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पर्यावरण शिक्षण में बच्चों को 'प्राथमिक स्तर' पर कैसे सिखाना चाहिए?

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छोटे बच्चों को उनके परिवेश के अनुभवों से जोड़ा जाता है।
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→ आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के रासायनिक एवं भौतिक गुणों की आवर्तिता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी उदासीन गैसीय परमाणु से एक इलेक्ट्रॉन को विलग करने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा 'प्रथम आयनन एन्थैल्पी' कहलाती है, और आवर्त सारणी में किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु आकार घटने के कारण आयनन एन्थैल्पी सामान्यतः बढ़ती है, तथापि ऑक्सीजन की प्रथम आयनन एन्थैल्पी नाइट्रोजन से कम होती है क्योंकि नाइट्रोजन के $2p$ कक्षकों में अर्ध-पूरित (half-filled) विन्यास का अतिरिक्त स्थायित्व पाया जाता है। 2. 'इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी' (Electron Gain Enthalpy) का ऋणात्मक मान फ्लोरिन (-328 kJ/mol) की तुलना में क्लोरीन (-349 kJ/mol) के लिए अधिक होता है, जिसका मुख्य कारण फ्लोरिन परमाणु का अत्यंत छोटा आकार होना है, जिससे आने वाले इलेक्ट्रॉन पर तीव्र अंतःइलेक्ट्रॉनी प्रतिकर्षण उत्पन्न होता है। 3. लैंथेनाइड आकुंचन (Lanthanoid contraction) के प्रभावस्वरूप, संक्रमण तत्वों की दूसरी और तीसरी श्रेणियों (जैसे ज़िरकोनियम और हाफ़िज़ियम) के तत्वों की परमाणु त्रिज्याएँ लगभग समान हो जाती हैं, जिसके कारण उनके रासायनिक गुण अत्यधिक भिन्न हो जाते हैं और उन्हें पृथक् करना बहुत आसान हो जाता है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? → मानव शरीर के परिसंचरण और श्वसन तंत्र की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मानव हृदय का 'पेसमेकर' कहे जाने वाला सिनोआट्रियल नोड (SAN) दाएं आलिंद की दीवार में स्थित होता है, जो स्वतः उत्तेजित होने की क्षमता रखता है और हृदय में विद्युत आवेग उत्पन्न करके संकुचन की दर को नियंत्रित करता है। 2. फुफ्फुसीय धमनी (Pulmonary artery) एकमात्र ऐसी धमनी है जो ऑक्सीजन-विहीन (विऑक्सीकृत) रक्त को हृदय के दाएं निलय से फेफड़ों तक ले जाती है, जबकि फुफ्फुसीय शिरा फेफड़ों से ऑक्सीजन युक्त रक्त को बाएं आलिंद में लाती है। 3. जब हम गहरी सांस लेते हैं, तो पसलियां ऊपर और बाहर की ओर गति करती हैं तथा डायाफ्राम चपटा हो जाता है, जिसके कारण वक्षीय गुहा का आयतन कम हो जाता है और फेफड़ों के भीतर का वायुदाब वायुमंडल की तुलना में अधिक हो जाता है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? → पदार्थ के सामान्य गुण, पृष्ठ तनाव, श्यानता और आर्किमिडीज के सिद्धांत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी द्रव की स्वतंत्र सतह पर पृष्ठ तनाव (Surface Tension) का कारण अणुओं के बीच लगने वाला ससंजक बल (Cohesive force) है, और तापमान बढ़ाने पर अधिकांश द्रवों का पृष्ठ तनाव घट जाता है, जबकि घुलनशील अशुद्धियाँ मिलाने पर यह बढ़ भी सकता है। 2. श्यानता (Viscosity) द्रवों का वह गुण है जिसके कारण द्रव की विभिन्न परतें अपनी ही परतों के बीच होने वाली相対 गति का विरोध करती हैं, और गैसों में श्यानता ताप बढ़ने पर घटती है जबकि द्रवों में ताप बढ़ने पर बढ़ती है। 3. आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार, जब कोई वस्तु किसी तरल में आंशिक या पूर्ण रूप से डुबोई जाती है, तो वह अपने द्वारा विस्थापित तरल के भार के बराबर ऊपर की ओर एक उत्प्लावन बल (Buoyant force) का अनुभव करती है, और वस्तु के तैरने के लिए वस्तु का घनत्व तरल के घनत्व से अधिक होना चाहिए। 4. केशिकत्व (Capillarity) की घटना पृष्ठ तनाव के कारण होती है, जिसके अंतर्गत यदि काँच की किसी नली को जल में डुबोया जाए तो जल नली में ऊपर चढ़ जाता है क्योंकि जल और काँच के बीच का आसंजक बल (Adhesive force), जल के ससंजक बल की तुलना में अधिक होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → नाभिकीय भौतिकी और रेडियोएक्टिव विघटन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'गामा क्षय' (Gamma decay) के दौरान नाभिक से उच्च ऊर्जा वाले विद्युत चुंबकीय विकिरण उत्सर्जित होते हैं, जिससे जनक नाभिक के परमाणु क्रमांक (Atomic number) और द्रव्यमान संख्या (Mass number) में कोई परिवर्तन नहीं होता है, बल्कि उत्तेजित नाभिक अपनी निम्न ऊर्जा अवस्था (Ground state) में लौट आता है। 2. रेडियोएक्टिव समस्थानिकों की अर्ध-आयु ($T_{1/2}$) का मान बाह्य पर्यावरणीय कारकों जैसे अत्यधिक उच्च ताप, दाब तथा प्रबल रासायनिक बंधों की उपस्थिति से काफी हद तक प्रभावित होता है, क्योंकि ये कारक नाभिक के आंतरिक विन्यास को सीधे नियंत्रित करते हैं। 3. नाभिकीय संलयन (Nuclear fusion) अभिक्रियाओं के लिए अत्यंत उच्च तापमान (लगभग $10^7$ से $10^8$ केल्विन) की आवश्यकता होती है ताकि धनावेशित नाभिकों के बीच के प्रतिकर्षी कूलॉम बल (Coulomb repulsive force) को पार करके उनके बीच नाभिकीय आकर्षण बल प्रभावी हो सके, जैसा कि सूर्य और तारों की ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? → मानव शरीर के पाचन, श्वसन, परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. आमाशय (Stomach) के जठर म्यूकोसा (Gastric mucosa) में पाई जाने वाली पैरीटाल या ऑक्सिंटिक कोशिकाएँ (Parietal cells) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($HCl$) और 'कैसल का आंतरिक कारक' (Castle's intrinsic factor) का स्रावण करती हैं, जो विटामिन $B_{12}$ के अवशोषण के लिए अनिवार्य है। 2. मानव हृदय की विद्युत गतिविधि के दौरान, निलय सिस्टोल (Ventricular systole) की शुरुआत में 'एट्रियोवेंट्रिकुलर नोड' (AV Node) से उत्पन्न होने वाला आवेग 'हिज के बंडल' (Bundle of His) और 'पुर्किंजे तंतुओं' (Purkinje fibres) के माध्यम से पूरे निलय की पेशियों में तेजी से फैलता है, जिससे दोनों निलय एक साथ संकुचित होते हैं। 3. श्वसन तंत्र के नियमन में, फुफ्फुसीय उच्छवास (Pulmonary ventilation) के दौरान जब फेफड़ों की दीवारें अत्यधिक खिंच जाती हैं, तो 'हेरिंग-ब्रूअर प्रतिवर्त' (Hering-Breuer reflex) के तहत वेगस तंत्रिका (Vagus nerve) के माध्यम से श्वसन केंद्र को प्रेरणाएँ भेजी जाती हैं, जो प्रेरणा (Inspiration) को रोककर उच्छवास को प्रेरित करती हैं। 4. स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (Autonomic Nervous System) के अंतर्गत, परानुकंपी (Parasympathetic) तंत्रिका तंत्र यकृत से ग्लूकोज के विमोचन को प्रेरित करता है, पुतली को फैलाता है (Mydriasis), और कंकाल पेशियों की रक्त वाहिकाओं को संकुचित करता है ताकि आपातकालीन स्थिति से निपटा जा सके। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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