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? धातुओं, अधातुओं और उनके प्रमुख यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा उनके औद्योगिक अनुप्रयोगों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'सफेद फॉस्फोरस' (White Phosphorus) अत्यधिक प्रतिक्रियाशील और दीप्तिमान (Phosphorescent) ठोस होता है, जो पानी में अघुलनशील होने के कारण जल के अंदर संग्रहित किया जाता है, तथा यह कास्टिक सोडा ($NaOH$) के साथ गर्म करने पर जहरीली फॉस्फीन ($PH_3$) गैस उत्पन्न करता है। 2. 'कांस्य' (Bronze) तांबे और टिन की एक मिश्रधातु है, जबकि 'पीतल' (Brass) तांबे और जस्ते (Zinc) की मिश्रधातु है, जिसमें जस्ते की उपस्थिति पीतल को संक्षारण-प्रतिरोधी बनाती है, किंतु कांस्य की तुलना में पीतल में तन्यता (Ductility) कम होती है। 3. 'सिंदूर' (Vermilion या Red Lead) का रासायनिक नाम लेड टेट्राक्साइड ($Pb_3O_4$) है, जिसका उपयोग पारंपरिक रूप से लाल रंग के पेंट पिगमेंट और बैटरी निर्माण में किया जाता है। 4. जब सिलिकॉन डाइऑक्साइड ($SiO_2$) को सोडियम कार्बोनेट के साथ उच्च तापमान पर पिघलाया जाता है, तो सोडियम सिलिकेट बनता है, जिसे 'जल कांच' (Water Glass) कहा जाता है, और यह जल में आसानी से घुलकर एक क्षारीय विलयन बनाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.